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इलाज न मिलने से कोरोना मरीज की मौत, न्याय के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा बेटा

सीएम विंडो की शिकायत की जांच करने के लिए मीटिंग बुलाई.
सीएम विंडो की शिकायत की जांच करने के लिए मीटिंग बुलाई.

स्वास्थ्य विभाग (Health Deparment) की ढुलमुल चल रही जांच से पीड़ित बेटा असंतुष्ट है.

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हिसार. समय पर मिला न्याय पीड़ित के दर्द पर मरहम का काम करता है, लेकिन न्याय समय पर ना मिले तो पीड़ित का सरकारी सिस्टम से भरोसा उठने लगता है. हांसी सिविल अस्पताल (Civil Hospital) में कोरोना मरीज (Corona Patient) की इलाज ना मिलने के कारण हुई मौत के मामले में करीब दो महीने बीत जाने के बाद भी जांच पूरी मुकम्मल नहीं हो पाई है. सरकारी डॉक्टरों की लापरवाही के कारण अपने पिता को खोने वाला बेटा न्याय के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है.

वहीं, सिविल अस्पताल प्रशासन ने मंगलवार को फिर से सीएम विंडो की शिकायत की जांच करने के लिए मीटिंग बुलाई. इस बार घटना वाले दिन आइसोलेशन वार्ड में तैनात डॉक्टर, नर्स सहित मामले से जुड़े तमाम कर्मचारियों को तलब किया गया. करीब तीन घंटे तक स्टाफ सदस्यों के बयान दर्ज किए गए. तीन बजे के बाद भी कुछ स्टाफ सदस्यों के बयान पूरे नहीं हो पाए तो अब अगले हफ्ते फिर जांच के लिए मीटिंग बुलाई जाएगी.

मंगलवार को मीटिंग में डॉ पल्लवी, डॉ मीनू, डॉ ज्योति कपूर, डॉ रशीद, डॉ संदीप बूरा, कविता नर्सिंग सिस्टर, हेलसन स्टाफ नर्स, सुशील मोर एसटीएस, सुमन सुपर्वाइजर, अनिल कुमार एलटी को उपस्थित होने के आदेश दिए गए थे. स्वास्थ्य विभाग की ढुलमुल चल रही जांच से पीड़ित बेटा असंतुष्ट है. इससे पूर्व अस्पताल प्रशासन ने घटना वाले दिन आइसोलेशन वार्ड में तैनात सुरक्षा गार्ड को हटा दिया था, जिसके बाद सुरक्षा कर्मी ने लेबर कोर्ट ने जाने का दावा किया है. अब सवाल ये उठता है कि आखिर डेढ़ महीने बाद भी सिविल अस्पताल प्रशासन ये तय नहीं कर पाया है कि लापरवाही किस स्तर पर बरती गई है.



तमाम सुविधाओं के बावजूद लापरवाही
हांसी सिविल अस्पताल में एसएमओ द्वारा कोरोना वायरस को लेकर जारी तमाम तरह के प्रबंध अस्पताल में कर रखे हैं. आइसोलेशन वार्ड से लेकर सैंपलिंग के अलग से इंतजाम हैं. इसके बावजूद निचले स्तर पर डाक्टरों की लापरवाही के कारण कोरोना मरीज की मौत हो गई. माना जा रहा है कि निचले स्तर पर लापरवाही के कारण ये घटना हुई और आइसोलेशन वार्ड की इंचार्ज डाक्टर पर मामले में गाज गिर सकती है.
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