हरियाणा: आसमान में छाई धूल की मोटी परत, सांसों पर लगा पहरा

वातावरण में छाई धूल के कारण आम लोगों के साथ-साथ सांस और हृदय के रोगियों के लिए परेशानी पैदा हो गई है.

Jaspal Singh | News18 Haryana
Updated: July 12, 2019, 1:54 PM IST
हरियाणा: आसमान में छाई धूल की मोटी परत, सांसों पर लगा पहरा
सांस और हृदय के रोगियों के लिए परेशानी पैदा हो गई है
Jaspal Singh | News18 Haryana
Updated: July 12, 2019, 1:54 PM IST
मानसून का सीजन जहां नई उमंग और खुशी लेकर आता है, वहीं इन दिनों हरियाणा के अनेक जिलों में हालत बेहद खराब बने हुए हैं. आसमान में काले बादलों की जगह रेत की मोटी परत छाई हुई है. पिछले चार दिनों से बने हालतों के कारण लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है. एक ओर पारा 40 के आसपास चल रहा है तो वहीं वातावरण में नमी और रेत के कॉकटेल आमजन मानस की सांसों पर प्रतिबंध लगा दिया है. वातावरण में प्रदूषण का स्तर सात गुना तक बढ़ गया है.

वायुमंडल में जहां पीएम 2.5 का स्तर सामान्य तौर पर 60 के आसपास होना चाहिए, वहीं यह बढ़कर करीब 370 को क्रास कर गया है. यानि सात गुणा तक की बढोतरी, सैंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा जारी किए गए बुलेटिन को देखें तो हरियाणा के सिरसा, फतेहाबाद, फरीदाबाद, बल्लभगढ़, सोनीपत सहित कई ऐसे जिले में जहां स्थिति बेहद विकट बनी हुई है. पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा जारी इन आंकड़ों यह बताने के लिए काफी हैं कि वातावरण में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है.



वहीं वातावरण में छाई धूल के कारण आम लोगों के साथ-साथ सांस और हृदय के रोगियों के लिए परेशानी पैदा हो गई है. विशेषज्ञ चिकित्सकों की मानें तो मौजूद हालत सांस और हृदय रोगियों के लिए किसी एमरजेंसी से कम नहीं है. बुजुर्गों और बच्चों के लिए तो हालत और भी चिंता जनक हो सकते हैं. चिकित्सकों ने सलाह दी है कि लोग अपने घरों से कम से कम निकलें और अगर बाहर निकलना जरूरी हो तो मुंह और नाक मास्क लगाएं तथा आंखों पर चश्मा लगाकर निकलें.



क्या होता है पीएम 2.5

पीएम को पार्टिकुलेट मेटर भी कहा जाता है, जो कि वातावरण में मौजूद ठोस कणों और तरल बूंदों का मिश्रण है. हवा में मौजूद कण इतने छोटे होते हैं कि आप नंगी आंखों से भी नहीं देख सकते हैं. कुछ कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हें केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का उपयोग करके पता लगाया जा सकता है. कण प्रदूषण में पीएम 2.5 और पीएम 10  शामिल हैं जो बहुत खतरनाक होते हैं. पीएम 2.5 वायुमंडलीय कण पदार्थ को संदर्भित करता है जिसमें 2.5 माइक्रोमीटर से कम व्यास होता है, जो मानव बाल के व्यास के लगभग 3प्रतिशत है. इसमें धूल, गर्द और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं. पीएम 10 और 2.5 धूल, कंस्ट्रदक्शेन की जगह पर और कूड़ा व पुआल जलाने से ज्यादा बढ़ता है. बता दें कि हवा में पीएम2.5 की मात्रा 60 और पीएम 10 की मात्रा 100 होने पर ही हवा को सांस लेने के लिए सुरक्षित माना जाता है.

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