प्रदेश 18 विशेष: बेटी बचाओ अभियान का आगाज करने वाले हरियाणा में होते हैं सबसे ज्यादा गैंगरेप
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभियान बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का आगाज करने वाले राज्य हरियाणा में ही महिलाओं की आबरू सुरक्षित नहीं है.नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आकड़े खुद इसकी गवाही देते हैं.

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  • Last Updated: October 10, 2016, 6:12 PM IST
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नरेंद्र मोदी सरकार के अभियान 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' का आगाज करने वाले राज्य हरियाणा में ही महिलाओं की आबरू सुरक्षित नहीं है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े खुद इसकी गवाही दे रहे हैं.

सबसे अधिक गैंगरेप यूपी में 459, राजस्थान में 412 और मध्यप्रदेश में 271 हुए हैं. लेकिन ये तीनों राज्य क्षेत्रफल और जनसंख्या में हरियाणा से काफी बड़े है. छोटे क्षेत्रफल और कम जनसंख्या होने के बाद भी गैंगरेप की सूची में हरियाणा देश में चौथे नंबर पर आता है.

एनसीआरबी के अनुसार जनसंख्या के हिसाब से देखा जाए तो हरियाणा में औसतन सबसे अधिक गैंगरेप हो रहे हैं. जो कि बेहद शर्मनाक है.









हरियाणा में बेटियों को बचाने के लिए केंद्र सरकार कई तरह की मुहिम चला रखी है लेकिन इसके बावजूद लोगों में जागरुकता देखने को नहीं मिल रहे हैं. ज्ञात हो कि पानीपत में 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री ने इस योजना की शुरुआत की थी.

 

आज भी महिलाओं के साथ रेप, गैंगरेप, छेड़छाड़ और मारपीट के मामले सामने आ रहे हैं. एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट इसका जीता जागता उदाहरण है कि हरियाणा में लोग महिलाओं का कितना सम्मान करते हैं.

2015 में 204 मासूमों के साथ हुआ गैंगरेप

हरियाणा में 2015 में 204 मासूमों के साथ गैंगरेप हुआ. इस भयानक तस्वीर को देख प्रदेश में 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान के साथ-साथ बेटों पर अंकुश लगाने की जरूरत है जो कि इस घिनौने अपराध को अंजाम देते हैं.

गैंगरेप पीड़िताओं को घृणा की नजर से देखता है समाज

गैंगरेप एक ऐसा भयानक कृत्य जो पीड़िता को तिल-तिल करके मारता है. परिवार और समाज के लोग पीड़िता को घृणा की नजर से देखते हैं. उससे कोई भी संबंध नहीं रखना चाहता. आमजन का नजरिया उसके प्रति ऐसा हो जाता है जैसे सारा कसूर उसी का था.

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सरकार भी दिखावे की मदद करती है. मीडिया में इसे कांड का नाम देकर उछाला जाता है. पीड़िता का जीवन नरकीय बन जाता है. कोई योग्य लड़का उससे शादी नहीं करना चाहता. अदालतों में न्याय के लिए सालों चक्कर लगाने पड़ते है.

आखिर क्यों न्याय व्यवस्था में तेजी नहीं आती. वहशी दरिंदे जेल से सजा काट कर बाहर आ जाते हैं लेकिन पीड़िता मरते दम तक बेकसूर होकर भी सामाजिक और पारिवारिक दंश झेलने को मजबूर रहती हैं.

हरियाणा में डीएनए टेस्ट करने वाली सिर्फ एक मशीन

अदालतों में न्याय मिलने में देरी का सवाल उठा तो वकीलों ने इस हकीकत से भी पर्दा उठाया. वकीलों का कहना है कि देरी अदालतों में नहीं होती बल्कि प्रदेश की व्यवस्था के चलते होती है.

हरियाणा में रेप या गैंगरेप के स्थिती में डीएनए टेस्ट होने के लिए सिर्फ एक लैब मधुबन में है. वहां से रिपोर्ट आने में देरी होती है.

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युवाओं को रोजगार देकर कम किया जा सकता है गैंगरेप की घटना

इस शर्मनाक स्थिती से प्रदेशवासियों का सिर भी लज्जा से झुका है. लोगों का मानना है कि रेप या गैंगरेप के लिए कानून नहीं सरकार को शिक्षा व्यवस्था में सुधार करना होगा. नैतिकता को शिक्षा में शामिल कर युवाओं को रोजगार देने की भी व्यवस्था करनी होगी.

पूरी तरह से लागू नहीं हुई जस्टिस वर्मा कमेटी की रिपोर्ट 

जनवादी महिला समिति की सदस्य शीला का कहना है कि सरकार ने वर्षों बीत जाने के बाद भी जस्टिस वर्मा कमेटी की रिपोर्ट को पूरी तरह से लागू नहीं किया है. मुरथल मामले में देरी चिंताजनक है सरकार सीधे तौर पर अपराधी का समर्थन कर रही है.

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लड़कों को भी संस्कारी बनाना होगा

हिसार की महिला एवं बाल विकास अधिकारी डा.पूनम रमन का कहना है कि  इज्जत का टोकरा केवल लड़कियों के सिर पर रखने के स्थान समाज को लड़कों को भी संस्कारी बनाना होगा. लड़कों पर अभिभावकों को ज्यादा ध्यान देते हुए उन्हें संस्कारवान बनाना होगा तभी समस्या से निजात मिलेगी.

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हिसार थाना की महिला अफसर सरोज कहती हैं कि पुलिस के पास जांच अधिकारियों की संख्या काफी कम है. ऐसे में पुलिस तहकीकात और रिपोर्ट में काफी देरी हो जाती है. इस देरी के चलते अदालतों का काम प्रभावित होता है और पीड़िता को न्याय मिलने में समय लगता है.

बीते कई सालों से शिक्षा से नैतिकता गायब है. भाजपा सरकार फिर से शिक्षा को संस्कारवान और नैतिकता आधारित करने में लगी है. शिक्षा में सुधार के बाद निश्चित ही इन घृणित कृत्यों में कमी आएगी.
गायत्री यादव, भाजपा नेत्री



ऐसे कृत्य करने वाले पुरुष मानसिक रुप से विक्षप्त होते हैं. उनके आसपास के माहौल में महिलाओं को हीन समझा जाता है.

इनका नजरियां महिलाओं के प्रति नकारात्मक होता है. ऐसे में परिवार से ही लड़कों को महिलाओं का सम्मान करना सिखाया जाए. मौलिक शिक्षा लड़कों को दी जाए. गैंगरेप पीड़िता मानसिक रुप से टूट जाती है. उनकी सकारात्मक क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है. ऐसे माहौल से निकालने के लिए समाज और सरकार को पीड़िता का साथ देना चाहिए.

पीड़िता को कुकृत्य के लिए दोषी न मानते हुए उसे आगे बढ़ने की शक्ति देनी होगी. सरकार को पीड़िता के रोजगार का प्रबंध करना चाहिए-ताकि वो घर में खाली बैठकर नकारात्मक विचारों से घिरे रहने की जगह रचानात्मकता में अपना ध्यान लगा सके.
डा.ज्योत्सना बिश्नोई


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हरियाणा में तेजी से बढ़ते गैंगरेप मामलों पर जब खट्टर कैबिनेट के मंत्री कैप्टन अभिमन्यु से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.
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