विधानसभा चुनाव: बीजेपी की इस समीक्षा के बाद हरियाणा के दो जाट नेताओं के लिए बढ़ी चुनौती!

मोदी लहर में भी जाट, मुस्लिम बहुल इन क्षेत्रों में पीछे रही बीजेपी, अब मेवात पर भी रहेगा फोकस, अमित शाह ने दिए मंत्र!

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: June 11, 2019, 10:09 AM IST
विधानसभा चुनाव: बीजेपी की इस समीक्षा के बाद हरियाणा के दो जाट नेताओं के लिए बढ़ी चुनौती!
हरियाणा की 90 विधानसभा क्षेत्रों में से सिर्फ 11 पर पिछड़ी बीजेपी!
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: June 11, 2019, 10:09 AM IST
भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. लोकसभा चुनाव में यहां की सभी दस सीटें जीतने के बावजूद पार्टी ने अपनी कमियां खोजकर उसे दुरुस्त करने का प्लान बनाया है. कमियां जाट एवं मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों पर दिखी हैं जहां बीजेपी पीछे रही. इससे हरियाणा के दो बड़े जाट नेताओं के लिए चुनौती बढ़ती नजर आ रही है.  दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की अध्यक्षता में हुई भाजपा कोर कमेटी की बैठक में इस पर चर्चा की गई कि आखिर इन सीटों पर बीजेपी कैसे पिछड़ गई और कैसे इस पर विधानसभा चुनाव में आगे होना है. अब ऐसी सीटों पर बीजेपी फोकस करेगी.

हरियाणा की 10 लोकसभा सीटों के तहत कुल 90 विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनमें से सिर्फ 11 पर बीजेपी पीछे रही थी.  यानी पार्टी कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों से 79 विधानसभा सीटों पर आगे रही. यह अपने आप में शानदार है. लेकिन बीजेपी की जीत की भूख अपने कार्यकर्ताओं से सौ परसेंट के टारगेट पर काम करवाती है. हरियाणा में जब से मनोहर लाल खट्टर सीएम बने हैं तब से बीजेपी का चेहरा यहां गैर जाट पॉलिटिक्स करने वाली पार्टी का बना है. हालांकि, पार्टी के पास चार बड़े जाट नेता भी हैं.  लेकिन लोकसभा चुनाव में इनमें से दो नेता अपना किला नहीं बचा सके. (ये भी पढ़ें: किसानों के लिए खुशखबरी, इस राज्य के हर किसान परिवार को मिलेंगे सालाना 12000 रुपए!)

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किन सीटों पर बिगड़ा बीजेपी का गणित!

एक सीट है नारनौद. यह जाट नेता एवं कैबिनेट मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की विधानसभा है. यहां पार्टी लगभग 33 सौ वोट से पीछे रही. जबकि दूसरे जाट नेता और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश धनकड़ की सीट बादली से तो पार्टी 11500 वोट से पीछे रही. इसलिए विधानसभा चुनाव में जीतना इन जाट नेताओं के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. सांपला, बेरी, किलोई, महम, फिरोजपुर झिरका, पुन्हाना, नूंह पर बीजेपी पीछे रही थी.

बेरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खासमखास रघुवीर सिंह कादयान की सीट है. यह झज्जर जिले में आती है. रोहतक लोकसभा का हिस्सा है.  गढ़ी सांपला-किलोई विधानसभा से भूपेंद्र सिंह हुड्डा विधायक थे. महम रोहतक का हिस्सा है. यहां से कांग्रेस के आनंद सिंह डांगी विधायक हैं. वो भी हुड्डा के खास माने जाते हैं. जबकि, फिरोजपुर झिरका, पुन्हाना और नूंह मुस्लिम बहुल जिले मेवात के हैं, जो गुड़गांव लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है.

हरियाणा के वरिष्ठ पत्रकार नवीन धमीजा कहते हैं, "इससे ये जाहिर हो रहा है कि बीजेपी से जाट और मुस्लिम वोटर नहीं सधे. बीजेपी के जाट मंत्रियों से जनता कहीं न कहीं नाराज नजर आ रही है. जाट और गैर जाट पॉलिटिक्स की हवा साफ देखी जा सकती है. वरना इतनी प्रचंड लहर में बीजेपी जाट और मुस्लिम एरिया में क्यों पीछे हो गई?"
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...लेकिन बराला, बीरेंद्र सिंह की सीट पर रही आगे!

हालांकि, राज्य के एक और बड़े जाट नेता सुभाष बराला की टोहाना सीट पर बीजेपी कांग्रेस से आगे थी. बराला बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं जाट नेता बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता की सीट ऊंचाना में भी बीजेपी को बढ़त थी.

हरियाणा कभी कांग्रेस, इनेलो और हरियाणा विकास पार्टी का गढ़ हुआ करता था. लेकिन गैर जाट मुद्दे को हवा देकर पार्टी ने 2014 में पहली बार यहां पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई. हालांकि इससे पहले हरियाणा विकास पार्टी के साथ गठबंधन में उसकी सरकार रह चुकी है.

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धमीजा का कहना है कि जाटों और मुस्लिमों में दिख रही नाराजगी के बावजूद लोकसभा चुनाव परिणाम के बहाने अगर हम विधानसभा का विश्लेषण करें तो पाएंगे कि हरियाणा नई सरकार भी बीजेपी की ही आएगी. बीजेपी का वोट 79 विधानसभा में विपक्ष से ज्यादा है फिर भी विपक्ष अब तक सो रहा है. उसे आपस की कलह से ही फुरसत नहीं है. बीजेपी प्रवक्ता राजीव जेटली का कहना है कि पार्टी ने हर वर्ग के लिए काम किया है. इसलिए आएगी तो बीजेपी ही.

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