कमाल का दर्जी! दोनों हाथ नहीं होने पर भी नाप लेकर कपड़े की करता था सिलाई

मदनलाल ने साबित कर दिखाया है कि दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं है.
मदनलाल ने साबित कर दिखाया है कि दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं है.

मदनलाल का कहना था कि मन की दिव्यांगता न हो तो शारीरिक दिव्यांगता (Disability) कोई मायने नहीं रखता. इसलिए वह शारीरिक रूप से अशक्त होने के बावजूद अपने पैरों पर खड़े हैं.

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फतेहाबाद. हरियाणा के फतेहाबाद (Fatehabad) जिले के बनगांव निवासी मदनलाल उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं, जो मुसीबतों में घबरा जाते हैं. मदनलाल के साथ कुदरत ने जन्म से ही मजाक किया था. दोनों बाजू नहीं दिए. बचपन तो किसी तरह कट गया, लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती गई, वैसे-वैसे उनकी परेशानी भी बढ़ती चली गई थी. लेकिन एक दिन उन्होंने कुछ नया करने की ठान ली. बस यहीं से उनका रास्ता मंजिल की ओर चल पड़ा.

दोनों बाजू नहीं होने के बावजूद मदनलाल अपने गांव में न केवल दर्जी की दुकान चलाते थे, बल्कि अपना सारा काम भी खुद ही किया करते थे. जैसे दाढ़ी बनाना, खाना बनाना, पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था करना. अपने परिवार के सदस्यों के काम में भी वह मदद करते थे. इतना ही नहीं दिव्यांगता पर जगह-जगह जाकर लोगों को जागरूक भी करते थै.

दूसरों के लिए उदाहरण बने मदनलाल का कहना था कि मन की दिव्यांगता न हो तो शारीरिक दिव्यांगता कोई मायने नहीं रखती. इसलिए वह शारीरिक रूप से अशक्त होने के बावजूद भी अपने पैरों पर खड़े हैं. परिवार पर बोझ नहीं, बल्कि परिवार का बोझ उठा रहे हैं.



वेरी वेरी स्पेशल लक्ष्मण ने की जमकर सराहना
मदनलाल के इस हौसले को भारतीय क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण ने जमकर सराहा है. अपने ट्वीट जो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रहा है, में लक्ष्मण ने कहा है कि हरियाणा के मदन लाल के दोनों हाथ नहीं है और वे बहुत संघर्ष से गुजरे हैं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने पैरों का इस्तेमाल करते हुए सिलाई सीखी और वे सिलाई का अच्छा काम किया.

सीएम ने भी किया ट्वीट

उधर, दूसरी ओर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस ट्वीट को भी रीट्वीट करते हुए लिखा है कि नायक सामान्य व्यक्ति की तरह होता है पर जो बाधाओं और कठिनाइयों के बावजूद भी अपना मनोबल और हिम्मत बनाए रखता है. उसे कोई भी बाधा रोक नहीं सकती. मदन लाल हम सभी के लिए प्रेरणा हैं.

करीब दो महीने पहले हुआ था मदन लाल का निधन

बता दें कि मदन लाल का करीब दो महीने पहले निधन हो चुका है. विदेशों के भी कई टीवी चैनलों पर इनकी कहानी को दिखाया गया है. वो उन सभी लोगों के प्रेरणा है जो छोटी-छोटी कठिनाईयों से हार मान लेते हैं. उन्होंने अपने दोनों बाजू नहीं होने के बावजूद कभी हार नहीं मानी और हर काम स्वयं करते थे.
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