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कोरोना काल में ऑनलाइन वर्किंग से बच्चों और बुजुर्गों की आंखों में बढ़ी दिक्कत, डॉक्टर्स ने दी ये सलाह...

कोरोना काल में ऑनलाइन वर्किंग से बच्चों और बुजुर्गों की आंखों में बढ़ी दिक्कत, डॉक्टर्स ने दी ये सलाह...

मोबाइल फोन पर 20 मिनट काम करने के बाद 20 सेकेंड का ब्रेक दिया जाए.

मोबाइल फोन पर 20 मिनट काम करने के बाद 20 सेकेंड का ब्रेक दिया जाए.

डॉक्टरों का कहना है कि प्रत्येक 2 साल में आंखों का चेकअप कराना बहुत जरूरी है. वहीं आंखों को बार-बार नहीं धोना चाहिए. इससे से भी नेचुरल मसल कमजोर होती है.

    अनिल राठी

    फरीदाबाद. कोरोना ने हमारी रोजाना की दिनचर्या को पूरी तरह से बदल दिया है. आज ऑनलाइन पढ़ाई (Online Study), ऑनलाइन मीटिंग, ऑनलाइन काम, ऑनलाइन खरीदारी, ऑनलाइन इंटरटेनमेंट सहित अन्य तौर तरीके हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. लेकिन यह ऑनलाइन तकनीक बच्चों, बुजुर्गों व बड़ो में दृष्टि रोग को बढ़ावा दे रही है. फरीदाबाद सिविल अस्पताल के नेत्र विभाग (Eye Department) में तेजी के साथ नेत्र रोग के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है. लॉकडाउन से पहले जहां 100 के करीब नेत्र रोग के मरीज आ रहे थे. वहीं अब इनकी संख्या दोगुनी हो चुकी है. जिसका मुख्य कारण स्क्रीन पर ज्यादा टाइम बिताना है.

    लॉकडाउन में बच्चों ने मोबाइल फोन व लैपटॉप पर ऑनलाइन क्लास लेना शुरू किया, जिसके बाद उनकी पढ़ाई अभी भी ऑनलाइन जारी है. कर्मचारियों ने ऑनलाइन घर से  काम किया और आज भी कई सारी बैठकें ऑनलाइन ही की जा रही है. निजी हो या सरकारी सभी विभागों में ऑनलाइन काम बढ़ गया है और स्क्रीन पर टाइम भी अधिक बिताया जा रहा है. ऐसे में बच्चों से लेकर बड़ों तक नेत्र रोग संबंधी समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं.

    स्क्रीन पर टाइम बढ़ने के कारण आंखों में दवाब,  थकान महसूस होना, आंखों में खुजली होना, दूर या पास की चीज साफ दिखाई ना देना, आंखों में सूखापन, कम रोशनी में दिखाई ना देना,  आंखों में दर्द महसूस होना, धुंधला दिखाई देना, आंख में पानी आना, जलन होना जैसे विभिन्न प्रकार की नेत्र रोग बढ़ रहे हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 में.5.7 करोड़ लोग नजर संबंधी तकलीफ से ग्रस्त थे. लेकिन वर्ष 2020 में ये आंकड़ा 13.7 करोड़ पहुंच गया है.

    स्वास्थ्य विभाग मानता है कि 80 फ़ीसदी अंधता के मामले को व्यस्कों में समय रहते रोका जा सकता है. मोबाइल फोन के प्रयोग से लेकर कंप्यूटर व लैपटॉप के माध्यम से पढ़ाई करने वाले और काम करने वाले बच्चों में लोगों को इन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. फरीदाबाद स्वास्थ्य विभाग के नेत्र चिकित्सकों की मानें तो वर्तमान समय में आंखों की ओपीडी तेजी के साथ बढ़ी है. सिविल अस्पताल फरीदाबाद की महिला नेत्र चिकित्सक डॉ निधि ने बताया की 20-20 नियम को अपनी दिनचर्या में शामिल करके नेत्र रोग की समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है.

    इस नियम के अनुसार कंप्यूटर लैपटॉप या मोबाइल फोन पर 20 मिनट काम करने के बाद 20 सेकंड का ब्रेक दिया जाए. इस पर एक में 20 मीटर दूर रखी चीज पर फोकस किया जाए. ऐसा करने से आंखों की मांसपेशियों को राहत महसूस होगी और स्क्रीन टाइम में भी ब्रेक मिलेगा. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रत्येक 2 साल में आंखों का चेकअप कराना बेहद जरूरी है. आंखों को बार-बार धोने से भी नेचुरल मसल कमजोर होती है.

    Tags: Doctor, Eyes, Lockdown

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