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चौटाला परिवार की कलह कथा: ये है देवीलाल की विरासत के लिए जंग की वजह!

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: November 21, 2018, 3:58 PM IST
चौटाला परिवार की कलह कथा: ये है देवीलाल की विरासत के लिए जंग की वजह!
अपने समर्थकों के बीच सांसद दुष्यंत चौटाला, जिन्हें इनेलो से सस्पेंड किया जा चुका है

चौटाला परिवार विवाद: कार्यकर्ताओं के सामने बड़ा सवाल ये है कि इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) की कमान किसके हाथ जाएगी और कौन नई पार्टी बनाएगा? सभी की नजरें आज 17 नवंबर को अजय चौटाला की ओर से जींद में बुलाई गई बैठक पर हैं.

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  • Last Updated: November 21, 2018, 3:58 PM IST
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जिस चौटाला परिवार की कभी हरियाणा की राजनीति में तूती बोलती थी वो टूट गया. पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासन के साथ ही ओम प्रकाश चौटाला के दोनों बेटों अजय सिंह चौटाला और अभय सिंह चौटाला की सियासी राहें जुदा हो गई हैं. ताऊ देवीलाल की राजनीतिक विरासत की लड़ाई सड़क पर है. आखिर इसकी वजह क्या है? राजनीतिक विश्नेषकों का कहना है कि सियासत और सत्ता में दोस्त, परिवार, रिश्तेदार...कोई किसी का सगा नहीं होता. चौटाला परिवार में भी दोनों सगे भाईयों की ये लड़ाई पार्टी पर कंट्रोल को लेकर है.

अजय सिंह चौटाला को इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के प्रधान महासचिव के पद से मुक्त करने के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी निष्कासित कर दिया गया है. अजय सिंह चौटाला के बेटों, दुष्यंत और दिग्विजय को 2 नंवबर को ही पार्टी से निकाला जा चुका है.  शनिवार 17 नवंबर को अजय चौटाला जींद में शक्ति प्रदर्शन करके नई पार्टी बनाने का एलान कर दिया है. राजनीतिक विश्लेषकों ने पहले ही इस हालात पर नई पार्टी बनने की ओर इशारा किया था.

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हरियाणा के पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला टीचर भर्ती के एक मामले में धांधली को लेकर तिहाड़ में सजा भुगत रहे हैं. अजय चौटाला इन दिनों पैरोल पर बाहर हैं. हरियाणा के वरिष्ठ पत्रकार नवीन धमीजा कहते हैं "इंडियन नेशनल लोकदल के ज्यादातर अहम फैसले ओम प्रकाश चौटाला जेल से ही लेते हैं. पार्टी में दूसरा बड़ा पावर सेंटर अभय चौटाला हैं.”

इसे भी पढ़ें: क्षेत्रीय पार्टियां तय करेंगी 2019 के लोकसभा चुनाव की दिशा!

धमीजा के मुताबिक “अजय चौटाला ने इनेलो का प्रधान महासचिव होने की हैसियत से 17 नवंबर को जींद में कार्यकारिणी की बैठ‍क बुलाई थी. इससे पहले ही अभय गुट ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. जाहिर है कि इनेलो दो फाड़ होने के बाद टूट की कगार पर है. इसके बाद साफ दिख रहा था कि अजय चौटाला और उनके बेटे अपनी नई पार्टी बनाएंगे."

निष्कासन पर घमासान, सुलह की भी कोशिशें!अजय चौटाला के निष्कासन के बाद से पार्टी में घमासान मचा हुआ है. अजय और अभय चौटाला के समर्थक आमने-सामने हैं. लगभग सभी जिलों में कुछ कार्यकर्ता पार्टी छोड़ गए हैं और कुछ 'वेट एंड वॉच' की मुद्रा में हैं. सबके सामने एक सवाल है कि इंडियन नेशनल लोकदल की कमान किसके हाथ जाएगी और कौन नई पार्टी बनाएगा? हालांकि सुलह की भी कोशिशें चल रही हैं. इस पारिवारिक लड़ाई में सुलह कराने के लिए अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल प्रयास कर रहे हैं. वो इस परिवार के पुराने साथी हैं.

