पराली जलाने वाले की सूचना देने वाले का नाम पटवारी ने कर दिया सार्वजनिक, निलंबित
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पराली जलाने वाले की सूचना देने वाले का नाम पटवारी ने कर दिया सार्वजनिक, निलंबित
हरियाणा में खेत में किसानों के पराली जलाने पर रोक लागू है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

उपायुक्त ने अपने आदेशों में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद सभी अधिकारियों को सख्त आदेश दिए गए हैं कि वह पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाए और ग्रामीणों को जागरुक करें.

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फतेहाबाद. पराली जलाने (Stubble Burning) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेशों की अब अधिकारी ही अवहेलना कर रहे हैं. फतेहाबाद (Fatehabad) में एक ऐसा मामला सामने आया है, जब एक गांव के प्रबुद्ध नागरिक ने प्रशासन (Administration) को पराली जलाने वालों की सूचना दी तो इस गांव से संबंधित पटवारी ने उसकी पहचान सार्वजनिक कर दी.

जिस कारण इस ग्रामीण को गांव में व्यक्तिगत रंजिश का सामना करना पड़ रहा है. मामला उपायुक्त धीरेन्द्र खडग़टा के संज्ञान में आया तो डीसी ने इस पर कड़ा कदम उठाते हुए बोधराज पटवारी को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया. साथ ही मामले की जांच एडीसी को सौंप दी गई है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के बाद भी फतेहाबाद जिले में पराली जलाने के मामलों में कोई कमी नहीं आई है. सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना के लिए डीसी ने पटवारियों व अन्य अधिकारियों की स्पेशल ड्यूटी गांवों में लगाई हुई थी, ताकि पराली जलाने के मामले पर अंकुश लगाया जा सके.



पीड़ित ने प्रशासन को दी थी सूचना



ऐसे में गांव रतिया के गांव रत्ताखेड़ा-भरपूर के एक ग्रामीण ने इसकी जानकारी प्रशासन को दी थी कि गांव में पराली जलाई जा रही है. इस मामले में गांव के पटवारी बोधराज ने ग्रामीणों को उक्त ग्रामीण का नाम गांव में सार्वजनिक कर दिया. जिस पर कार्रवाई करते हुए वीरवार देर शाम को डीसी धीरेन्द्र खडग़टा ने उक्त पटवारी के संस्पेशन ऑर्डर जारी कर दिए हैं.

उपायुक्त ने अपने आदेशों में कही ये बात

उपायुक्त ने अपने आदेशों में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद सभी अधिकारियों को सख्त आदेश दिए गए हैं कि वह पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाए और ग्रामीणों को जागरुक करें. गांव रत्ताखेड़ा-भरपूर में पराली जलाने की 10 घटनाएं घटित हुई हैं और जब एक ग्रामीण ने इसकी सूचना प्रशासन को दी तो हलका पटवारी बोधराज ने उक्त ग्रामीण की पहचान गांव में सार्वजनिक कर दी. जबकि ऐसे मामले में सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम गोपनीय रखा जाता है.

पीड़ित को झेलना पड़ा ग्रामीणों का विरोध

पटवारी ने यह कार्य करके सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद अपनी ड्यूटी कर्तव्यनिष्ठा व ईमानदारी से नहीं की. जिस कारण उक्त ग्रामीण को पूरे गांव में विरोध का सामना करना पड़ रहा है. इसलिए पटवारी बोधराज को सस्पेंड किया जाता है और उनका मुख्यालय सदर कानूनगो कार्यालय उपायुक्त किया जाता है. इस मामले की जांच अतिरिक्त उपायुक्त को सौंपी जाती है.

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