Home /News /haryana /

घटती जा रही है सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या

घटती जा रही है सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या

सरकार द्वारा मुफ्त शिक्षा और खाने कि सुविधा देने के बावजूद सरकारी प्रथामिक पाठशालाओं में छात्रों कि संख्या लगातार घटती जा रही हैं और अभिभावक अपने बच्चों का नाम सरकारी स्कूल से कटा प्राइवेट स्कूलों में लिखा रहे हैं। ये हम नही बल्कि डिस्ट्रिक इंफोर्मेशन आॅफ स्कूल एजुकेशन कि वार्षिक रिपोर्ट में सामने आया हैं। रेवाडी में किस कदर सरकारी स्कूलों से अभिभावकों का मोह भंग हुआ हैं उसका नजारा आप रेवाड़ी के घुडकावास और मुंढलिया गांव के एक स्कूल में देख सकते हैं जहां केवल 9 बच्चे हैं और दुसरे स्कूल में मुंढलिया और डाबडी दोनों गांवों के केवल 27 बच्चे पढ़ते हैं। इन दोनों स्कूलों में एक-एक अध्यापक की ही ड्युटी लगाई गई है। शिक्षकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में सभी सुविधा है लेकिन अभिभावकों कि सोच है कि प्राइवेट स्कूलों में बच्चों का एडमिशन कराना है। वहीं गांव के सरपंच का कहना है कि प्राइवेट स्कूल ज्यादा खुल गए हैं और अभिभावक प्राइवेट स्कूलों मे अपने बच्चों का एडमिशन कराना चाहाते हैं।

सरकार द्वारा मुफ्त शिक्षा और खाने कि सुविधा देने के बावजूद सरकारी प्रथामिक पाठशालाओं में छात्रों कि संख्या लगातार घटती जा रही हैं और अभिभावक अपने बच्चों का नाम सरकारी स्कूल से कटा प्राइवेट स्कूलों में लिखा रहे हैं। ये हम नही बल्कि डिस्ट्रिक इंफोर्मेशन आॅफ स्कूल एजुकेशन कि वार्षिक रिपोर्ट में सामने आया हैं। रेवाडी में किस कदर सरकारी स्कूलों से अभिभावकों का मोह भंग हुआ हैं उसका नजारा आप रेवाड़ी के घुडकावास और मुंढलिया गांव के एक स्कूल में देख सकते हैं जहां केवल 9 बच्चे हैं और दुसरे स्कूल में मुंढलिया और डाबडी दोनों गांवों के केवल 27 बच्चे पढ़ते हैं। इन दोनों स्कूलों में एक-एक अध्यापक की ही ड्युटी लगाई गई है। शिक्षकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में सभी सुविधा है लेकिन अभिभावकों कि सोच है कि प्राइवेट स्कूलों में बच्चों का एडमिशन कराना है। वहीं गांव के सरपंच का कहना है कि प्राइवेट स्कूल ज्यादा खुल गए हैं और अभिभावक प्राइवेट स्कूलों मे अपने बच्चों का एडमिशन कराना चाहाते हैं।

सरकार द्वारा मुफ्त शिक्षा और खाने कि सुविधा देने के बावजूद सरकारी प्रथामिक पाठशालाओं में छात्रों कि संख्या लगातार घटती जा रही हैं और अभिभावक अपने बच्चों का नाम सरकारी स्कूल से कटा प्राइवेट स्कूलों में लिखा रहे हैं। ये हम नही बल्कि डिस्ट्रिक इंफोर्मेशन आॅफ स्कूल एजुकेशन कि वार्षिक रिपोर्ट में सामने आया हैं। रेवाडी में किस कदर सरकारी स्कूलों से अभिभावकों का मोह भंग हुआ हैं उसका नजारा आप रेवाड़ी के घुडकावास और मुंढलिया गांव के एक स्कूल में देख सकते हैं जहां केवल 9 बच्चे हैं और दुसरे स्कूल में मुंढलिया और डाबडी दोनों गांवों के केवल 27 बच्चे पढ़ते हैं। इन दोनों स्कूलों में एक-एक अध्यापक की ही ड्युटी लगाई गई है। शिक्षकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में सभी सुविधा है लेकिन अभिभावकों कि सोच है कि प्राइवेट स्कूलों में बच्चों का एडमिशन कराना है। वहीं गांव के सरपंच का कहना है कि प्राइवेट स्कूल ज्यादा खुल गए हैं और अभिभावक प्राइवेट स्कूलों मे अपने बच्चों का एडमिशन कराना चाहाते हैं।