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ओम प्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला की विधायक पत्नी नैना चौटाला ने आरोप लगाया है कि 15-20 लोग पार्टी को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं. इससे लग रहा है कि कुछ लोग सीनियर चौटाला और अभय चौटाला को भड़का रहे हैं, लेकिन वो लोग कौन हैं इसका खुलासा नहीं ह़ो पाया है.

बड़े नेताओं को जोड़ने की कोशिश!

अभी पार्टी का एलान हुआ है, लेकिन गठन नहीं. सूत्रों का कहना है कि अजय चौटाला और उनके बेटे चाहते हैं कि जब नई पार्टी बने तो उसमें कुछ बड़े नाम शामिल हों. इसके लिए वो दक्षिण हरियाणा के एक बड़े राजनीतिक घराने के संपर्क में हैं. साथ ही एक बड़े कांग्रेसी ब्राह्मण नेता से भी संपर्क किया गया है. इसी बीच बीजेपी किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष बलदेव अलावलपुर बीजेपी छोड़कर अपने समर्थकों समेत अजय चौटाला के साथ जुड़ गए हैं. अपने निष्कासन के बाद से दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला पूरे हरियाणा में घूमकर बैठकें कर रहे हैं. कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोल रहे हैं. उन पुराने कार्यकर्ताओं से बात कर रहे हैं जो इनेलो छोड़कर किसी वजह से दूसरी पार्टी में चले गए थे.

इनेलो और बीएसपी की ताकत

इनेलो के पास इस समय 18 विधायक, दो सांसद हैं. इनेलो ने अगले चुनावों के लिए बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) से समझौता किया है. अभय चौटाला ने एक प्रेस कांफ्रेंस में दावा किया था कि 'राज्‍य की 90 में से 40 सीटों पर बसपा को 7-8 प्रतिशत वोट मिलते हैं. और 60 सीटें ऐसी हैं जहां इनेलो को 30 फीसदी वोट मिलते हैं. ऐसे में बसपा और इनेलो 39 से 40 प्रतिशत वोट हासिल कर सकते हैं और जिससे विधानसभा में आसानी से बहुमत मिल जाएगा.'

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90 सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा के चुनाव 2014 में हुए थे. इसमें आईएनएलडी ने 24.11% वोट लेकर 19 सीटें हासिल की थीं, जबकि बीएसपी को 4.37% वोट के साथ केवल 1 सीट मिली थी. अगस्‍त में जींद के विधायक हरिचंद के निधन के बाद यह आंकड़ा 18 रह गया. उनके बेटे कृष्‍णा मिढ़ा ने बीजेपी की सदस्‍यता ले ली है.

विवाद के बीच मायावती से मुलाकात

बसपा नेताओं को उम्मीद है कि इस गठबंधन से पार्टी को हरियाणा के साथ-साथ पश्चिमी यूपी में फायदा मिल सकता है. वहां के जाटों में इसका अच्छा संदेश जाएगा. लेकिन अब इनेलो में मचे घमासान के बाद क्या ये गठबंधन आगे बढ़ेगा? हालांकि अपने भतीजों को निष्कासित करने के बाद शुरू हुए विवाद के बीच अभय चौटाला ने दिल्ली में बसपा प्रमुख मायावती से मुलाकात कर कार्यकर्ताओं को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि गठबंधन पर कोई आंच नहीं आने वाली है.

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किसे मिलेगा 'फूट' का फायदा

आईएनएलडी में किसी भी फूट से बीजेपी को सीधे राजनीतिक फायदा हो सकता है. कुछ फायदा कांग्रेस को भी मिल सकता है. दरअसल हरियाणा के जाट वोट बैंक का अभी भी ज्यादा हिस्सा ओम प्रकाश चौटाला की पार्टी को ही मिलता है. बचा हुआ वोट कांग्रेस और बीजेपी में बंट जाता है. इसलिए बीजेपी और कांग्रेस चौटाला के परिवार में झगड़े का राजनीतिक लाभ उठाने की फिराक में हैं. अब दोनों दलों को इस झगड़े के परिणाम का इंतजार है.

