फतेहाबाद: रिटायर्ड जेल वार्डन को 2 साल बाद हाईकोर्ट से मिला न्याय, सरकार देगी 10 लाख रुपये

रिटायर्ड जेल वार्डन के वकील
रिटायर्ड जेल वार्डन के वकील

हाईकोर्ट (Highcourt) ने प्रदेश सरकार को लीव एनकैशमेंट और ग्रेजुएटी के रूप में कर्मचारी को 10 लाख रुपए को देने के आदेश (Order) जारी किए हैं

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फतेहाबाद. टोहाना के गांव रत्ताखेड़ा के रहने वाले रिटायर्ड जेल वार्डन (retired jail warden) को लीव एनकैशमेंट और ग्रेजुएटी मामले में हाईकोर्ट (Highcourt) के माध्यम से न्याय मिल गया है. पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को लीव एनकैशमेंट और ग्रेजुएटी के रूप में कर्मचारी को 10 लाख रुपए को देने के आदेश जारी किए हैं, यह जानकारी पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता अहताब सिंह खारा ने दी.

खारा ने बताया कि हिसार जेल में वार्ड के तौर पर कार्यरत रत्ताखेडा निवासी मेजर सिंह सहित 6 अधिकारियों के खिलाफ वर्ष 2009 में कंप्लेंट केस लगाया गया था. उन्होंने बताया कि आरोप के बाद मेजर सिंह को नवंबर 2010 से मार्च 2011 तक सस्पेंड भी किया गया था जिसके बाद 2011 में कोर्ट ने केस का निर्णय कर्मचारी के पक्ष में दिया. उस उपरांत वर्ष 2014 में कर्मचारी मेजर सिंह की रिटायरमेंट हो गई लेकिन सरकार ने उसकी लीव एनकैशमेंट और ग्रेजुएटी को रोक लिया.

वकील ने कही ये बात



उस उपरांत मेजर सिंह ने अधिवक्ता अफताब खारा के माध्यम से दिसंबर 2017 में हाईकोर्ट में याचिका डाली गई. अधिवक्ता ने बताया कि उन्होंने न्यायालय के समक्ष सरकार ने नियम 2.2 बी के तहत उसकी यह राशि रोकने की बात कही, जिस पर पर उन्होंने न्यायलय को बताया कि उनके याची के चलते सरकार का कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ है, इसलिए उनकी यह राशि जारी की जाए.
सरकार को 10 लाख रुपये देने का फरमान

सरकार के पास उनकी यह राशि रोकने का कोई ग्राउंड नहीं है. संविधान की धारा 300ए के तहत रिटायर्मेंट के बाद राशि लेना व्यक्ति का हक है. उन्होंने बताया कि जस्टिस निर्मल जीत कौर ने दस फरवरी को कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए लगभग दस लाख रूपये मेजर सिंह को देने के लिए उनके हक में फैसला दिया है.

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