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कॉटन मिल मालिकों की हड़ताल से कपास के किसानों की हालत खराब

कॉटन मिल मालिकों की हड़ताल से कपास के किसानों की हालत खराब

प्रदेश में कॉटन व जिनर की सभी 144 मिल्स 24 अक्टूबर से हड़ताल पर हैं.. ये मील मालिक अनाज मंडी से कपास- नरमा की खरीद नहीं कर रहे है. इसके चलते प्रदेश सरकार को टैक्स की चपत तो लग ही रही है साथ में कपास-नरमा न बिक पाने के कारण किसानों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ये मिल्स मालिक दूसरे राज्य में माल भेजने पर 2 प्रतिशत सी फार्म पर इनपुट एडजेस्टमैंट(रिफंड) न मिलने से सरकार से नाराज हैं.

प्रदेश में कॉटन व जिनर की सभी 144 मिल्स 24 अक्टूबर से हड़ताल पर हैं.. ये मील मालिक अनाज मंडी से कपास- नरमा की खरीद नहीं कर रहे है. इसके चलते प्रदेश सरकार को टैक्स की चपत तो लग ही रही है साथ में कपास-नरमा न बिक पाने के कारण किसानों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ये मिल्स मालिक दूसरे राज्य में माल भेजने पर 2 प्रतिशत सी फार्म पर इनपुट एडजेस्टमैंट(रिफंड) न मिलने से सरकार से नाराज हैं.

प्रदेश में कॉटन व जिनर की सभी 144 मिल्स 24 अक्टूबर से हड़ताल पर हैं.. ये मील मालिक अनाज मंडी से कपास- नरमा की खरीद नहीं कर रहे है. इसके चलते प्रदेश सरकार को टैक्स की चपत तो लग ही रही है साथ में कपास-नरमा न बिक पाने के कारण किसानों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ये मिल्स मालिक दूसरे राज्य में माल भेजने पर 2 प्रतिशत सी फार्म पर इनपुट एडजेस्टमैंट(रिफंड) न मिलने से सरकार से नाराज हैं.

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    प्रदेश में कॉटन व जिनर की सभी 144 मिल्स 24 अक्टूबर से हड़ताल पर हैं.. ये मील मालिक अनाज मंडी से कपास- नरमा की खरीद नहीं कर रहे है. इसके चलते प्रदेश सरकार को टैक्स की चपत तो लग ही रही है साथ में कपास-नरमा न बिक पाने के कारण किसानों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ये मिल्स मालिक दूसरे राज्य में माल भेजने पर 2 प्रतिशत सी फार्म पर इनपुट एडजेस्टमैंट(रिफंड) न मिलने से सरकार से नाराज हैं.

    दूसरी ओर कपास किसानों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से उनका नरमा-कपास मंडी में पड़ा है लेकिन बोली न होने के कारण ना तो उनकी पैदावार बिक रही है और न ही उन्हें अगली फसल बिजाई के लिए पैसे मिल रहे हैं.

    किसानों का कहना है कि एक सप्ताह से वे कपास-नरमा की रखवाली के लिए अनाज मंडी में ही सोने को मजबूर हैं. इसके साथ ही किसानों को कपास न बिक पाने के कारण गेंहू व सरसों के बीज लेने व खेत तैयार करने के पैसों को लेकर चिंता सताने लगी है.

    वहीं व्यापारी अपनी मजबूरी बता रहे है. व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग दास गर्ग का कहना है कि सरकार को कुछ गलत अधिकारी गुमराह कर रहे हैं जिसके चलते सरकार व्यापार विरोधी निर्णय ले रही है. उन्होंने कहा कि सरकार ने सात सिंतबर को अधिसूचना जारी करके व्यापारियों व उद्योगपतियों को दूसरे राज्य में माल बेचने पर वैट का 2 प्रतिशत इनपुट एडजेस्टमैंट देने से मना कर दिया है. इससे प्रदेश का व्यापार तबाह हो जायेगा.

    पिछले आठ दिनों से प्रदेश का किसान लगातार पंजाब की मंडियों में कपास बेच रहा है इससे व्यापारियों के साथ-साथ सरकार को भी काफी नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार के इस निर्णय के खिलाफ हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल ने 4 नवंबर को हिसार में प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाई है-इसमें आगे के संघर्ष का निर्णय लिया जायेगा.

    Tags: फरीदाबाद, हरियाणा

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