देवीलाल ने की थी इनेलो की स्थापना

इंडियन नेशनल लोकदल की स्थापना 1987 में ओपी चौटाला के पिता देवीलाल ने की थी. इनेलो इस वक्त हरियाणा विधानसभा में मुख्य़ विपक्षी पार्टी है. देवीलाल 1971 तक कांग्रेस में रहे थे. दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे. 1977 में वो जनता पार्टी में आ गए. 1989 में देवीलाल देश के उप प्रधानमंत्री बने. देवीलाल के बाद उनके बड़े बेटे ओम प्रकाश चौटाला भी चार बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. इस विरासत को हथियाने की लड़ाई अब सड़क पर आ गई है. देखना ये है कि इस पार्टी की कमान किसके पास रहती है?

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इस बारे में पार्टी के पदाधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं. हमने जब पार्टी के उपाध्यक्ष अनंतराम तंवर से बातचीत की तो उन्होंने कोई टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया. अभय चौटाला ने कहा है कि “मैंने कभी यह बात नहीं कही कि सीएम मैं बनूंगा या दुष्यंत बनेगा. मैंने हमेशा यही कहा कि नारे ऐसे मत लगाओ जिससे गलतफहमी पैदा हो जाए.”

क्या ये है टकराव की असली वजह?  

इंडियन नेशनल लोकदल ने 2019 में होने वाले हरियाणा विधानसभा चुनावों देखते हुए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से गठबंधन किया है. इनेलो करीब डेढ़ दशक से सत्ता से बाहर है. उसे लगता है कि इस बार उनकी वापसी हो सकती है. अभय चौटाला इस वक्त अपने भाई अजय चौटाला और पिता ओम प्रकाश चौटाला के जेल में होने की वजह से राज्य में बतौर प्रधान सचिव पार्टी का पूरा कार्यभार संभाले हुए हैं और खुद को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर भी प्रोजेक्ट करने में लगे हैं. बताया जाता है कि दुष्यंत और दिग्विजय को यही दिक्कत है.

दूसरी ओर जिस तरह से अखिलेश यादव यूपी में खुद को नई पीढ़ी के नेता के तौर पर प्रोजेक्ट कर रहे हैं. उसी रास्ते पर हरियाणा में दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला भी हैं. इससे पार्टी के एक धड़ा असहज है.

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ऐसा क्यों होता है?

दिल्ली यूनिवर्सिटी के पॉलिटिकल साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर सुबोध कुमार कहते हैं “खानदानी टाइप की पार्टियों में बिखराव कोई चौंकाने वाली बात नहीं है. पार्टियां और उनमें काम करने वाले लोग प्रजातंत्र का प्रोडक्ट हैं और प्रजातंत्र हमेशा उस स्ट्रक्चर की खोज में रहता है जिसमें आजादी, समानता और भाईचारा हो. इन तीनों का अभाव पार्टियों को तोड़ देता है. जब किसी पार्टी में किसी एक को जरूरत से ज्यादा तवज्जो मिलती है तो दूसरा व्यक्ति आजादी और समानता खोजता है, जिससे झगड़ा होता है और पार्टी बिखर जाती है. हमारे यहां जो खानदानी पार्टियां हैं उनमें लोकतंत्र नहीं है इसलिए उनमें बहुत झगड़ा है.”

कुमार आगे कहते हैं “पार्टियों का टूटना, उनका बिखराव प्रजातंत्र के लिए बहुत अच्छा है. क्योंकि इससे नए लोगों को सत्ता में आने का मौका मिलता है. उन लोगों की भी शासन, सत्ता में भागीदारी तय होती है जो वर्षों से हाशिए पर रहते हैं. क्योंकि जब भी पुरानी से टूटकर नई पार्टी बनती है, उसके स्ट्रक्चर के लिए नए लोग चाहिए होते हैं.”

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‘24 अकबर रोड’ के लेखक रशीद किदवई कहते हैं “जिन नेताओं ने अपने परिवार के एक-दो से अधिक लोगों को पार्टी में जगह दी, उनमें कई पावर सेंटर बन गए. सबकी महत्वाकांक्षा बढ़ने लगती है औ एक रेस घर के अंदर ही होनी शुरू हो जाती है, जिसकी वजह से ऐसे झगड़े सामने आते हैं और पार्टियां बिखराव की ओर जाती हैं.”

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अजय चौटाला की बैठक पर सवाल उठा रहे लोगों का 17 नवंबर को किया जाएगा इलाज : दिग्विजय

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First published: November 17, 2018, 4:16 AM IST
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