ताऊ देवीलाल के इस गढ़ को एक-एक बार ढहा चुके हैं कांग्रेस-बीजेपी

21 अक्टूबर को मतदान होगा और 24 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी. जिसके बाद प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला जनता के बीच आ जाएगा.

कहा तो यह जाता है कि सियासत के ताऊ देवीलाल (Choudhary Devilal) के परिवार की जब तक इस सीट पर निगाह रही तो यहां से चौधरी धीरपाल (Choudhary Dheerpal) को कोई टक्कर नहीं दे पाया.

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नई दिल्ली. हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 (Haryana Assembly Election 2019) के लिए जहां हर सीट का अपना खासा महत्व है वहीं बादली विधानसभा (Badli Assembly) पर हर एक राजनीतिक दल की निगाह है. कहा तो यह जाता है कि सियासत के ताऊ देवीलाल (Choudhary Devilal) के परिवार की जब तक इस सीट पर निगाह रही तो यहां से चौधरी धीरपाल (Choudhary Dheerpal) को कोई टक्कर नहीं दे पाया. लेकिन बीते दो चुनावों की बात करें तो बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) एक-एक बार ताऊ परिवार के इस गढ़ को ढहा चुके हैं.

2014 के विधानसभा चुनाव में बादली सीट से बीजेपी के ओमप्रकाश धनखड़ ने जीत दर्ज की थी. ओपी धनखड़ राष्ट्रीय किसान मोर्चा के दो बार अध्यक्ष रह चुके हैं. धनखड़ भाजपा हिमाचल प्रदेश के पार्टी प्रभारी भी रह चुके हैं. 1978 में आरएसएस की गतिविधियों से जुड़ने के बाद वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में भी सक्रिय रहे थे. 2014 के चुनाव परिणाम में ओमप्रकाश धनखड़ (बीजेपी) 41549, कुलदीप वत्स (निर्दलीय) 32283, सुमित्रा धीरपाल सिंह (इनेलो) 16594, नरेश कुमार (कांग्रेस) 14452 वोट मिले थे.

1977 से वजूद में आई बादली विधानसभा में अब तक 9 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. पहली बार यहां से चौधरी हरद्वारी लाल जीते थे. लेकिन उसके बाद बादली एक तरह से चौधरी धीरपाल की होकर रह गई . उन्होंने 5 बार लगातार इस सीट पर जीत का परचम लहराया. इतना ही नहीं पांच बार की जीत में चार बार पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष चौधरी मनफूल सिंह को हराया.

धीरपाल ने कभी हार का मुंह नहीं देखा. लेकिन खराब सेहत के चलते उन्होंने 2005 का चुनाव नहीं लड़ा और 2014 के चुनाव से पहले उनकी मौत हो गई. 2005 और 2009 में नरेश शर्मा ने यहां पहले निर्दलीय और फिर कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की और चतर सिंह, बिजेंद्र सिंह चातर और मनफूल सिंह के बेटे को हराया.

मोदी लहर में 2014 की जीत भाजपा के ओमप्रकाश धनखड़ की रह. उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी कुलदीप वत्स को पराजित किया . इनेलो ने धीरपाल की पत्नी सुमित्रा को मैदान में उतारा था. लेकिन वे तीसरे स्थान पर रही. कांग्रेस के नरेश शर्मा चौथे पायदान पर रहे. बादली से धीरपाल और ओमप्रकाश धनखड़ मंत्री रहे हैं. तमाम जिंदगी देवीलाल व चौटाला के भरोसेमंद सिपाही रहे धीरपाल 2009 के विधानसभा चुनाव से पहले ही कांग्रेसी हो गए थे.

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