जल संकट से निपटने के लिए हरियाणा ने उठाया बड़ा कदम, इस नीति की संसद में हुई तारीफ!

जल संकट से निपटने के लिए हरियाणा सरकार ने धान की खेती को डिस्करेज करने का फैसला किया है. धान की फसल छोड़ने वालों को सरकार पैसा दे रही है

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: July 26, 2019, 10:12 AM IST
जल संकट से निपटने के लिए हरियाणा ने उठाया बड़ा कदम, इस नीति की संसद में हुई तारीफ!
जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने संसद में पानी बचाने की अपील की
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: July 26, 2019, 10:12 AM IST
हरियाणा पहला ऐसा राज्य है जिसने सबसे पहले जल संकट की गंभीरता को देखते हुए धान की खेती को डिस्करेज करने का का फैसला लिया है. इसके लिए किसानों को विश्वास में लिया जा रहा है. इसके लिए एक स्कीम बनाई गई है. सरकार की इसी पहल का केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में तारीफ की. उन्होंने कहा कि एक किलो चावल पैदा करने में पांच हजार लीटर से अधिक पानी की खपत होती है.

उम्मीद जाहिर की कि ऐसी स्कीम जल संकट का सामना कर रहे दूसरे राज्य भी बना सकते हैं. दरअसल, केंद्रीय भूजल बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा में तेजी से भूजल स्तर गिर रहा है. प्रदेश के 76 फीसदी हिस्से में भूजल स्तर बहुत तेजी से गिरा है. हरियाणा, पंजाब व राजस्थान में भूजल स्तर 300 मीटर तक पहुंचने का अंदेशा है. पिछले दिनों नीति आयोग ने जल संकट के लिए धान और गन्ने की फसल को भी जिम्मेदार ठहराया था.

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धान की फसल में होती है ज्यादा पानी की जरूरत


ऐसे में मनोहर लाल खट्टर सरकार ने भूजल स्तर गिरने से रोकने के लिए योजना तैयार की. इसके तहत धान को छोड़कर कम पानी की खपत वाली फसलें उगाने वाले किसानों को सरकार नगद सहायता दे रही है. धान के बदले सरकार मक्का, दलहन व तिलहन पर जोर दे रही है. चूंकि बासमती चावल हरियाणा की स्ट्रेंथ और पहचान है इसलिए सरकार गैर बासमती धान को ही डिस्करेज करना चाहती है. दरअसल, हरियाणा सरकार ऐसा करने के लिए इसलिए मजबूर हुई है क्योंकि ज्यादा जल दोहन की वजह से यहां के नौ जिले डार्क जोन में शामिल हो गए हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक 80 फीसदी पानी का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में होता है.

इन ब्लाकों में शुरू हुई योजना

पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पहले चरण में यह योजना प्रदेश के सात जिलों के सात ब्लाकों में लागू की गई है. इनमें यमुनानगर का रादौर, सोनीपत का गन्नौर, करनाल का असंध, कुरुक्षेत्र का थानेसर, अंबाला का अंबाला-1, कैथल का पूंडरी और जींद का नरवाना ब्लॉक शामिल है. इन सात ब्लॉकों में 1,95,357 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल होती है, जिसमें से 87,900 हेक्टेयर में गैर बासमती धान होता है. कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि 1970 के दशक में मक्का और दलहन हरियाणा की प्रमुख फसलें होती थीं, जिनकी जगह अब धान ने ले लिया है.

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जल शक्ति मंत्री ने संसद में की पानी बचाने की अपील

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किसानों को ऐसे करेंगे प्रेरित

-इन सात ब्लॉकों में धान के बदले मक्का, दलहन, तिलहन के इच्छुक किसानों का कृषि विभाग के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन किया जाएगा. इच्छुक किसानों को मुफ्त में बीज उपलब्ध करवाया जाएगा. जिसकी कीमत 1200 से 2000 रुपये प्रति एकड़ होगी.

-प्रति एकड़ 2000 रुपये की आर्थिक मदद की जाएगी. यह पैसा दो चरणों में मिलेगा. इसमें 200 रुपए तो पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के समय और शेष 1800 रुपए बिजाई किए गए क्षेत्र के वेरीफिकेशन के बाद किसान के बैंक खाते डाले जाएंगे.

-धान की जगह मक्का और अरहर उगाने पर फसल बीमा करवाएंगे. 766 रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से प्रीमियम भी हरियाणा सरकार देगी. मक्का और अरहर तैयार होने पर हैफेड व खाद्य एवं आपूर्ति विभाग उसे न्यूनतम समर्थन मूल्य की दर से खरीदेंगे.

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First published: July 26, 2019, 10:00 AM IST
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