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ऐलनाबाद: इस सीट पर चौधरी देवीलाल के परिवार से जो लड़ा वो जीता

ऐलनाबाद: इस सीट पर चौधरी देवीलाल के परिवार से जो लड़ा वो जीता

किसानों के बड़े नेताओं में गिने जाते थे चौधरी देवीलाल

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सिरसा (Sirsa) ज़िले की ऐलनाबाद विधानसभा (ellenabad assembly) सीट कई मायनों में खास है. यह ही वो सीट है जहां से ओमप्रकाश सिंह चौटाला (omprakash singh chautala) पहली बार विधायक चुनकर विधानसभा में पहुंचे थे. अभय सिंह चौटाला (Abhay singh chautala) भी इस सीट पर कई पारी खेल चुके हैं.

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    नई दिल्ली. सिरसा (Sirsa) ज़िले की ऐलनाबाद विधानसभा (ellenabad assembly) सीट कई मायनों में खास है. यह ही वो सीट है जहां से ओमप्रकाश सिंह चौटाला (om prakash chautala) पहली बार विधायक चुनकर विधानसभा में पहुंचे थे. अभय सिंह चौटाला (Abhay singh chautala) भी इस सीट पर कई पारी खेल चुके हैं. सियासी जानकार बताते हैं कि ऐलनाबाद सीट से चौधरी देवीलाल (Choudhary Devilal) के परिवार या उनसा जुड़ा जो भी व्यक्ति चुनाव लड़ा वो विधायक बनकर सदन में जरूर पहुंचा. यह ही वजह है कि इस सीट पर इनेलो (INLD) का कब्जा बताया जाता है. कहा जाता है कि 1968 और 1991 को छोड़कर यहां सभी चुनावों में इनेलो का ही विधायक बना है.

    अभय और ओमप्रकाश चौटाला से सुर्खियों में आई ऐलनाबाद

    कहा जाता है कि अभय सिंह चौटाला ने पहली जीत रोड़ी विधानसभा सीट से दर्ज कराई थी. लेकिन उसके बाद ऐलनाबाद सीट पर ऐलान देते हुए उन्होंने तीन जीत हासिल की. 2009 में ऐलनाबाद से उपचुनाव जीतकर खाता खोला था. ओमप्रकाश चौटाला ने भी इस सीट पर सियासत की कई पारी खेली हैं. अभय और ओमप्रकाश सिंह चौटाला के चुनाव लड़ने के बाद से ही ऐलनाबाद सीट सुर्खियों में आई थी.

    परिवार के नाम पर 5 बार विधायक बने थे भागीराम

    ऐलनाबाद विधानसभा सीट 1977 में आरक्षित हो गई थी. 2005 तक यह सीट आरक्षित रही. जिसके चलते चौधरी देवीलाल परिवार का कोई सदस्य इस सीट से चुनाव नहीं लड़ सका. लेकिन परिवार के नाम पर लोकदल के बैनर तले भागीराम ने 5 बार इस सीट पर जीत दर्ज कराई. 1977 में भागीराम ने निर्दलीय उम्मीदवार को चुनाव हराया. 1982-87 में दो बार कांग्रेस के उम्मीदवार मनीराम को हराया. लेकिन 1991 में कांग्रेस उम्मीदवार मनीराम ने भागीराम के जीत के सिलसिले को तोड़ दिया. लेकिन 1996 में वापसी करते हुए भागीराम ने 2006 का चुनाव भी जीता.

    2009 में फिर देवीलाल परिवार के खाते में गई सीट

    ऐलनाबाद सीट 2009 में आरक्षित से फिर सामान्य हो गई थी. सीट के सामान्य होते ही ओमप्रकाश सिंह चौटाला ने यहां से चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की. लेकिन इसके साथ ही उन्होंने उचाना से भी चुनाव लड़ा था. इसके चलते 2010 में हुए उपचुनाव में यहां अभय सिंह चौटाला चुनाव लड़ने के लिए खड़े हो गए और जीत भी दर्ज कराई. अभय ने उपचुनाव में कांग्रेस के बेनीवाल को शिकस्त दी थी.

    जब अभय को टक्कर देने के लिए अपना ही आया सामने

    2014 का हरियाणा विधानसभा चुनाव खासा टक्कर देने वाला था. खासतौर से ऐलनाबाद सीट पर. कभी अभय सिंह चौटाला की टीम का हिस्सा रहा पवन बेनीवाल बीजेपी की टिकट पर अभय के सामने आ खड़ा हुआ है. इसी के चलते अभय को जीत हासिल करने के लिए खासे पापड़ बेलने पड़े. अभय को 46.70 % के साथ 11 हजार वोटों से जीत हासिल हुई. जबकि ओमप्रकाश चौटाला ने 2009 में इस सीट पर 51.94 % वोट हासिल किए थे. जबकि कांटे की टक्कर में पवन बेनीवाल को पहले ही चुनाव में 38.91 % वोट मिले. जबकि 2009 में बीजेपी को इस सीट पर सिर्फ 2.91 %  वोट मिले थे.

    Tags: All India Congress Committee, BJP, Haryana Assembly Election 2019, Haryana Assembly Profile, Haryana Election 2019

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