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मासूमों पर अपराधियों की नजर, बीते 5 साल में गुमशुदगी एवं अपहरण की भयावह स्थिति

Dharamvir Sharma | News18 Haryana
Updated: December 4, 2019, 10:31 AM IST
मासूमों पर अपराधियों की नजर, बीते 5 साल में गुमशुदगी एवं अपहरण की भयावह स्थिति
चंद पैसों में होता है मासूमों का सौदा

गुरुग्राम पुलिस (Gurugram police) के आंकड़ों पर गौर करें तो साफ हो जाता है कि गुरुग्राम में मासूम सुरक्षित नहीं है. 2012 से अभी तक 1428 लड़के लड़कियां गुमशुदगी (Girls Missing) या फिर अपहरण (Kidnap) जैसी वारदातों का शिकार हुए है जिनमे से 938 लडकियां गुमशुदा हुई या अपहरण कर ले जाई

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गुरुग्राम. साइबर सिटी गुरुग्राम (Gurugram) में लगातार गायब होते मासूम पुलिस (Police) प्रशासन के लिए सिरदर्द बनते जा रहे है. मासूमों को क्या पता की लालच की टोकरी में नापाक मंसूबा होता है. हाल ही में गुरुग्राम में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां रिश्तों की डोर में फंसा कर या टॉफी का लालच देकर मासूमों के अस्मत का सौदा हुआ है. वहीं ऐसे मामलो में गुरुग्राम पुलिस के मिसिंग सेल (Missing Cell) के बावजूद आज भी सैकड़ों ऐसे मासूमों के गुमशुदगी एवं अपहरण के मामले में जिसमे गुरुग्राम पुलिस के हाथ कोई सुराग तक नहीं लग पाया है.

जानकारों की मानें तो ह्यूमन ट्रैफिकिंग के धंधे से जुड़े लोगों की सेटिंग दिल्ली, मुंबई, राजस्थान, हरियाणा से लेकर साउथ इंडिया के कई शहरों में है. दिल्ली और मुंबई में सबसे ज्यादा छोटे बच्चों को बेचा जाता है. वहां बच्चों को बड़े लोगों के घरों में काम के लिए लगाया जाता है.  इतना ही नहीं हरियाणा  और राजस्थान में सबसे ज्यादा लड़कियों की सप्लाई होती है.

वहां कई ऐसे कस्बे और गांव हैं जहां लड़कियों को शादी करने के लिए बेचा जाता है. दस साल से कम उम्र के लड़के-लड़कियों के गायब होने के पीछे ये भी माना जाता है कि  बड़े पैमाने पर भीख मंगवाने वाले गैंग्स भी एक्टिव हैं. सिटी में आधा दर्जन से ज्यादा गैंग्स अपना जाल बिछाए हुए हैं. यहां एक्टिव गैंग के मेंबर्स बच्चों को चोरी करने के बाद दूसरे शहरों में सक्रिय गैंग को ट्रांसफर कर देते हैं. इसी तरह दूसरे शहरों से चोरी किए गए बच्चों को गुरुग्राम में लाकर भीख मांगने वाले सक्रिय गैंग को बेच देते है.

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मासूमों के लिए सुरक्षित नहीं गुरुग्राम

गुरुग्राम पुलिस के आंकड़ों पर गौर करें तो साफ हो जाता है कि गुरुग्राम में मासूम सुरक्षित नहीं है. 2012 से अभी तक 1428 लड़के लड़किया गुमशुदगी या फिर अपहरण जैसी वारदातों का शिकार हुए है जिनमे से  938 लडकियां गुमशुदा हुई या अपहरण कर ले जाई गई, जबकि इसमें से पुलिस ने 518 लड़कियों को सकुशल बरमाद भी किया लेकिन 420 लड़कियों का अभी भी कोई सुराग गुरुग्राम पुलिस का चिल्ड्रन मिसिंग सेल नही लगा पाया है जबकि नाबालिग लड़कों की स्थिति भी साइबर सिटी में गुमशुदगी या अपहरण की ज्यादा सुधरी नहीं है.

लापता बच्चों को नहीं ढूंढ पा रही पुलिस
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इसमें भी बीते 7 साल यानी 2012 से 2019  तक 489  नाबालिग लड़के गुमशुदा हुए या अपहरण कर ले जाये गए, जिनमे से 235 को गुरुग्राम पुलिस ने सकुशल बरमाद किया लेकिन इनमें भी तकरीबन 254 लड़को का कोई सुराग गुरुग्राम पुलिस नहीं लगा पाई है जो कि अपने आप मे भयवाह स्थिति है.

लगातार बढ़ रहे आंकड़ें

आंकड़ों पर नज़र डालें तो बीते 5 साल में तकरीबन 674 लड़के-लड़कियां अभी भी ऐसे हैं जिनका कोई सुराग तक प्रदेश की सर्वाधिक हाईटेक हो चली गुरुग्राम पुलिस के पास हो. 2019 में तकरीबन 139 लड़कियां और 44 लड़के साइबर सिटी से अगवा हुए या गुमशुदा हुए. इनमें से सिर्फ 44 लड़कियों को बरामद किया गया है. यानी 95 लड़कियां अभी भी बरमाद करनी बाकी है और बीते साल 2018 मे भी तकरीबन 182 लड़के-लड़कियां यहां से गुमशुदा हुए. आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है लेकिन नौनिहाल अभी भी अगवा या लगातार गुमशुदा होते जा रहे है.

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First published: December 4, 2019, 10:31 AM IST
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