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किसानों का फूटा गुस्सा, अंबाला में सड़कों पर आलू फेंके

किसानों का फूटा गुस्सा, अंबाला में सड़कों पर आलू फेंके

File Photo

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आलू की कीमतों में अचानक आई गिरावट के विरोध में किसानों ने अंबाला के उपायुक्त कार्यालय के सामने अपनी कई क्विंटल फसल फेंक दी.

  • Bhasha
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    आलू की कीमतों में अचानक आई गिरावट के विरोध में किसानों ने अंबाला के उपायुक्त कार्यालय के सामने अपनी कई क्विंटल फसल फेंक दी.

    ये किसान ट्रैक्टर ट्रालियों में आलू लेकर पहुंचे और उपायुक्त कार्यालय के पास सड़क पर उसे फेंक दिया.

    किसान रविन्दर सिंह, गुरदेव सिंह, जसपाल सिंह, सुरेश त्रेहन और जरनैल सिंह ने कहा कि उनकी उत्पादन लागत करीब चार रपये प्रति किलोग्राम थी, लेकिन उन्हें बाजार में ढाई रपये किलोग्राम का भाव मिल रहा है जिससे उन्हें प्रति किलोग्राम की बिक्री पर डेढ़ रपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है.

    उन्होंने मांग की कि सरकार उनके लिए नीतियां बनाए ताकि किसान कम से कम अपनी उत्पादन लागत का भार वहन कर सकें.

    मालूम हो कि हरियाणा के किसान इन दिनों एक तरफ जहां कटाई के सीजन में व्यस्त हैं वहीं फसली विभिन्नता को अपनाने वाले किसान आलू की बेकद्री के कारण परेशान हैं. खेत में अधिकतर समय व्यस्त रहने के कारण किसान आलू की फसल को न तो सही तरीके से बेच पा रहे हैं और न ही उसे स्टोर कर पा रहे हैं. क्योंकि कोल्ड स्टोर में पहले से ही आलू मौजूद है. परिणाम स्वरूप पिछले एक सप्ताह के दौरान हरियाणा की मंडियों में आलू के दाम में जहां भारी गिरावट दर्ज की गई है वहीं आलू की फसल अब सडऩे लगी है.

    हरियाणा में वैसे तो आलू की फसल लगभग सभी जिलों में होती है लेकिन प्रदेश का अंबाला, कुरूक्षेत्र, यमुनानगर आदि जिले इस मामले में कुछ आगे हैं. यहां के किसान फसली विभिन्नता को अपनाते हुए नगदी की फसलों को ज्यादा तरजीह देने लगे हैं लेकिन सरकारी रवैया आपत्तिजनक होने के कारण किसानों को अब इससे दिक्कतें आने लगी हैं.

    कुरूक्षेत्र जिले में पीपली की अनाज मंडी सब्जियों की सबसे बड़ी मंडी मानी जाती है. यहां आलू के दाम गिरकर चार रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं जोकि करीब एक सप्ताह पहले आठ से दस रुपए किलो तक थे. किसानों के पास इस समय आलू को औने-पौने दाम में बेचने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है.

    किसानों ने बातचीत करने पर बताया कि उन्होंने औसतन 450 रुपए प्रति क्विंटल की दर से करीब 160 क्विंटल आलू बेचकर करीब-करीब 72 हजार रुपए कमाए हैं जबकि उनकी लागत 60 हजार रुपए अधिक आई है. पीपली की अनाज मंडी में मौजूद रादौर के किसान नीरज मोहन के अनुसार इस फसल में तीन माह से अधिक समय तक कड़ी मेहनत के बावजूद उन्हें महज 12 हजार रुपए की आमदन हुई है. किसानों के आलू की दुर्गति के लिए सरकार के मार्केटिंग सिस्टम को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अन्य फसलों की तरह ही सब्जियों की भी न्यूनतम कीमत तय होनी चाहिए.

    Tags: Ambala news, Haryana news

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