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चंडीगढ़ PGI ने रचा इतिहास: 15 माह की बच्ची का ब्रेन ट्यूमर नाक के रास्ते निकाला

चंडीगढ़ पीजीआई. (file photo)
चंडीगढ़ पीजीआई. (file photo)

15 Year old Tumor Operation in PGI Chandigarh: 6 घंटे की लंबी सर्जरी के बाद बच्चे को आईसीयू में रखा गया था. सर्जरी के 10 दिनों के बाद बच्ची का विजन बेहतर हो गया है. पूरा ट्यूमर रिमूव हो गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 23, 2021, 11:56 AM IST
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चंडीगढ़. देश के जाने माने अस्पताल और मेडिकल क़ॉलेज चंडीगढ़ पीजीआई (Chandigarh PGI) ने इतिहास रचा है. यहां पर एक 15 महीने की बच्ची के ब्रेन ट्यूमर का सफल ऑपरेशन किया गया है. अहम बात यह है कि बच्ची का ब्रैन ट्यूमर (Brain Tumor) नाक के रास्ते निकाला गया था. अब बच्ची की हालत ठीक है.

क्या बोले डॉक्टर

डॉक्टर धांडापानी ने बताया कि बच्ची का ऑपरेशन करने से पहले हमने सोचा था कि अगर नाक के रास्ते हम ट्यूमर तक पहुंच गए और इसको निकालने में सफल हो गए, तो ठीक है. अगर बीच में कोई रुकावट आई हम ब्रेन को खोलकर ट्यूमर को निकालेंगे. लेकिन हमारी टीम इस मकसद में कामयाब रही. हमने 3 सेंटीमीटर के ट्यूमर को टुकड़ो में तोड़ कर बाहर निकाल दिया. हमार मकसद कोई रिकॉर्ड बनाना या मीडिया में आना नही था. हम सिर्फ अपने मरीज और उसकी बीमारी को देख रहे थे.



क्या है मामला
बच्ची के MRI में स्कल के बेस पर 3 सेमी कैल्सीफाइड ब्रेन ट्यूमर (क्रानियोफेरीन्जियोमा) का पता चला था. एक साल के बच्चे के लिए यह बहुत बड़ा था. इस ट्यूमर को आमतौर पर ओपन सर्जरी से ऑपरेट किया जाता है और शेष भाग का उपचार रेडिएशन थैरेपी से होता है. पिछले कुछ सालों में 6 साल से अधिक उम्र के पेशेंट्स से ऐसे ट्यूमर्स को ENT सर्जनों के साथ मिलकर न्यूरोसर्जनों द्वारा नाक से एंडोस्कोपिक के माध्यम से हटाया जाते रहे हैं. लेकिन इस बार अलग प्रक्रिया अपनाई गई.

क्या रहती है चुनौती

छोटे नॉस्ट्रिल्स, स्कल बेस पर इमेच्योर बोंस और महत्वपूर्ण ब्लड वेसल्स से निकटता के कारण छोटे बच्चों में नाक से एंडोस्कोपिक रिमूवल बेहद चुनौतीपूर्ण रहता है. इससे खतरा रहता है. साल 2019 में अमेरिका के स्टैनफोर्ड में दो साल के सबसे छोटे बच्चे में इस तरह के ट्यूमर के लिए नाक के माध्यम से निकाला गया था और फिर एंडोस्कोपिक की गई थी. बेहद चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद डॉ. धांडापानी ने एंडोनासल कॉरिडोर को चुना, क्योंकि नाक के माध्यम से ऑपरेट करने लिए स्कल को खोलने और ब्रेन रिट्रैक्शन को एवॉयड किया जाता है.

छह घंटे की सर्जरी

6 घंटे की लंबी सर्जरी के बाद बच्चे को आईसीयू में रखा गया था. सर्जरी के 10 दिनों के बाद बच्ची का विजन बेहतर हो गया है. पूरा ट्यूमर रिमूव हो गया है. डॉ. एस.एस. धांडापानी की टीम ने पहले भी नाक के माध्यम से बड़े ट्यूमर निकाले हैं लेकिन एंडोस्कोपिक सर्जरी से गुजरने वाला यह दुनिया का सबसे छोटा बच्चा है.
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