बीजेपी उम्मीदवार धर्मबीर सिंह से जनता क्यों मांग रही है 5 साल का हिसाब?

भिवानी-महेंद्रगढ़ संसदीय क्षेत्र पर प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा प्रत्याशियों की घोषणा करने के साथ ही चुनावी महाभारत के अधिकांश योद्धाओं की तस्वीर साफ हो गई है.

Pardeep Sahu | News18 Haryana
Updated: April 23, 2019, 3:29 PM IST
बीजेपी उम्मीदवार धर्मबीर सिंह से जनता क्यों मांग रही है 5 साल का हिसाब?
सांसद का विरोध करते किसान
Pardeep Sahu
Pardeep Sahu | News18 Haryana
Updated: April 23, 2019, 3:29 PM IST
भिवानी-महेंद्रगढ़ संसदीय क्षेत्र से भाजपा की सीट पर चुनाव लड़ रहे निवर्तमान सांसद धर्मबीर सिंह की इस बार कठित डगर दिखाई दे रही है, पहले अपने क्षेत्र में कार्य नहीं करवा पाने में असमर्थता जाहिर की तो बाद में सांसद का चुनाव लडऩे से मना करना धर्मबीर सिंह पर भारी पड़ता नजर आ रहा है. भिवानी, दादरी व महेंद्रगढ़ जिले के कई गांवों में विरोध का दंश झेल चुके धर्मबीर सिंह को अब किसानों का भी विरोध करने के निर्णय के साथ-साथ भीतरघातियों का मिजाज भी पासा पलट सकता है.

भिवानी-महेंद्रगढ़ संसदीय क्षेत्र पर प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा प्रत्याशियों की घोषणा करने के साथ ही चुनावी महाभारत के अधिकांश योद्धाओं की तस्वीर साफ हो गई है. किसी दल ने प्रत्याशी के क्षेत्र में रसूक को ध्यान में रखकर टिकट थमाई है तो किसी ने जातीगत समीकरणों का गणित बैठा रखकर अपनी चुनावी वैतरणी पार करने की योजना को मूर्तरूप दिया है. इस सीट पर अभी तक मुकाबला बहुकोणीय माना जा रहा है.

बीजेपी, कांग्रेस, जेजेपी, इनेलो व एलजेपी-बसपा जैसी पार्टियों के प्रत्याशी घोषित होने के बावजूद अभी तक प्रचार मैदान में सभी पार्टियों के प्रत्याशी अपनी उपस्थिती दर्ज करवा चुके हैं. कांग्रेस की श्रुति चौधरी इस बार भी अपने स्वर्गीय दादा पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के अलावा अपनी मां एंव पूर्व मंत्री किरण चौधरी द्वारा कराए गए विकास कार्यो के साथ-साथ अपने सांसद काल में करवाए गए विकास कार्यो का हवाला देकर लोगों से वोट मांग रही हैं. जबकि निवर्तमान सांसद धर्मबीर सिंह के साथ भी कुछ हलकों में पार्टी नेताओं को लेकर स्थिति ज्यादा सुखद नहीं हैं.

क्योंकि धर्मबीर सिंह को कई गांवों में विरोध भी झेल है. फिर भी चुनाव में उन्हें जहां नमो मंत्र का सबसे बड़ा सहारा है, जिसके बूते ही वे चुनाव मैदान में उतरे हैं. वहीं जजपा, एलएसपी व इनेलो के नये चेहरे मैदान में आए हैं.

भारतीय जनता पार्टी की ओर से घोषित प्रत्याशी धर्मबीर सिंह को चुनावी मैदान में इस बार कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी. भाजपा प्रत्याशी को जहां विरोधियों के साथ-साथ अपनों से भी जूझना पड़ रहा है. वहीं इनकी डगर आसान नजर नहीं आ रही. गत 28 मार्च को निर्वतमान सांसद धर्मबीर का दादरी में धरने पर बैठे किसानों ने काले झंडे दिखाते हुए रोष प्रदर्शन किया था.

राजनैतिक समीकरणों में भी शुरू से ही धर्मबीर सिंह का मुख्यमंत्री मनोहर लाल और राज्य सरकार के साथ छत्तीस का आंकड़ा रहा है. इसके बावजूद लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को प्रदेश सरकार का ही सहारा होगा. क्योंकि इनमें से कई ऐसे हैं, जिनका अपने-अपने क्षेत्रों में भारी विरोध है.

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First published: April 23, 2019, 3:20 PM IST
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