जब एक ही दिन में तीन बार पार्टी बदलकर यहां के निर्दलीय विधायक ने बनाया रिकॉर्ड
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जब एक ही दिन में तीन बार पार्टी बदलकर यहां के निर्दलीय विधायक ने बनाया रिकॉर्ड
हरियाणा से शुरू हुआ था राजनीति का आयाराम-गयाराम!

ये है आयाराम-गयाराम मुहावरे की पूरी कहानी! जो राजनीतिक कल्चर 1967 में हरियाणा ने शुरू किया था वो क्‍या था? सुबह में जो एमएलए इधर होता था, दोपहर में दूसरे खेमे में. शाम में तीसरे, रात में चौथे खेमे में, यह सब आज भी जारी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 5, 2019, 8:02 AM IST
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नई दिल्ली.  यह कहानी है उस आयाराम-गयाराम (Aya Ram Gaya Ram) कल्चर की जिसने भारतीय राजनीति (Indian Politics) की दिशा बदल दी.  इसकी जड़ें हरियाणा की राजनीति में हैं. यहां से शुरू हुई यह सियासी तिकड़मबाजी आज तक राजनीतिक दलों को परेशान कर रही है. इसके खिलाफ कानून बना लेकिन आस्था और पाला बदलने का खेल अब तक बंद नहीं हुआ. विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election) की सरगर्मी चल रही है. नेता कभी इस दल तो कभी उस दल में जा रहे हैं. ऐसे में हम आपको यहां के ऐसे ही एक राजनीतिक इतिहास से रूबरू करवा रहे हैं.

आयाराम का मुहावरा दलबदल के पर्याय के रूप में 1967 में उस वक्त मशहूर हुआ जब हरियाणा की हसनपुर (सुरक्षित) विधानसभा से निर्दलीय विधायक गयालाल (Gaya Lal) ने एक ही दिन में तीन बार पार्टी बदली. यह अपने आप में एक रिकॉर्ड था. इसके साथ ही भारतीय राजनीति में इस मुहावरे ने जगह बना ली. गयालाल के बेटे उदयभान, हरियाणा की होडल विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक रहे हैं. उन्हें इस बार भी टिकट मिली है.

वरिष्‍ठ पत्रकार नवीन धमीजा कहते हैं  "हरियाणा के राज्यपाल रहे जीडी तपासे ने एक बार कहा था- 'जिस तरह हम कपड़े बदलते हैं, वैसे ही यहां के विधायक दल बदलते हैं.' हरियाणा के पहले सीएम भगवत दयाल शर्मा की सरकार गिरने के दौरान इस कहावत का जन्‍म हुआ और यह राजनीति का सबसे असरदार शब्द बन गया"



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एक निर्दलीय विधायक ने एक ही दिन में तीन बार पार्टी बदलकर बनाया रिकॉर्ड




9 घंटे में बदलीं तीन पार्टियां

शर्मा की सरकार गिरने के बाद भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस (INC) से टूट कर आए विधायकों ने विशाल हरियाणा पार्टी (VHP) नाम से नया दल बनाया. फिर उन्‍होंने दक्षिण हरियाणा के बड़े नेता राव बिरेंद्र सिंह की रहनुमाई में नई सरकार का निर्माण किया. इसी दौरान फरीदाबाद क्षेत्र में आने वाले हसनपुर सीट के निर्दलीय विधायक गयालाल ने एक दिन में तीन पार्टियां बदल डालीं. फिलहाल, राव बिरेंद्र सिंह के बेटे राव इंद्रजीत सिंह मोदी सरकार में मंत्री हैं.

बताया जाता है कि गयालाल पहले कांग्रेस से यूनाइटेड फ्रंट में गए, फिर कांग्रेस में लौटे और 9 घंटे के अंदर ही यूनाइटेड फ्रंट में शामिल हो गए. उस समय राव बिरेंद्र सिंह ने कहा था, 'गया राम, अब आया राम है.' इसके बाद से ही दलबदलू नेताओं के लिए यह मुहावरा बन गया. हरियाणा के वयोवृद्ध कांग्रेस नेता बलदेव राज ओझा बताते हैं कि इसी घटना से सियासत में एक नया मुहावरा मिला था.

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राजनीति विज्ञान से जुड़ी एक किताब में दलबदल संबंधी प्रश्नोत्तरी


किताबों में दर्ज है दलबदलू राजनीति का इतिहास


राज्यसभा के उप सभापति और वरिष्‍ठ पत्रकार हरिवंश ने अपनी पुस्‍तक 'झारखंड: सपने और यथार्थ' में इस घटना का जिक्र किया है.  वह लिखते हैं कि ‘1967 के बाद हरियाणा से जिस आयाराम गयाराम की राजनीतिक संस्‍कृति शुरू हुई थी वह क्‍या थी? सुबह में जो एमएलए इधर होता था, दोपहर में दूसरे खेमे में. शाम में तीसरे, रात में चौथे खेमे में’.

राजीव रंजन की पुस्‍तक '1000 राजनीतिक प्रश्‍नोत्‍तरी' नामक किताब में तो इस घटना पर प्रश्‍नोत्‍तरी दी गई है. बताया गया है कि 1967 में सबसे पहले संसद में यशवंतराव चह्वाण ने आयाराम गयाराम शब्दबंध का जिक्र किया. केंद्रीय माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड की 11वीं कक्षा के राजनीति विज्ञान की पुस्‍तक में भी इस घटना का जिक्र किया गया है. उसमें कहा गया है ‘हरियाणा में आयाराम-गयाराम की राजनीति शुरू हुई.

 कारगर साबित नहीं हुआ कानून

'आयाराम-गयाराम' को रोकने के लिए राजीव गांधी ने 1985 में दल बदल विरोधी कानून बनाया, लेकिन वह ज्यादा कारगर साबित नहीं हुआ. इसलिए इसे और मजबूत करने के लिए 16-दिसंबर-2003 को संसद को 91वां संविधान संशोधन विधेयक पारित करना पड़ा. इसके बावजूद जरूरत पड़ने पर राजनीतिक पार्टियां किसी न किसी तरह अपना उल्लू सीधा कर ही लेती हैं.

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First published: October 5, 2019, 7:25 AM IST
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