हरियाणा: कांग्रेस में हार के बाद बढ़ी रार, आमने-सामने भूपेंद्र हुड्डा-अशोक तंवर!
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हरियाणा: कांग्रेस में हार के बाद बढ़ी रार, आमने-सामने भूपेंद्र हुड्डा-अशोक तंवर!
हरियाणा में सिर पर चुनाव फिर भी आपस में लड़ रहे कांग्रेसी!

पांच साल से हरियाणा में न तो कोई कांग्रेस का जिलाध्यक्ष है और न ब्लॉक अध्यक्ष, आखिर विधानसभा चुनाव में बीजेपी से कैसे पार पाएगी कांग्रेस? जबकि यहां की 90 विधानसभा सीटों में 79 में बीजेपी कांग्रेस से आगे है!

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  • Last Updated: June 12, 2019, 10:22 AM IST
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लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद हरियाणा कांग्रेस में सिर फुटव्वल और बढ़ गई है. पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर आमने-सामने आ गए हैं.  हुड्डा ने तंवर पर तंज कसते हुए कहा है कि हरियाणा में कांग्रेस का कोई संगठन नहीं है. फिर भी कार्यकर्ता बहुत मजबूत हैं. आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार बनाएगी. दरअसल, इस प्रदेश में पिछले पांच साल से न तो कांग्रेस के जिलाध्यक्ष हैं और न ब्लाक अध्यक्ष.  चुनाव में इतनी बुरी हार की यह बड़ी वजह मानी जा रही है.  इसी बात को आधार बनाकर हुड्डा के समर्थक विधायक मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर को हटाने के लिए हाईकमान पर दबाव बढ़ा रहे हैं.

संगठन न होने की वजह से कांग्रेस की इतनी बुरी हार हुई है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके पुत्र दीपेंद्र सिंह हुड्डा भी अपनी सीट नहीं बचा सके.  रोहतक जैसा कांग्रेस का गढ़ उसके हाथ से चला गया. प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर सिरसा से हार गए.  विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से समीक्षा की जाए तो यहां की 90 सीटों में से 79 पर बीजेपी आगे रही है. ऐसे में कांग्रेस की दशा समझ सकते हैं. इसके बावजूद कांग्रेस नेता एक मंच पर आने की बजाय, एक दूसरे को निपटाने में जुटे हुए हैं. दूसरी ओर बीजेपी नेता विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं. सीएम मनोहरलाल खट्टर सभी जिलों में रोड शो कर रहे हैं.

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जिला कमेटियां हैं 2014 से भंग



विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक कांग्रेस कार्यकर्ता प्रेस कांफ्रेंस करके अपने वरिष्ठ नेताओं से अपील कर रहे हैं कि वो गुटबाजी खत्म करके तैयारियों में जुटे. फरीदाबाद के कार्यकर्ताओं ने पिछले दिनों ऐसा ही संदेश दिया था.  हरियाणा के वरिष्ठ पत्रकार नवीन धमीजा का कहना है कि अगर कांग्रेस 79 सीटों पर बीजेपी से पीछे आई है तो उसकी वजह पार्टी में गुटबाजी और जमीन पर संगठन की गैर मौजूदगी है. 2014 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद से ही पार्टी बिखरी हुई है. सभी जिला और ब्लॉक कमेटियां भंग हैं. जिसकी वजह से किसी भी जिले में न पार्टी की मासिक बैठक हो रही है न तो सामूहिक रूप से सरकार के खिलाफ कोई धरना-प्रदर्शन हो पा रहा.

इन नेताओं के बने हुए हैं गुट

धमीजा कहते हैं कि कांग्रेस कम से कम पांच गुटों में बंटी हुई है. भूपेंद्र सिंह हुड्डा,  प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर,  पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला और भजनलाल के पुत्र कुलदीप बिश्नोई के समर्थकों के गुट बने हुए हैं. जिसमें से हुड्डा और तंवर गुट तो लंबे समय से प्रदेश में एक दूसरे के खिलाफ ही शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं. कांग्रेस की रैलियों में भी दोनों गुटों के कार्यकर्ता अलग-अलग रंग की पगड़ी पहनकर शक्ति प्रदर्शन करते हैं. विधानसभा चुनाव में पार्टी को इसका बड़ा नुकसान हो सकता है.

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कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरना आसान नहीं!

कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी ने कई प्रदेशों में कांग्रेस को चुस्त-दुरुस्त करने का काम किया. फ्रंटल संगठनों में भी फेरबदल किया. लेकिन हरियाणा में कोई बदलाव नहीं किया.  स्थानीय निकाय और लाेकसभा चुनाव बिना संगठन के हुए और परिणाम ये है कि बीजेपी इतनी बड़ी हो गई है कि अब कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरना पहले जैसा आसान नहीं होगा. सूत्रों का कहना है कि एक-दो बार जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर कवायद शुरू हुई लेकिन वह पूरी नहीं हुई.

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