लाइव टीवी

माकपा नेता कृष्ण स्वरूप गोरखपुरिया का निधन, हिसार के जिंदल अस्पताल में ली अंतिम सांस

Jaspal Singh | News18 Haryana
Updated: October 23, 2019, 5:30 PM IST
माकपा नेता कृष्ण स्वरूप गोरखपुरिया का निधन, हिसार के जिंदल अस्पताल में ली अंतिम सांस
नहीं रहे माकपा नेता कृष्ण स्वरूप गोरखपुरिया

कृष्णस्वरुप बचपन से ही आधुनिक विचारधारा के थे. वह धर्म के नाम पर पाखंड के हमेशा विरोधी रहे.

  • Share this:
फतेहाबाद: कृष्ण स्वरूप गोरखपुरिया (Krishan Swaroop Gorakhpuria) का हिसार (Hisar) के जिंदल अस्पताल में हार्ट फेल होने से निधन (Death) हो गया. चार दिन पहले उन्हें पैरालाइज का अटैक आया था, जिसके चलते उन्हें जिंदल अस्पताल हिसर में भर्ती करवाया गया था. रात को उन्हें हार्ट अटैक आया था, जिसके चलते उन्हें जिंदल अस्पताल में भर्ती करवाया गया था..कृष्ण स्वरूप अपने पीछे दो बेटे व दो बेटियां छोड़ गए हैं.

कृष्णस्वरुप बचपन से ही आधुनिक विचारधारा के थे. वह धर्म के नाम पर पाखंड के हमेशा विरोधी रहे. जब वे पांच वर्ष के थे तो आर्य समाजी नेता मास्टर माड़ूराम उनके गांव गोरखपुर में उनके पिता के घर आए थे. वह बताते थे कि मास्टर माड़ूराम ने जिस तरीके से अंधविश्वास और मूर्ति पूजा के विरोध में निर्भीक तरीके से अपने विचार व्यक्त किए, उससे वह बहुत प्रभावित हुए थे.

वह कहते थे कि मास्टर माड़ूराम के विचारों से प्रभावित होकर वह कभी भी मंदिर, गुरूद्वारे, मस्जिद, चर्च या गुरूद्वारे में नहीं गए. स्कूल, कॉलेज में वह छात्र संघ की राजनीति में सक्रिय हो गए. उन्होंने इस क्षेत्र में एसएफआई को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई. 1973 में जब वह हिसार जाट कॉलेज में एमए इंग्लिश कर रहे थे तो कॉलेज से उनका नाम इसलिए काट दिया गया, क्योंकि उन्हेांने अध्यापकों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल को समर्थन का फैसला किया था.

छात्र राजनीति ने मोड़ा वामपंथ की ओर

छात्र राजनीति के अनुभवों ने उन्हें वामपंथ की ओर मोड़ दिया. वे माकपा का परिचायक बन गए. वह माकपा की टिकट पर फतेहाबाद से 1998 में उपचुनाव और 2004 में आम चुनाव लड़ा. उन्हें भी पता था कि वह जीत नहीं रहे मगर वह कहते थे कि सभी चुनाव जीत के लिए नहीं लड़े जाते, जतना तक विचार पहुंचाना है. वह वर्ष 2000 में जिला परिषद के सदस्य निर्वाचित हुए.

सक्रिय राजनीति से खुद को किया अलग

मगर 2008 में माकपा के साथ कुछ विवादों के चलते उन्होंने स्वयं को सक्रिय राजनीति से अलग कर लिया. आपातकाल के दौरान वह जेल में भी गए. भजनलाल सरकार में फ्लोर मिल मामले में भी वह 32 दिन के लिए जेल में रहे.
Loading...

ये भी पढ़ें:- हरियाणा में 65 फीसदी लोगों ने वोट डाला, एग्जिट पोल में फिर खट्टर सरकार

ये भी पढ़ें:- News 18 IPSOS Exit Poll 2019: हरियाणा में BJP 75 पार, 10 पर सिमट रही कांग्रेस

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए फतेहाबाद से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 23, 2019, 5:20 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...