हिसार: पराली जलाने वाली जमीन को चिह्नित करने पहुंचे दो पटवारियों को किसानों ने बनाया बंधक

किसानों को समझाते हुए अधिकारी
किसानों को समझाते हुए अधिकारी

एसडीम (SDM) के आश्वासन के बाद ही ग्रामीणों (Villagers) ने बंधक कर्मचारियों को प्रशासन के हवाले कर दिया.

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हिसार. नारनौंद के गांव मिलकपुर में पराली में आग लगाने को लेकर गांव में जुर्माना वसूलने पहुंचे सरकारी विभाग के कर्मचारियों को किसानों (Farmers) ने बंधक बना लिया. मौके पर विभाग के उच्च अधिकारी पहुंचे और ग्रामीणों (Villagers) को आश्वासन दिया कि भविष्य में उनके साथ कुछ गलत नहीं होने दिया जाएगा. उसके बाद ही ग्रामीणों ने बंधकों को छोड़ा मौके पर भारी पुलिस बल भी तैनात थी.

गांव मिलकपुर के दो किसानों ने करीब 15 दिन पहले पराली में आग लगा दी थी. सेटेलाइट से सूचना मिलने पर कृषि विभाग के अधिकारी गांव में पहुंचे और किसानों ने आरोप लगाया की उनसे  पैसे वसूल लिए और उनकी रसीद भी नहीं दी. बुधवार को  विभाग के पटवारी व कृषि विभाग से कर्मचारी गांव मिल्कपुर के खेतों में पहुंचे और किसानों को कहा कि आप लोगों ने धान की पराली को आग लगाई है. इस का जुर्माना भरना होगा.

किसान ने मामला रफा-दफा करने की बात कही और कर्मचारियों को अपने घर पर ले आया और किसान ने इसकी सूचना किसान यूनियन के पदाधिकारियों को दे दी. कुछ देर बाद भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष विजेंद्र बिल्लू सहित सैकड़ों यूनियन के सदस्य गांव में पहुंच गए और कर्मचारियों को बंधक बना लिया और उच्च अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग रखी. कुछ ही देर बाद उपमंडल अधिकारी विकास यादव व डीएसपी विनोद शंकर भारी पुलिस बल के साथ गांव में पहुंचे और किसानों से बातचीत की.



किसानों ने लगाए आरोप
किसानों ने आरोप लगाया कि काफी कर्मचारी किसानों पर पराली में आग लगाने को लेकर पैसा वसूली का काम करने में जुटे हुए हैं. इन पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए. एसडीएम ने आश्वासन दिया कि भविष्य में किसानों से कोई भी कर्मचारी बिना रसीद के पैसा नहीं वसूल करेगा. अगर कोई कर्मचारी बिना रसीद के पैसे लेकर जाता है तो उसकी शिकायत करें उस कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

एसडीएम के आश्वासन के बाद छोड़ा

एसडीम के आश्वासन के बाद ही ग्रामीणों ने बंधक कर्मचारियों को प्रशासन के हवाले कर दिया. उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन ने इस मामले में किसी भी ग्रामीण पर कोई केस दर्ज किया तो भविष्य में फिर उनको गांव में घुसने नहीं दिया जाएगा और सरकार के खिलाफ किसान यूनियन आंदोलन करेगी.
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