असपाम फाउंडेशन की ये घोषणा बेटियों के लिए साबित होगी वरदान
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असपाम फाउंडेशन की ये घोषणा बेटियों के लिए साबित होगी वरदान
Photo- Pradesh18.com/ETV

पैसे की तंगी में शिक्षा को अधूरा छोड़ने पर प्रदेश की बेटियां नहीं होगी विवश और ना ही बेटियों को बोझ समझकर कोई अभिभावक कोख में ही करवायेगा बेटी का कत्ल.

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पैसे की तंगी में शिक्षा को अधूरा छोड़ने पर प्रदेश की बेटियां अब विवश नहीं होगी और ना ही बेटियों को बोझ समझकर कोई अभिभावक कोख में ही बेटी का कत्ल करावएगा. असपाम फाउंडेशन की नई घोषणा बेटियों के लिए वरदान साबित होगी.


असपाम फाउंडेशन द्वारा सेक्टर 16 में संचालित रेशमा देवी गोयल अस्पताल में जन्म लेने वाली एक लाख लड़कियों का खर्चा वहन करने की घोषणा की गई है. गुरु पूर्णिमा के दिन फाउंडेशन के चैयरमेन सुधीर गोयल अपने गुरु महर्षि गुरुवानंद के पास गए. वहीं महर्षि गुरुवानंद ने दक्षिणा के रुप में लड़कियों को फ्री शिक्षा का बीड़ा उठाने की जिम्मेवारी मांगी. जिसे सुधीर गोयल ने सहर्ष मान लिया.





संस्था के अस्पताल को संभाल रही डा. दीपिका नागपाल ने बताया कि असपाम फाउंडेशन लड़कियों के प्रति समाज के नजरियें को बदलने के लिए काम करने में लगी हुई है. उन्होंने बताया कि इसी कड़ी में गुरुदेव और दादी रानी के आदेश के अनुसार अस्पताल प्रशासन ने निर्णय लिया गया है कि यहां पर जो भी बच्ची जन्म लेगी उसकी पढ़ाई का सारा खर्च असपाम फाउंडेशन उठायेगा.





डॉ. दीपिका
डॉ. दीपिका



डॉ. दीपिका नगपाल के अनुसार नर्सरी कलास ले कर जहां तर बच्ची पढ़ाना चाहेगी और जहां भी पढ़ना चाहेगी उसका पूरा खर्च फाउंडेशन द्वारा वहन किया जायेगा.


अस्पताल की महिला चिकित्सक डा. नेहा गुप्ता ने बताया कि उनके अस्पताल में गुरु पूर्णिमा के अगले ही संजू नामक युवती के बेटी पैदा हुई. उसकी बेटी फाउंडेशन की योजना से लाभ लेने वाली पहली बच्ची बनी है.



डॉ. नेहा गुप्ता
डॉ. नेहा गुप्ता



उन्होंने बताया कि समाज में आज भी लड़कियों के जन्म होने पर अभिभावक ज्यादा खुश नहीं होते. विशेषतौर पर दूसरी बच्ची होने पर अभिभावक बिल्कुल मायूस हो जाते है. ऐसे में फाउंडेशन की यह स्कीम बेटियों के जीवन में खुशी भरने में एक क्रांतिकारी कदम होगा.


वहीं अस्पताल में योजना लागू होने के बाद पहली बच्ची के जन्म लेने पर बच्ची के अभिभावक अपने बेटी को काफी लक्की मान रहे है. बच्ची की दादी का कहना है कि उसकी पोती अपने जन्म के साथ ही एक लाख बच्चियों का भाग्य लिखवाकर लाई है.



बच्ची की दादी
बच्ची की दादी



वहीं बच्ची के पिता का कहना है कि उसकी भाग्यशाली बेटी को पढ़ाकर वह अफसर बनायेगा. वहीं बच्ची का मां भी अपनी बेटी को दुनियां की सबसे भाग्यशाली बच्ची बता रही है.



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बच्ची की मां



असपाम फाउडेशन की स्कीम का फायदा गरीब तबके की लड़कियों को ज्यादा मिलेगा. आज भी बहुत सी बेटियां ऐसी है जो पैसों के अभाव में अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाती. परिजन गरीबी के चलते 10वीं तक पढ़ाकर आगे मजदूरी में लगा देते है.


इन लड़कियों की आंखों के सपने गरीबी के दलदल में घुट कर दम तोड़ देते है लेकिन असपाम फाउडेशन की योजना के बाद इतना तय है कि हिसार और आसपास के क्षेत्र में आगे शायद ही कोई लड़की शिक्षा के बिना रह सके.

First published: July 29, 2016, 7:12 PM IST
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