Lockdown: रात के अंधेरे में बॉर्डर कर रहे पार, प्रवासी मजदूर बोले- यहां मरने से अच्‍छा घर जाकर मरें
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Lockdown: रात के अंधेरे में बॉर्डर कर रहे पार, प्रवासी मजदूर बोले- यहां मरने से अच्‍छा घर जाकर मरें
निजी बस ऑपरेटर अपने स्तर ही मजूदरों की सूचियां तैयार कर रहे हैं और आरटीओे से परमिशन ले रहे हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

Lockdown 3.0: प्रवासी मजदूरों का आरोप है कि ठेकेदार (Contractor) ने उनको काम से निकाल दिया तो वे पुलिस के डर से रात के अंधेरे में अपने घर के लिए निकले हैं.

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चरखी दादरी. साहब ठेकेदार (Contractor) ने निकाल दिया और रोटी देने से मना कर दिया. ऐसे हालात में क्या करें? बाहर निकलते हैं तो पुलिस के डंडे का भय रहता है और कहीं रुकते हैं तो रोटी नहीं मिलती. ऐसे में रात के अंधेरे में कच्चे रास्तों से बार्डर पार कर घर जा रहे हैं. कोरोना का डर सता रहा है. घर में बच्चे चिंता कर रहे हैं, ऐसे में यहां मरने से अच्छा है कि घर जाकर ही मर जाएं. यह पीड़ा उन प्रवासी श्रमिकों की है, जिनको दादरी क्षेत्र के क्रशर जोन के ठेकेदारों ने निकाल दिया.

उत्तर प्रदेश के रहने वाले प्रवासी श्रमिक यहां कुछ कमाने के लिए आए थे और कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से लगे लॉकडाउन के दौरान फंस गए. लॉकडाउन का प्रथम व द्वितीय चरण तो किसी तरह काट लिया. प्रशासन के निर्देशों पर ठेकेदार द्वारा कुछ दिन तो राशन-पानी दिया गया, लेकिन अब देने से मना कर दिया. ऐसे में वे अपने घर जाने के लिए रात के अंधेरे में निकले हैं.

प्रवासी श्रमिक




ठेकेदार पर आरोप- 30 प्रवासी मजदूरों को निकाला
उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के करीब 30 प्रवासी श्रमिक बीती रात दादरी क्षेत्र से कच्चे रास्तों पर निकले. श्रमिक राजू, दीनानाथ, कमलदीप इत्यादि ने बताया कि वे दादरी में दो जून की रोटी का जुगाड़ करने आए थे. कोरोना की वजह से यहां फंस गए. ठेकेदार ने उनको निकाल दिया तो वे रात के अंधेरे में निकले हैं.

परिवार वालों की आ रही याद
श्रमिकों का कहना है कि रास्तों में पुलिस के डंडे का भय है, वहीं घर की चिंता की वजह से कच्चे रास्तों से होकर घर जा रहे हैं. इस दौरान कुछ श्रमिक रोने लगे. उनका कहना था इस मुश्किल घड़ी में हम अपने परिवार का साथ रहना चाहते है. उन्‍हें अपने परिवार वालों की चिंता सता रही है.

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