हरियाणा में मौसम: अगस्त में अबतक सामान्य से 52 फीसदी कम बरसात, किसानों की बढ़ सकती है परेशानी
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हरियाणा में मौसम: अगस्त में अबतक सामान्य से 52 फीसदी कम बरसात, किसानों की बढ़ सकती है परेशानी
हरियाणा के कई जिलों में मानसून मेहरबान

करनाल, कैथल और कुरुक्षेत्र पर मॉनसून (Monsoon) मेहरबान रहा. 12 अगस्त तक करनाल में 520, कुरुक्षेत्र में 447, कैथल में 408 एमएम बरसात (Rain) हुई.

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  • Last Updated: August 13, 2020, 8:36 AM IST
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हिसार. हरियाणा में इस बार अगस्त महीने में लोगों को उमस भरी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है. इसका कारण है सामान्य से कम बरसात (Rain) होना. प्रदेश में अबतक अगस्त महीने में सामान्य से 52 फीसदी कम बरसात हुई है, जिससे किसानों (Farmers) के चेहरों पर चिंता की लकीरें हैं. कम बारिश के कारण खरीफ सीजन में फसलों की बिजाई भी पिछले साल के मुकाबले 20 हजार एकड़ तक पिछड़ गई है.

पिछले साल अब तक 28.55 लाख हेक्टेयर में खरीफ बिजाई हो गई थी, जबकि इस बार यह आंकड़ा 28.47 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा है. यही हालात रहे तो धान सहित अन्य फसलों के लिए परेशानी बढ़ सकती है. क्योंकि इन दिनों में उमस अधिक है और फसलों को पानी की जरूरत होती है.

अगले तीन दिन बरसात की उम्मीद



मौसम वैज्ञानिकों ने कहा कि तीन दिनों में और बरसात हो सकती है, इससे बरसात की काफी हद तक कमी दूर हो सकती है। कहीं-कहीं भारी बरसात भी होने की संभावना है. वहीं मानसून सीजन यानी एक जून से 12 अगस्त तक करनाल में 520 एमएम बरसात हुई है जो सामान्य से 59 फीसदी अधिक है. कुरुक्षेत्र में 447 एमएम 40 फीसदी अधिक और कैथल में 408 एमएम यानी 86 फीसदी अधिक बरसात हुई है. अबकी बार प्रदेश में 30.56 लाख हेक्टेयर में फसलों की बिजाई खरीफ सीजन में होनी है, इसमें से 28.47 लाख हेक्टेयर में बिजाई हो चुकी है जो लक्ष्य का करीब 93 फीसदी है.
तीन जिलों में सामान्य से अधिक बरसात

अगस्त में प्रदेश में नौ जिलों में कम, एक में बहुत कम, सात जिलों में सामान्य, तीन जिलों में सामान्य से अधिक और एक जिले में बहुत अधिक बरसात हुई है. इसका सबसे बड़ा कारण एंटी साइक्लोन लगातार बनना है, मानसून की सक्रियता अब फिर से बढ़ी तो ही किसानों को राहत मिल सकती है. इससे भू-जल स्तर भी बढ़ेगा, प्रदेश में औसतन भू-जल 21 मीटर तक नीचे जा चुका है.
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