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सरकार ने मानी किसान संघर्ष समिति की मांगें, रद्द होंगे किसानों पर दर्ज मुकदमें

Jaspal Singh | News18 Himachal Pradesh
Updated: December 6, 2019, 7:27 AM IST
सरकार ने मानी किसान संघर्ष समिति की मांगें, रद्द होंगे किसानों पर दर्ज मुकदमें
फतेहाबाद - पराली वाले मुकदमों पर प्रशासन कार्रवाई बंद रखेगा

किसान संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों की तीनों मांगें सरकार ने मान ली. इनमें लोकल स्तर के मुकदमें प्रशासन द्वारा रद्द किए जाएंगे. पराली वाले मुकदमों (Stubble burning case) पर प्रशासन कार्रवाई बंद रखेगा और किसानों की मांगों को लेकर मंत्री रणजीत सिंह चौटाला (Ranjeet Singh Chautala) से प्रशासन द्वारा मीटिंग करवाई जाएगी.

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फतेहाबाद. मांगें मान लिए जाने के बाद किसान संघर्ष समिति (Kisan sangharsh Samiti) ने अपने आंदोलन को समाप्त घोषित कर दिया. धरने की समाप्ति एसडीएम ने हड़ताल पर बैठे किसानों को जूस पिलाकर की. गुरुवार को हिसार रेंज के कमिश्नर ने किसान संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. किसान संघर्ष समिति के नेता मनदीप नथवान (Mandeep Nathwan) ने बताया कि बैठक में किसान संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों की तीनों मांगें सरकार ने मान ली. इनमें लोकल स्तर के मुकदमें प्रशासन द्वारा रद्द किए जाएंगे. पराली वाले मुकदमों  (Stubble burning case) पर प्रशासन कार्रवाई बंद रखेगा और किसानों की मांगों को लेकर मंत्री रणजीत सिंह चौटाला (Ranjeet Singh Chautala) से प्रशासन द्वारा मीटिंग करवाई जाएगी. इस पर प्रतिनिधिमंडल ने इसे किसानों के संघर्ष की जीत बताते हुए धरना समाप्त करने की घोषणा की.

24 दिसंबर को किसानों ने बुलाया सम्मेलन

धरना स्थल पर आगामी 24 दिसंबर को फतेहाबाद जिले के किसानों का एक विशेष सम्मेलन बुलाने की भी घोषणा की गई. उससे पहले हर गांव में किसान कमेटियां गठित की जाएगी और इस सम्मेलन में हजारों किसान भाग लेंगे. सम्मेलन की तैयारियां जोरशोर की जाएगी. मनदीप ने बताया कि इस सम्मेलन में किसानों की बची हुई मांगों को पूरा करवाने के लिए आगामी रणनीति तैयार की जाएगी.

 

धरना स्थल पर आगामी 24 दिसंबर को फतेहाबाद जिले के किसानों का एक विशेष सम्मेलन बुलाने की भी घोषणा की गई.


'किसानों को संगठित होकर लड़ना होगा'

इससे पूर्व किसानों के धरने को जम्हुरी किसान सभा पंजाब के राज्य महासचिव कुलवंत सिंह संधू ने संबोधित किया. उन्होंने कहा कि किसानों को प्रताड़ित करने वाली नीति सरकार बंद करे. उन्होंने कहा कि किसान पहले ही आत्महत्या के रास्ते पर चल रहा है. किसान को कर्जामुक्त करने की बात तो दूर सरकार किसानों को उनकी फसल का पूरा दाम तक नहीं दे रही है. किसान हितैषी होने का दावा करने वाली गठबंधन सरकार द्वारा किसानों के लिए कोई ठोस नीति ना बनाना, सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है. उन्होंने कहा कि आज किसानों को संगठित होकर ही अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा, यही एक रास्ता है.इस धरने को किसान नेता प्रगट सिंह ने भी संबोधित किया और जीत के लिए सभी किसानों को बधाई दी. किसान यूनियन मानसा, पंजाब के प्रधान रूद्र सिंह ने भी आज धरने में शिरकत की और किसानों को अपने अधिकारों के लिए लड़ऩे का आह्वान किया.

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First published: December 6, 2019, 7:27 AM IST
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