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पाकिस्तान का पूर्व सांसद होने का दावा करने वाला ये शख्स फतेहाबाद में करता है मजदूरी, CAB से जगी नागरिकता की आस

News18 Haryana
Updated: December 12, 2019, 2:47 PM IST
पाकिस्तान का पूर्व सांसद होने का दावा करने वाला ये शख्स फतेहाबाद में करता है मजदूरी, CAB से जगी नागरिकता की आस
नागरिकता संशोधन बिल पास होने से खुश पाकिस्तान से भारत आया ये शख्स

डिवायाराम पाकिस्तान (Pakistan) मे कोई छोटी मोटी हस्ती नहीं थे. उनके अनुसार वे बेनजीर भुट्टो (Benazir Bhutto) के शासनकाल में पाकिस्तान के सांसद रहे थे. उनके अनुसार पाकिस्तान की संसद में अल्यसंख्यकों के लिए कुछ पद आरक्षित होते हैं, इसी के तहत उन्हें सांसद बनाया गया.

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फतेहाबाद. पाकिस्तान (Pakistan) में अत्याचार से तंग आकर भारत (India) में आकर बसे एक परिवार (Family) में इन दिनों खुशी का माहौल है. वजह से लोकसभा और राज्यभा में नागरिकता संशोधन बिल का पास होना. इस बिल के पास हो जाने से इन्हें आस जगी है कि इन्हें भी अब भारत की नागरिकता मिल जाएगी. ऐसा ही एक परिवार फतेहाबाद में है जो वर्ष 2000 में वीजा लेकर पाकिस्तान से भारत आया और फिर वीजा अवधि खत्म होने के बाद यहीं बस गया. इस परिवार के मुखिया डिवायाराम हैं.

डिवायाराम फतेहाबाद जिले के गांव रतनगढ़ में मजदूरी करके अपना और परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं. डिवायाराम पाकिस्तान मे कोई छोटी मोटी हस्ती नहीं थे. उनके अनुसार वे बेनजीर भुट्टो के शासनकाल में पाकिस्तान के सांसद रहे थे. उनके अनुसार पाकिस्तान की संसद में अल्यसंख्यकों के लिए कुछ पद आरक्षित होते हैं, इसी के तहत उन्हें सांसद बनाया गया.

डिवायाराम का परिवार


पाकिस्तान में हुए अत्याचार

डिवायाराम ने भारत में आने का जो कारण बताया उसे सुनकर वहां खड़े लोग भावुक हो गए. उन्होंने बताया कि वहां मुसलमान, गैर मुस्लिम लोगों पर बेहताशा अत्याचार करते हैं. उन्होंने बताया कि उनके सांसद बनने के बाद वहां के दबंग लोगों ने उनके परिवार की एक लड़की को उठा लिया और उसके साथ जबरदस्ती की. सत्ता में होने के बावजूद वे कुछ नहीं कर पाए, इससे हताश होकर उन्होंने कुछ ही दिनों में अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

अत्याचारों से तंग आकर भारत आया परिवार

आए दिन हो रहे अत्याचारों से तंग आकर वे और उनका परिवार वीजा लेकर इंडिया आ गए और अपने पीछे अपनी तमाम संपत्ति, जमीन जायदाद छोड़ कर आए गए. उन्होंने बताया कि इंडिया आने के बाद वे रोहतक जिले में रहे. जहां वीजा अवधि समाप्त होने के बाद वे पाकिस्तान वापिस नहीं लौटे और वहां के तत्कालीन उपायुक्त के समक्ष पेश होकर भारत में रहने की अनुमति मांगी. इसके बाद वे वर्ष 2006 में फतेहाबाद के रतिया कस्बे के निकट गांव रतनगढ़ में आकर रहने लगे.पाकिस्तान में थी 25 बीघे जमीन

74 वर्षीय डिवायाराम ने बताया कि पाकिस्तान में उनके परिवार के पास 25 बीघे जमीन थी. परंतु मुस्लिम समाज व उनके मौलवियों के प्रताडि़त करने से उन्हें छोडऩा पड़ा. वे मुसलमान बनाने के लिए दबाव बनाते. जब उन्होंने मुस्लिम धर्म अपनाने से मना कर दिया तो मुसलमानों ने कई तरह से शोषण करना शुरू कर दिया. मजबूरन जमीन व घर छोड़ भारत आना पड़ा. उन्होंने बताया किविधेयक पेश होने से वे खुश हैं. उन्हें उम्मीद है कि अब भारत की नागरिकता मिल जाएगी.

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First published: December 12, 2019, 2:38 PM IST
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