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70 प्रतिशत से अधिक ग्राउंड वॉटर खत्म, अब सहेज लें बारिश की बूंदें: जलपुरूष राजेंद्र सिंह

Pardeep Sahu | News18 Haryana
Updated: October 30, 2019, 6:22 PM IST
70 प्रतिशत से अधिक ग्राउंड वॉटर खत्म, अब सहेज लें बारिश की बूंदें: जलपुरूष राजेंद्र सिंह
जलपुरूष राजेन्द्र सिंह ने कहा कि नदियों पर बांध नहीं बने तो देश में पेयजल संकट खत्म हो सकता है.

जलपुरूष राजेन्द्र सिंह (Rajendra Singh) ने कहा कि नदियों (Rivers) पर बांध (Dam) नहीं बने तो देश में पेयजल संकट (Water Crisis) खत्म हो सकता है.

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चरखी दादरी. स्टॉकहोम वॉटर अवार्ड व रमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित जलपुरूष (Water Man) राजेन्द्र सिंह (Rajendra Singh) ने कहा कि नदियों पर बांध नहीं बने तो देश में पेयजल संकट (Water Crisis) खत्म हो सकता है. उन्होंने कहा कि गंगा समेत सभी नदियों को सहजने के लिए ठेकेदारों की बजाए केंद्र सरकार अपने स्तर पर बारिश के पानी की बूंद को सहेजने की योजना बनाए ताकि देश में जल बचाने के अभियान को शक्ति मिल सके. इसके लिए उन्होंने अपनी टीम के साथ अविरल गंगाजल साक्षरता यात्रा शुरू की है. यात्रा का अगले वर्ष राजस्थान में समापन होगा.

अविरल गंगाजल साक्षरता यात्रा के तहत जलपुरूष चरखी दादरी पहुंचे

जलपुरूष राजेन्द्र सिंह चरखी दादरी यात्रा के दौरान पहुंचे हैं. इस दौरान उन्होंने मीडिया कर्मियों से बातचीत में कहा कि पानी बचाने की मुहिम को आगे बढ़ाते हुए वे अब पंचायतों के माध्यम से लोगों को व्यर्थ में पानी नहीं बहाने और जल का सदुपयोग करने के लिए जागरूक करेंगे. उन्होंने कहा कि जल संकट से जूझ रहे देश को इससे निजात दिलाने के लिए लोगों को आगे आना होगा. इसके साथ ही बारिश के पानी की एक-एक बूंद को सहेजने के लिए सरकार द्वारा ठोस योजना बनानी चाहिए ताकि पानी की कमी को पूरा कर सूखी धरती की प्यास बुझाई जा सके.

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नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020-21 तक कई प्रमुख शहरों में पीने का पानी नहीं होगा.


राजेंद्र सिंह को मिल चुका ये सम्मान

राजेन्द्र सिंह को वर्ष 2015 में जल संरक्षण और लोगों को जागरुक करने के लिए स्टॉकहोम जल पुरस्कार मिला था. स्टॉकहोम जल पुरस्कार को जल का नोबेल पुरस्कार भी कहा जाता है, जबकि इससे पूर्व सामुदायिक नेतृत्व के लिए 2011 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार भी दिया गया था.

वर्ष 2020-21 तक प्रमुख शहरों में नहीं बचेगा पीने का पानी
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उन्होंने कहा कि देशवासियों को एकजुट होकर पानी बचाने की मुहिम में आगे बढ़कर कार्य करने की क्षमता रखनी होगी, जिससे देश का किसान आसानी से खेतीबाड़ी कर सकेगा और देश एक बार फिर से खुशहाल हो पाएगा. जलपुरुष ने कहा कि पानी को लेकर पूरी दुनिया चिंतित है. नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020-21 तक कई प्रमुख शहरों में पीने का पानी नहीं होगा.

पानी के ​लिए देश छोड़कर चले जाएंगे लोग

राजेंद्र सिंह ने एक बार फिर आगाह किया है कि 70 प्रतिशत से अधिक भूजल परतें सूख चुकी हैं. इससे संकट इतना गहरा हो सकता है कि लोग ऐसे देशों में शरण ले सकते हैं, जहां पर्याप्त मात्रा में पानी हो. उन्होंने कहा कि संकट से निपटने के लिए सरकार और लोगों को एक साथ आगे आना होगा. सरकार को नीति बनानी चाहिए और जल प्रबंधन का काम ठेकेदारों की जगह जनता को दिया जाना चाहिए. अविरल गंगाजल साक्षरता यात्रा द्वारा सरकार व जनता को जल संकट व इसके समाधान को लेकर जागरूक किया जा रहा है.

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First published: October 30, 2019, 6:11 PM IST
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