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यहां के अस्‍पतालों में छुट्टी के दिन राम भरोसे होती है मरीजों की जिंदगियां

यहां के अस्‍पतालों में छुट्टी के दिन राम भरोसे होती है मरीजों की जिंदगियां

बल्लभगढ़ के सरकारी अस्पतालों का बेहद बुरा हाल है। भले ही प्रदेश सरकार अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं देने का कितना ही दावा क्यों न करे, लेकिन अस्पताल की दुर्दशा देखकर सारे दावे खोखले से नजर आते हैं। अस्पतालों में न तो डॉक्टर हैं और न ही मरीजों के लिए दवाइयां।

बल्लभगढ़ के सरकारी अस्पतालों का बेहद बुरा हाल है। भले ही प्रदेश सरकार अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं देने का कितना ही दावा क्यों न करे, लेकिन अस्पताल की दुर्दशा देखकर सारे दावे खोखले से नजर आते हैं। अस्पतालों में न तो डॉक्टर हैं और न ही मरीजों के लिए दवाइयां।

बल्लभगढ़ के सरकारी अस्पतालों का बेहद बुरा हाल है। भले ही प्रदेश सरकार अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं देने का कितना ही दावा क्यों न करे, लेकिन अस्पताल की दुर्दशा देखकर सारे दावे खोखले से नजर आते हैं। अस्पतालों में न तो डॉक्टर हैं और न ही मरीजों के लिए दवाइयां।

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    बल्लभगढ़ के सरकारी अस्पतालों का बेहद बुरा हाल है। भले ही प्रदेश सरकार अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं देने का कितना ही दावा क्यों न करे, लेकिन अस्पताल की दुर्दशा देखकर सारे दावे खोखले से नजर आते हैं। अस्पतालों में न तो डॉक्टर हैं और न ही मरीजों के लिए दवाइयां।
    बल्लभगढ़ के तिगांव और सेक्टर-3 के अस्पतालों का ईटीवी/न्‍यूज18 संवाददाता ने सोमवार को जायजा लिया।

    तिगांव का प्राथमिक चिकित्सा केंद्र: सुबह 9:45 बजे अस्पताल में कोई भी डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ नहीं पहुंचे थे। मुख्य चिकित्सक के कमरे पर भी ताला लगा था। इतना ही नहीं मरीजों को मुफ्त दी जाने वाली दवाई का स्टोर भी बंद था। जब पता किया तो बताया कि शहीदी दिवस की छुट्टी के चलते सारा स्टॉफ छुटटी पर है और मरीजों की जांच मंगलवार को की जाएगी।

    मालूम हो कि किसी भी सरकारी या निजी स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र में 24 घंटे और सप्‍ताह के सभी सात दिन डॉक्‍टर की सुविधा रखना अनिवार्य है। यह बात सभी अस्‍पतालों के नोटिस बोर्ड पर अंकित है।

    बल्लभगढ़ के सेक्टर-3 का आरसीएच अस्पताल: यहां गंदगी के ढेर लगे मिले। सभी डॉक्टरों के कमरे में ताला लगा हुआ था। फर्श गंदे दिखे और महिलाओं के लिए लगाए जाने वाले बिस्तर फटे, बदहाल और गंदे दिखे। महिला वार्ड की एक रसोई में पानी भरा था। इसी रसोई में प्रजनित महिलाओं के लिए रसोई का सामान रखने की सुविधा है। जबकि यहां भरे पानी में शौच और गंदगी फैली दिखी। यहां के स्टाफ और स्वीपर से पूछने पर पता चला कि यह शौच नहीं तेजाब है। जबकि सामने दिख रहा यह नजारा कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहा है।

    यहीं खड़े अस्पताल के कर्मचारी आने वाले मरीजों को छुटटी की दुहाई देकर कल आने की बात करते दिखे। अगर इन्हीं कर्मचारियों की मानी जाए तो एक डॉक्टर की छुटटी के दिन भी एमरजेंसी के लिए ड्यूटी होती है। आखिरकार यह कौन सुनिश्चित करे कि वह एमरजेंसी कौन सी होगी जब यहां कोई डॉक्टर तैनात होगा।

    हमारी टीम ने पूरे अस्पताल को छान मारा, लेकिन कहीं भी कोई डॉक्टर नहीं मिला। यहां खड़े अस्पताल के एक कर्मचारी ने डॉक्टर को फोन करके अस्पताल में बुलवाया तो महिला डॉक्टर ने इस कर्मचारी को यह कह दिया कि मीडिया वालों को यह बता दो कि आज छुटटी है और मैं ड्यूटी पर हूं।

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