धरातल पर माइनर ही नहीं, विभाग ने गोलामाल करके कागजों में पहुंचा दिया पानी

समाजसेवी रिंपी फौगाट के अनुसार धरातल पर माइनर ही नहीं है तो विभाग ने नहरी पानी कैसे छोड़ दिया. इस मामले की बड़े स्तर पर जांच हो तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है.

Pardeep Sahu | News18 Haryana
Updated: June 20, 2019, 2:27 PM IST
धरातल पर माइनर ही नहीं, विभाग ने गोलामाल करके कागजों में पहुंचा दिया पानी
माइनर का कई स्थानों पर नामों-निशान ही नहीं
Pardeep Sahu
Pardeep Sahu | News18 Haryana
Updated: June 20, 2019, 2:27 PM IST
दादरी शहर से गुजर रही घिकाड़ा से कलियाणा तक माइनर का कई स्थानों पर तो नामों-निशान ही नहीं है. कंडम पड़ी नहर में सिंचाई विभाग द्वारा पिछले 10 वर्षों से लगातार नहरी पानी छोड़ा जा रहा है. ऐसे में विभाग द्वारा नहरी पानी छोडक़र लाखों रुपए का गोलमाल सामने आया है. इस मामले का खुलासा आरटीए से मिली जानकारी में हुआ है. मामला सामने आने पर विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं, जबकि किसानों व आरटीआई एक्टीविस्ट द्वारा जांच के लिए सीएम विंडो पर शिकायत भेजी है.

आरटीआई मांगी तो हुआ खुलासा

आरटीआई एक्टीविस्ट जितेंद्र जटासरा ने आरटीआई से मिली सूचनाएं दिखाते हुए बताया कि कई वर्षों पूर्व ही घिकाड़ा-कलियाणा माइनर कंडम होकर लुप्त हो चुकी है. जबकि सिंचाई विभाग द्वारा उन्हें जो जानकारी दी है, उसमे स्पष्ट है कि विभाग द्वारा पिछले 10 वर्षों से लगातार इस माइनर में पानी छोड़ा जा रहा है. ऐसे में विभाग द्वारा कागजों में पानी दर्शाया गया है, जिससे स्पष्ट है कि विभाग ने लाखों रुपए का गोलमाल किया है. जितेंद्र ने बताया कि पूरे मामले को लेकर उसने सीएम विंडों पर शिकायत भी भेजी है, ताकि जांच होने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके.

धरातल पर माइनर नहीं तो कैसे पानी छोड़ा

समाजसेवी रिंपी फौगाट के अनुसार धरातल पर माइनर ही नहीं है तो विभाग ने नहरी पानी कैसे छोड़ दिया. इस मामले की बड़े स्तर पर जांच हो तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है. रिंपी ने बताया कि करीब 15 वर्ष पूर्व ही माइनर कंडम हो चुकी थी और इस समय माइनर का कहीं अता-पता भी नहीं है. विभाग के अधिकारियों द्वारा सिर्फ कागजों में ही पानी छोड़ा गया है.

माइनर कंडम होने से प्यासे हैं खेत

किसान जगबीर सिंह, जयभगवान व कृष्ण इत्यादि ने बताया कि कई वर्ष पूर्व घिकाड़ा-कलियाणा माइनर द्वारा क्षेत्र के खेतों में सिंचाई होती थी. लेकिन माइनर कंडम होन व जगह-जगह से लुप्त होने के कारण करीब 10 वर्षों से उनके खेत सूखे पड़े हैं. नहरी पानी नहीं आने के कारण किसानों को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. कागजों में नहर को ठीक बताकर पानी छोड़ा जा रहा है जबकि धरातल पर कुछ नहीं है.
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