NEWS18-IPSOS एग्जिट पोल: हिसार में चौटाला, बिश्नोई के हाथ निराशा, बृजेंद्र सिंह मार रहे बाजी

अब हिसार सीट पर हुए NEWS18-IPSOS एग्जिट पोल के मुताबिक बीजेपी बृजेंद्र सिंह जीतते दिखाई दे रहे हैं. बृजेंद्र सिंह दिग्गज भाजपाई नेता बीरेंद्र सिंह के बेटे हैं.

News18Hindi
Updated: May 21, 2019, 5:34 AM IST
NEWS18-IPSOS एग्जिट पोल: हिसार में चौटाला, बिश्नोई के हाथ निराशा, बृजेंद्र सिंह मार रहे बाजी
बृजेंद्र सिंह दिग्गज भाजपाई नेता बीरेंद्र सिंह के बेटे हैं.
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Updated: May 21, 2019, 5:34 AM IST
हरियाणा की हाईप्रोफाइल हिसार सीट पर इस बार तीन राजनीतिक परिवारों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है. यहां बीजेपी की तरफ बृजेंद्र सिंह, जेजेपी से दुष्यंत चौटाला और कांग्रेस से भव्य बिश्नोई के बीच मुकाबला है. हरियाणा की इस सीट पर मतदान छठवें चरण में 12 मई को सम्पन्न हुए थे. अब हिसार सीट पर हुए NEWS18-IPSOS एग्जिट पोल के मुताबिक बीजेपी बृजेंद्र सिंह जीतते दिखाई दे रहे हैं. बृजेंद्र सिंह दिग्गज भाजपाई नेता बीरेंद्र सिंह के बेटे हैं. इस सीट से 2014 में दुष्यंत चौटाला सांसद बने थे.

तीन राजनीतिक परिवारों की जंग


हिसार लोकसभा सीट हरियाणा की सबसे हॉट सीट मानी जाती है, क्योंकि यहां मुकाबला दिग्गजों के बीच ही होता रहा है. हिसार के नतीजे भी बेहद रोमांचित करने वाले होते हैं. इस बार यहां नेताओं के बेटों ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है. हिसार सीट पर इस बार बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह, जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के नेता अजय चौटाला के बेटे दुष्यंत चौटाला और कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य विश्नोई के बीच कड़ी टक्कर है. दुष्यंत चौटाला पूर्व उप प्रधानमंत्री देवी लाल के बड़े पोते और हिसार से सांसद हैं.

भजन लाल परिवार का गढ़

हिसार भजनलाल परिवार का गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन पिछली बार चौटाला परिवार ने भजनलाल परिवार के गढ़ में सेंध लगा दी थी. यहां पर चौटाला परिवार और भजनलाल परिवार के बीच दिलचस्प जंग होती रही है. लिहाजा इस सीट पर पूरे प्रदेश की नजर रहती है.

2014 के नतीजे
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भी चौटाला परिवार और भजनलाल परिवार आमने-सामने था. इस चुनाव में इनेलो के दुष्यंत चौटाला को 4,94,478 और हजकां के कुलदीप बिश्नोई को 4,62,631 वोट मिले थे. हालांकि इस चुनाव से पहले हिसार का राजनीतिक रुख भजनलाल परिवार अपनी ओर ही मोड़ता रहा है.
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सीट का राजनीतिक इतिहास
इस सीट पर पहली दफे 1952 में हुए चुनाव में कांग्रेस के लाला अचित राम विजयी हुए थे. फिर 1957 में कांग्रेस के पंडित ठाकुर दास भार्गव जीते. 1962 में यहां समाजवाद का सिक्का चला और समाजवादी नेता मनीराम बागड़ी संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर जीते. 1967, 1971 में लगातार दो बार इस पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया तो 1977 के चुनाव में जनता दल के इंदर सिंह जीते. 1980 में यहां फिर मनीराम बागड़ी जीते. 1984 में कांग्रेस की लहर में चौधरी बीरेंद्र सिंह सांसद बने. फिर 1989 में जनता दल के जय प्रकाश. 1991 के चुनाव में यहां से कांग्रेस के नारायण सिंह ने बाजी मारी. फिर 1996 का चुनाव जय प्रकाश ने हरियाणा विकास पार्टी के टिकट पर जीता. 1998 का चुनाव हरियाणा लोकदल के टिकट पर सुरेंद्र सिंह बरवाला जीते तो 1999 में उन्होंने पार्टी बदलकर फिर यहां से जीत हासिल की. 2004 में जय प्रकाश कांग्रेस के टिकट पर जीते. 2009 में हरियाणा जनहित कांग्रेस के भजनलाल यहां से जीतकर संसद पहुंचे तो 2011 के उपचुनाव में इस सीट पर कुलदीप बिश्नोई ने कब्जा जमाया. 2014 में दुष्यंत चौटाला जीते थे जो इस बार चुनाव मैदान में हैं.

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जब भिड़े दो पूर्व सीएम के बेटे
चौधरी भजनलाल के निधन के बाद साल 2011 में हुए उप-चुनाव में इस सीट पर दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों के बीच मुकाबला हुआ था. उस वक्त एक तरफ थे पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी ओमप्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला, तो दूसरी ओर थे पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल के छोटे बेटे कुलदीप बिश्नोई. इस मुकाबले में अजय चौटाला की हार हुई थी. उप-चुनाव में हजकां के कुलदीप बिश्नोई को 3,55,955 वोट जबकि इनेलो के अजय चौटाला को 3,49,618 वोट मिले थे. 2009 का राजनीतिक अतीत खंगालें तो ये सियासी लड़ाई भी बेहद दिलचस्प रही थी जिसमें कई बार मुख्यमंत्री रहे चौधरी भजनलाल को सात हजार से भी कम वोटों से जीत हासिल हुई. इस चुनाव में भजनलाल को 2,48,476 और संपत सिंह को 2,41,493 वोट मिले थे.

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