Women's Day 2020: इन महिलाओं ने कहा, हमें नहीं पता महिला दिवस क्या होता है
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Women's Day 2020: इन महिलाओं ने कहा, हमें नहीं पता महिला दिवस क्या होता है
छत्तीसगढ़ सरकार ने मनरेगा में भुगतान की नई योजना बनाई है. सांकेतिक फोटो.

मजदूर, श्रमिक (Female Labour) व ग्रामीण क्षेत्र (Rural Women) की महिलाओं को नहीं मालूम कि महिला दिवस क्या होता है. विभिन्न क्षेत्रों में मजदूरी कर अपना व परिवार का पेट पालने वाली महिलाओं से महिला दिवस के बारे में न्यूज 18 के इस संवाददाा ने पूछा तो उनका कहना था कि महिला दिवस क्या होता है भाई?

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चरखी दादरी. आज पूरा विश्व अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Womens Day)  मना रहा है. यहां तक कि सरकारी विभाग सहित अनेक संस्थाओं द्वारा महिला दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं, लेकिन आज भी मजदूर, श्रमिक (Female Labour) व ग्रामीण क्षेत्र (Rural Women) की महिलाओं को नहीं मालूम कि महिला दिवस क्या होता है. विभिन्न क्षेत्रों में मजदूरी कर अपना व परिवार का पेट पालने वाली महिलाओं से महिला दिवस के बारे में न्यूज 18 के इस संवाददाा ने पूछा तो उनका कहना था कि महिला दिवस क्या होता है भाई? हम तो दिन—रात सिर्फ दो जून की रोटी के जुगाड़ में जुटे रहते हैं.

आज जब विश्वभर में महिला-पुरुष कदम से कदम मिलाकर चलने की कोशिश में जुटे हैं. महिलाएं नौकरी के साथ-साथ घर-संसार भी संभाल रही हैं. ऐसे में कुछ संगठन शहरों में अच्छा काम करने वाली महिलाओं का सत्कार करती हैं. हालांकि मजदूरी करने वाली महिलाओं को महिला दिवस के बारे में कोई नहीं बताता. दादरी जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं सुबह ही मजदूरी के लिए निकल जाती हैं, जिन्हें मजदूरी कर 300-400 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं. इन महिलाओं को यह नहीं पता कि महिला दिवस क्या होता है.

सिर्फ कागजों में सिमटकर रह गया महिला दिवस



मजदूरी करने वाली महिलाओं की बातों से तो यही लगता है कि महिला दिवस सिर्फ कागजों में ही दबकर रह गया है. शहरी क्षेत्र की महिलाओं को महिला दिवस के बारे में जानकारी जरूर है लेकिन महिलाओंं को समाज में समानता का अधिकारी दिलाने की पैरवी कर रही हैं.
Labour
शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं मजदूरी के सिर्फ 300-400 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं. (File Photo)


'दो जून की रोटी कमाने में जुटे रहते हैं हम'

झुग्गियों में रहने वाली निर्मला, सुशीला, कमला व राजो देवी ने कहा, भाई ये महिला दिवस क्या होता है? हम मजदूरी कर 200-400 रुपये कमा लेती हैं ताकि अपने परिवार को दो जून की रोटी खिला सकें. उनका कहना कि हमें कोई व्यक्ति आकर जब कपड़े और मिठाइयां दे जाता है तो हमें लगता है कि आज हमारा त्योहार है.

'पति शराबी है और झगड़ा करता है'

महिला दिवस के बारे में पूछने पर कमलेश ने बताया कि म्हारा तो रोज महिला दिवस है. खाने के लाले पड़े हैं, रात को उनका पति शराब पीकर झगड़ा करता है. हमें ही दो टैम की रोटी का जुगाड़ करना पड़ै है. वहीं संतोष, धर्मकौर व चाय की दुकान चलाने वाली कमलेश कहती हैं कि वह दो समय की रोटी का किसी तरह जुगाड़ कर लेती हैं. महिला दिवस के बारे में उनको कोई जानकारी नहीं है. महिला दिवस कब क्या और कैसे क्या होता है नहीं जानकारी. पैसा कमाकर परिवार को पालन-पोषण कर रही हैं.

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