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Haryana Assembly Election Results: क्यों फेल हुआ 'अबकी बार 75 पार' का नारा?

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: October 24, 2019, 4:50 PM IST
Haryana Assembly Election Results: क्यों फेल हुआ 'अबकी बार 75 पार' का नारा?
चौधरी देवीलाल की पहचान एक बड़े किसान नेता की थी

Haryana Poll Results 2019 : ताऊ देवीलाल ने 1977 के चुनाव में 75 सीटें हासिल की थीं, इसी को पार पाने का लक्ष्य अमित शाह ने मनोहरलाल खट्टर को दिया था, लेकिन खट्टर इसमें फेल हो गए हैं.

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  • Last Updated: October 24, 2019, 4:50 PM IST
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नई दिल्ली. हरियाणा में विधानसभा चुनाव की तस्वीर (Haryana Assembly Results 2019) साफ हो चुकी है. मनोहर लाल खट्टर (ML Khattar) को बीजेपी (BJP) अध्यक्ष अमित शाह ने जो टारगेट दिया था उसे वो पूरा नहीं कर पाए. वो भूपिंदर सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Huda) की जाति गणित के जाल में फंस गए. कांग्रेस (Congress) ने जाट, जाटव और मुस्लिम के अपने पारंपरिक गठजोड़ से बीजेपी के 75 प्लस वाले सपनों पर पानी फेर दिया. मनोहरलाल खट्टर ताऊ देवीलाल का यह रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाए. ताऊ ने 1977 के चुनाव में 75 सीटें हासिल की थीं. इसी को पार पाने का लक्ष्य अमित शाह ने मनोहरलाल खट्टर को दिया था.

चौधरी देवीलाल ने कैसे बनाया था रिकॉर्ड
देश में आपातकाल (Emergency) लगाने वाली कांग्रेस नेता इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) के खिलाफ जनवरी 1977 में चार राजनीतिक दलों जनसंघ, कांग्रेस (संगठन), सोशलिस्ट पार्टी (SP) और भारतीय लोक दल (BlD), विद्रोही कांग्रेसियों और कुछ और दलों ने मिलकर जनता पार्टी बनाई. जून 1977 में हरियाणा विधानसभा चुनाव हुए. पार्टी ने जनता में इंदिरा विरोधी लहर को भुनाया और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) का सूपड़ा साफ हो गया. 1972 के चुनाव में 52 सीट जीतने वाली कांग्रेस सिर्फ 3 सीट पर सिमट चुकी थी. जनता पार्टी (Janata Party) ने यहां 90 में से रिकॉर्ड 75 सीटें जीतीं. उस वक्त यहां पर पार्टी के प्रतिनिधि थे चौधरी देवीलाल. यह रिकॉर्ड अब तक हुए 14 चुनावों में आज तक कोई नहीं तोड़ पाया है.

इस वजह से 1977 का रिकॉर्ड नहीं तोड़ सकी बीजेपी!

हरियाणा सैनिकों का प्रदेश है और पार्टी यहां राष्ट्रवाद सिखा रही थी. इसे जनता ने सिरे से खारिज कर दिया. फरसा कांड के बाद प्रदेश में खट्टर की जो छवि बनी उससे पार्टी को नुकसान हुआ. साथ ही टिकट वितरण से फैले असंतोष को पार्टी खत्म नहीं कर सकी. जाटलैंड से लेकर दक्षिण हरियाणा तक पार्टी पूरे चुनाव में आंतरिक कलह से जूझती रही. यही नहीं 2014 से 2019 तक मनोहरलाल खट्टर के खिलाफ बीजेपी विधायक ही तीन बार असंतोष जाहिर कर चुके थे. इधर, चुनाव में जाट, जाटव और मुस्लिम गठजोड़ ने कांग्रेस के पक्ष में जो हवा बनाई उससे खट्टर आलाकमान का दिया टारगेट पूरा नहीं कर पाए.

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हरियाणा में पीएम मोदी के नाम पर ही लड़ा गया चुनाव!  (File Photo)


आपातकाल विरोधी आंदोलन के बड़े नेता थे चौ. देवीलाल
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कैसे भूलें आपातकाल का दंश नामक किताब में डॉ. चंद्र त्रिखा लिखते हैं, "चौधरी देवीलाल आपातकाल विरोधी आंदोलन के क्षेत्रीय आधार स्तंभों में से एक थे. प्रदेश जनसंघ के दिग्गज डॉ. मंगलसेन के साथ उनकी जोड़ी वैसे भी चर्चित रहती थी. डॉ. जय प्रकाश नारायण ने उन दिनों हरियाणा में दो स्थानों पर कुरुक्षेत्र व रोहतक में विशाल रैलियों को संबोधित किया था. इंदिरा गांधी का चुनाव अवैध घोषित होने के तत्काल बाद जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में कांग्रेस (संगठन), भारतीय लोकदल, जनसंघ, अकाली दल और सोशलिस्ट पार्टी सहित विपक्ष की नई दिल्ली में बैठक हुई जिसमें हरियाणा के प्रतिनिधि के रूप में चौधरी देवीलाल ने भाग लिया. 1977 में हरियाणा विधानसभा के लिए चुनाव कराए गए और चौधरी देवीलाल मुख्यमंत्री बने."

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इस भीड़ को बीजेपी वोट में नहीं कन्वर्ट कर पाई  (File Photo)


पार्टी ने इसलिए रखा था इतना बड़ा टारगेट
मई में हुए लोकसभा चुनाव में हरियाणा की सभी 10 सीटें बीजेपी ने जीत ली थीं. लोकसभा चुनाव का विधानसभावार विश्लेषण करने पर पता चला था कि विधानसभा की 89 सीटों पर बीजेपी अन्य पार्टियों से आगे थी. इसी मुगालते में पार्टी ने 75 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रख लिया था. लेकिन जनता ने बता दिया कि लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनावों में उसकी प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं.


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First published: October 24, 2019, 3:16 PM IST
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