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कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर सरकारी स्कूल के बच्चे

Jaspal Singh | News18 Haryana
Updated: December 4, 2019, 2:44 PM IST
कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर सरकारी स्कूल के बच्चे
खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर सरकारी स्कूल के बच्चे

बच्चों को खुले आसमान के नीचे बैठकर शिक्षा (Education) ग्रहण करने पर मजबूर होना पढ़ रहा है. उस पर सरकारी बाबुओं (Government Officers) की लालफीता शाही इस कदर हावी की कि स्कूल में कमरों के निर्माण के लिए लगाई गई फाइल पर मिट्टी की परत जम गई है, मगर फाइल इधर से उधर नहीं हो पाई

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फतेहाबाद. सरकार (Government) का नारा है ‘पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया’ मगर सवाल उठता है कैसे?  पढ़ऩे के लिए स्कूल (School) और स्कूल में जरूरी सुविधाएं होना भी तो जरूरी है. सरकार भले ही शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने के लिए तमाम योजनाएं लेकर आ रही हो, मगर धरातल की तस्वीर अगर देखेंगे तो यही कहेंगे. कैसे पढ़ेगा इंडिया-कैसे बढ़ेगा इंडिया. हम बात कर रहे हैं फतेहाबाद के गांव धांगड़ की.

यहां स्कूल में पढ़ऩे वाले बच्चों के लिए कमरे ही नहीं हैं. अब कमरे नहीं है तो जरूरी सुविधाओं की बात सोचना ही बेईमानी होगी. चाहे कड़कड़ाती ठंड हो या फिर चिलचिलाती धूप में छोटे-छोटे बच्चों को बाहर खुले आंगन में खुले आसमान में के नीचे बैठकर अपनी शिक्षा दीक्षा लेनी पड़ती है, और अगर बरसात आ जाए तो फिर भगवान ही मालिक है.

स्कूल में 250 से अधिक बच्चे हैं, मगर कमरे 4 ही है. जरूरत पड़ऩे पर नजदीकी कन्या स्कूल से कमरे उधार में लेकर बच्चों को पढ़ाया जाता है. दरअसल तीन वर्ष पूर्व जब हाइवे का निर्माण हुआ तो स्कूल के बड़े हिस्से का अधिग्रहण कर लिया गया. जिस कारण स्कूल में बने कमरे टूट गए, तब से लेकर अब तक स्कूल में कमरे नहीं बन पाए.

टाट ले जाते छात्र


नहीं हो रही सुनवाई

बच्चों को खुले आसमान के नीचे बैठकर शिक्षा ग्रहण करने पर मजबूर होना पढ़ रहा है. उस पर सरकारी बाबुओं की लालफीता शाही इस कदर हावी की कि स्कूल में कमरों के निर्माण के लिए लगाई गई फाइल पर मिट्टी की परत जम गई है, मगर फाइल इधर से उधर नहीं हो पाई. स्कूल स्टॉफ की मानें तो स्कूल और गांव की पंचायत की ओर से कई बार शिक्षा विभाग को लिखा गया है, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई.

पंचायत ने बनवाया शेड
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बच्चों की परेशानी को देखते हुए एक बड़ा शेड पंचायत ने बनवा कर दिया है. मगर यह शेड़ शीत लहर और लू के थपेड़ों से बच्चों को बचा पाने में नाकाफी है. अब सर्दियों का मौसम है और न्यूनतम तापमान तेजी से गिर रहा है ऐसे में छोटे छोटे बच्चों के सामने दोहरा इम्तिहान सामने है. एक स्कूली एम्तिहान की तैयारी और दूसरा मौसम से लडऩा, मगर यह सब शासन और प्रशासन को शायद नजर ही नहीं आ रहा है.

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First published: December 4, 2019, 2:44 PM IST
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