मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे यहां के लोग

लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान नेता वोट मांगने तो आते हैं लेकिन उस वोट का कर्ज वह नेता आज तक नहीं चुका सके.

Dharamvir Sharma | News18 Haryana
Updated: August 15, 2019, 1:17 PM IST
मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे यहां के लोग
गुरुग्राम में झुग्गियों में रहने वाले लोग
Dharamvir Sharma | News18 Haryana
Updated: August 15, 2019, 1:17 PM IST
साइबर सिटी गुरुग्राम की तुलना पूरे विश्व में सिंगापुर से की जाती है. जहां बड़ी-बड़ी इमारतें, कंपनियों के कॉर्पोरेट दफ्तर हैं. लेकिन जब आप इन बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों से निकलेंगे तो इसी साइबर सिटी में कुछ ऐसे तबके के लोग भी हैं जो बीते 40 -50 साल से झुग्गी झोपड़ी में रहने को मजबूर है और आजादी के 73 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता अभियान के तहत हर गांव और शहर में स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत का नारा दिया है. जिसके तहत हर गांव में शौचालय बनवाने की बात कही थी. लेकिन गांव तो दूर की बात है साइबर सिटी जैसे शहर में लोगों के घर में शौचालय तक नहीं है. घर की महिलाओं को अपनी जिंदगी से खिलवाड़ करके सड़क पर शौच के लिए जाना पड़ता है. गुरुग्राम के सेक्टर 12 में झुग्गियों में रहने वाली महिलाओं ने अपना दर्द बयां किया है.

चुनाव में वोट मांगने आते हैं नेता

यहां के लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान नेता वोट मांगने तो आते हैं लेकिन उस वोट का कर्ज वह नेता आज तक नहीं चुका सके. इन  झुग्गियों में करीब ढाई सौ परिवार रहता है और यह दायित्व परिवार रोज मूलभूत सुविधाओं के लिए लड़ाई लड़ते हैं. यही नहीं जिंदगी जीना भी इनके लिए अब चुनौती बन चुका है, क्योंकि ना तो यहां पर पीने के लिए पानी है, ना खाने के लिए खाना, ना सर ढकने के लिए पक्का मकान और तमाम जो मूलभूत सुविधाएं भारत के एक आम नागरिक को मिलती हैं.

मूलभूत सुविधाओं से वंचित

ये लोग उन सभी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं जो एक आम इंसान को मिलनी चाहिए. स्वतंत्र दिवस पर इन लोगों ने सरकार से गुहार लगाई है कि इनको कम से कम मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए. लेकिन देश का यह दुर्भाग्य है कि 73 साल बाद भी कुछ लोग अपने आपको को आजाद महसूस नहीं करते.

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First published: August 15, 2019, 12:24 PM IST
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