अधिक पढ़ें ...
सरकार द्वारा मुफ्त शिक्षा और खाने कि सुविधा देने के बावजूद सरकारी प्रथामिक पाठशालाओं में छात्रों कि संख्या लगातार घटती जा रही हैं और अभिभावक अपने बच्चों का नाम सरकारी स्कूल से कटा प्राइवेट स्कूलों में लिखा रहे हैं। ये हम नही बल्कि डिस्ट्रिक इंफोर्मेशन आॅफ स्कूल एजुकेशन कि वार्षिक रिपोर्ट में सामने आया हैं। रेवाडी में किस कदर सरकारी स्कूलों से अभिभावकों का मोह भंग हुआ हैं उसका नजारा आप रेवाड़ी के घुडकावास और मुंढलिया गांव के एक स्कूल में देख सकते हैं जहां केवल 9 बच्चे हैं और दुसरे स्कूल में मुंढलिया और डाबडी दोनों गांवों के केवल 27 बच्चे पढ़ते हैं। इन दोनों स्कूलों में एक-एक अध्यापक की ही ड्युटी लगाई गई है। शिक्षकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में सभी सुविधा है लेकिन अभिभावकों कि सोच है कि प्राइवेट स्कूलों में बच्चों का एडमिशन कराना है। वहीं गांव के सरपंच का कहना है कि प्राइवेट स्कूल ज्यादा खुल गए हैं और अभिभावक प्राइवेट स्कूलों मे अपने बच्चों का एडमिशन कराना चाहाते हैं।
जिला रेवाड़ी में 412 प्राथमिक पाठशाला हैं जिनमें 30760 बच्चें हैं और जिले के प्राइवेट स्कूलों में 126432 बच्चें हैं यानि प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले सरकारी स्कूलों में एक चौथाई बच्चे भी नही हैं। पिछली साल के मुकाबले इस साल लगभग दो फिसदी बच्चें सरकारी स्कूलों से ओर मुंह मोड़ चुके हैं। सरकारी स्कूलों से मोह भंग होने का मुख्य कारण सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का आभाव और बच्चों के रेख देख ठीक से ना होना माना जाता हैं। लेकिन जिला शिक्षा मौलिक अधिकारी कहना है कि सरकारी स्कूलों में सभी सुविधाएं हैं और वो कोशिश भी करते हैं कि सरकारी स्कूलों में ज्यादा से ज्यादा बच्चें एडमिशन हों लेकिन अभिभावकों को सोच है कि वो अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में एडमिशन कराना ज्यादा पसंद करते हैं।

शिक्षा विभाग भले से बात कहता हो कि सरकारी स्कूलों में सभी सुविधा है और अभिभावकों कि सोच कि वो प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों का एडमिशन कराना चाहाते हैं लेकिन सचाई ये है कि प्राथमिक पाठशालाओं में जो शिक्षा का स्तर होना चाहिए और जो बच्चों को सुविधा मिलनी चाहिए वो नहीं मिल पा रही है। जिसका परिणाम है कि बच्चे सरकारी स्कूलों से नाता तोड़ते जा रहे हैं।

आप hindi.news18.com की खबरें पढ़ने के लिए हमें फेसबुक और टि्वटर पर फॉलो कर सकते हैं.

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर