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देश के सबसे पिछड़े जिले के कई स्कूलों में नहीं हैं टीचर, परीक्षा में क्या लिखेंगे बच्चे?
Chandigarh-City News in Hindi

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: February 25, 2020, 3:51 PM IST
देश के सबसे पिछड़े जिले के कई स्कूलों में नहीं हैं टीचर, परीक्षा में क्या लिखेंगे बच्चे?
मेवात का मांडीखेड़ा स्कूल: 701 बच्चों पर 2 अध्यापक

मेवात के विधायक ने खट्टर सरकार पर उठाए सवाल, कहा स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं तो कैसे होगी पढ़ाई, देश के सबसे पिछड़े जिले में शिक्षा का बुरा हाल

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  • Last Updated: February 25, 2020, 3:51 PM IST
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चंडीगढ़. हरियाणा में स्कूलों की क्या स्थिति है इसे एक विधायक ने सोमवार को विधानसभा में उठाया. देश के सबसे पिछड़े जिले मेवात के फिरोजपुर झिरका से कांग्रेस विधायक मामन खान ने खट्टर सरकार के दावों पर पानी फेर दिया. कहा कि ‘हमारे बच्चे तो मेज-कुर्सी को ही मास्टर समझ कर नमस्ते कर आते हैं.’ जेबीटी से लेकर पीजीटी शिक्षकों के 1355 पद स्कूलों में खाली पड़े हैं.  उनके क्षेत्र के 313 स्कूलों में 2875 स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ 1520 टीचर ही कार्यरत हैं.

खान ने बताया कि उनके यहां जेबीटी के 608, टीजीटी, सीएंडवी के 552, पीजीटी के 142, मिडिल हेड के 24, मुख्य शिक्षक के 16, मुख्य अध्यापक के 9 एवं  प्रिंसिपल के 4 पद खाली हैं.  इसकी वजह से विद्यार्थियों का सेलेबस पूरा नहीं हो पाता. खान ने सरकार से पूछा कि क्या बच्चों को परीक्षा में यह लिखने की छूट मिलेगी कि तीन महीने से स्कूल में टीचर नहीं हैं, इसलिए सवालों के जवाब नहीं दे पा रहे.

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हरियाणा के स्कूलों में शिक्षकों का टोटा, कैसे पढ़ेंगे बच्चे


क्या इसलिए होता है भेदभाव? 



मेवात हरियाणा का एकमात्र मुस्लिम बहुल क्षेत्र है. यह दिल्ली से महज सौ किलोमीटर की दूरी पर है लेकिन विकास से कोसों दूर है. महिला शिक्षा की स्थिति इतनी खराब है कि जब सरकार ने पंच-सरपंचों के लिए शैक्षिणिक योग्यता तय की तो यहां पर कई पंचायतों में पढ़ी-लिखी लड़कियां मिलींं ही नहीं. इसलिए जिन्हें अपने घर में पंच-सरपंच चाहिए था उन्होंने अपने बेटों की शादी दूसरे जिलों की पढ़ी-लिखी लड़कियों से कराई. मेवात के वरिष्ठ पत्रकार राजुद्दीन जंग कहते हैं कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने की वजह से इससे हर सरकार भेदभाव करती रही है. यहां के पिछड़ेपन की यही वजह है.

सिर्फ 37 फीसदी है महिला साक्षरता दर

विधानसभा में शिक्षामंत्री कंवरपाल ने स्वीकार किया कि शिक्षकों की कमी मेवात सिहत पूरे प्रदेश में है. आपको बता दें कि मेवात में साक्षरता दर राष्ट्रीय राष्ट्रीय औसत (74.04 फीसदी) से 20 फीसदी कम 54.08 फीसदी ही है. महिलाओं की साक्षरता दर सिर्फ 36.60 फीसदी है.

 

देश के पहले शिक्षा मंत्री के क्षेत्र का हाल

राजुद्दीन जंग कहते हैं कि देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद गुड़गांव से सांसद रह चुके हैं. यह जिला गुड़गांव संसदीय क्षेत्र में आता है, लेकिन आज यहां शिक्षा की हालत बद से बदतर हो गई है. जंग कहते हैं कि 2017 में नीति आयोग ने मेवात को देश का सबसे पिछड़ा जिला घोषित किया था उसके बाद भी आज तक सरकार यहां के विकास को लेकर संजीदा नहीं हुई.

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सीएम मनोहर लाल खट्टर के राज में स्कूलों का हाल (फाइल फोटो)


स्कूलों में टीचर ही नहीं हैं ता फिर यहां के बच्चे कैसे पढ़ेंगे. यहां अध्यापकों की नियुक्ति और स्कूलों को अपग्रेड करने को लेकर कई बाद लोगों ने आवाज उठाई है लेकिन अब तक सरकार ने कुछ नहीं किया. हर सरकार ने यहां के लोगों को ठगने का काम किया.

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First published: February 25, 2020, 2:41 PM IST
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