Water Crisis: हरियाणा में 266 फुट नीचे पहुंचा भू-जल स्तर, अब संकट से उबारेंगे किसान
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Water Crisis: हरियाणा में 266 फुट नीचे पहुंचा भू-जल स्तर, अब संकट से उबारेंगे किसान
जल संकट से निपटने के लिए 58,421 हैक्टेयर में नहीं पैदा किया जाएगा धान

पानी बचाने की मुहिम: 53,000 किसानों ने धान न पैदा करने का लिया संकल्प, एक किलो चावल पैदा करने में लगता है 5000 लीटर पानी, अन्नदाता पर जलसंकट से बचाने का दारोमदार

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  • Last Updated: June 12, 2020, 10:26 AM IST
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चंडीगढ़. हरियाणा में भू-जल स्तर (Ground water level) रिकॉर्ड 81 मीटर (265.748 फुट) से नीचे चला गया ‌है. पिछले एक दशक में लगभग दो गुना संकट बढ़ा है. मुख्यमंत्री मनोहर लाल के मुताबिक 10 साल पहले यहां का भू-जल 40 से 50 मीटर नीचे मिला करता था. जाहिर है कि अत्यधिक दोहन से ऐसे हालात पैदा हुए हैं. माना जा रहा है कि सबसे ज्यादा पानी का दोहन यहां कृषि क्षेत्र में हुआ है. क्योंकि यह प्रदेश टॉप टेन धान उत्पादकों (Paddy producer state) में शामिल है. कृषि (Agriculture) वैज्ञानिकों के मुताबिक एक किलोग्राम चावल पैदा करने में 5000 लीटर तक पानी की जरूरत होती है. ऐसे में अब सरकार ने धान से तौबा करने की नीति बनाई है. जलसंकट से बचाने का दारोमदार अन्नदाता पर है.

जल संरक्षण के लिए यहां ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना बनाई है. कुछ किसान इसका विरोध भी कर रहे हैं कि क्योंकि उन्हें 7000 रुपये एकड़ की प्रोत्साहन राशि कम लग रही है. जल संकट (Water crisis) के लिहाज से डार्क जोन में शामिल क्षेत्रों में सरकार ने 1,00,000 हैक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल न बोने का फैसला लिया था.

कितने किसानों ने लिया भू-जल बचाने का संकल्प



अब तक 58,421 हैक्टेयर क्षेत्र में धान के स्थान पर अन्य वैकल्पिक फसलें उगाने के लिए किसान सहमत हुए हैं. लगभग 53,000 किसानों (Farmers) ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन करवाया है. मतलब साफ है कि किसान भी अब समझ गए हैं कि जमीन के साथ ही पानी की अपनी विरासत भावी पीढ़ी को देकर जाएं.
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देश में जल संकट बढ़ रहा है


किसानों के लिए पानी कहां से आएगा?

भूजल रिचार्जिंग के लिए 1000 बोरवेलों का निर्माण होगा. रतिया, इस्माइलाबाद और गुहला ब्लॉक में सबसे पहले इसे लागू किया जाएगा. एक बोरवेल पर लगभग 1.5 लाख रुपये खर्च आएगा. 90 प्रतिशत खर्च सरकार वहन करेगी और केवल 10 फीसदी रकम किसान को देनी होगी. बोरवेल बनाने के बाद इसे किसानों को सौंप दिया जाएगा.

कहां लागू है ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’

प्रदेश के वो 8 ब्लॉक इसके लिए चयनित किए गए हैं जिनमें भूजल संकट ज्यादा है. इनमें रतिया, सीवान, गुहला, पीपली, शाहबाद, बबैन, ईस्माइलाबाद व सिरसा. इनमें धान की बिजाई होती है. इनमें किसानों को बागवानी अपनाने के लिए 30 हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान देने का इंतजाम किया गया है. हालांकि, प्रदेश में ज्यादा जल संकट वाले 19 ब्लॉक हैं. लेकिन इनमें से 11  ऐसे हैं जिसमें धान की फसल नहीं होती.

तीन ब्लॉक में विशेष छूट

रतिया, इस्माइलाबाद और गुहला ब्लॉक घग्गर नदी के पास पड़ते हैं. ये बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में आते है. इसलिए सरकार ने ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ में खुद रजिस्ट्रेशन करवाने वालों को विशेष छूट दी है. ऐसे किसानों के प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रीमियम भी सरकार भरेगी.

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