Kisan Aandolan: हिसार में गुस्साए ग्रामीणों ने लौटाया डिप्‍टी सीएम दुष्‍यंत चौटाला का भिजवाया पानी का टैंकर

पानी का टैंकर वापिस लौटाने पहुंचे किसान

पानी का टैंकर वापिस लौटाने पहुंचे किसान

Kisan Aandolan: डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने 1 अप्रैल को 45 गांवों में पानी की समुचित व्यवस्था के लिए एक-एक पानी का टैंकर भेंट किया था. लेकिन गांव वालों ने उस भेंट को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि कृषि कानूनों का समर्थन करने वाले की कोई भेंट स्वीकार नहीं कर सकते.

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हिसार. किसान आंदोलन पर अडिग गांव बधावड़ के किसानों की एक ही मांग है कि किसानों को बर्बाद करने और खेती को उजाड़ने वाले कृषि कानून वापस लिए जाने चाहिए. इन किसानों ने बिल का समर्थन करने वाले राज्य के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को करारा जवाब दिया है. गुस्साए ग्रामीणों ने दुष्यंत चौटाला द्वारा कई गांवों में भिजवाए गए पानी के टैंकरों को वापस कर दिया. इसके लिए बधावड़ गांव निवासी काफी ग्रामीण आज हिसार में लघु सचिवालय पहुंचे. यहां उन्होंने कुछ दिन पहले उप मुख्यमंत्री चौटाला द्वारा कई गांवों को भेंट किये गये पानी के टैंकर को वापिस कर दिया.

चौटाला ने 1 अप्रैल को 45 गांवों में पानी की समुचित व्यवस्था के लिए एक-एक पानी का टैंकर भेंट किया था. ये हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड ने सोशल रिस्पोंस्बिलिटी के तहत भेंट किये थे. अगले ही दिन बधावड़ गांव वालों ने इस टैंकर को नहीं रखने का फैसला किया था. मगर तीन दिन तक पानी के टैंकरों को लौटाने का खेल चलता रहा. एक दिन तो टैंकर गायब ही हो गया. आखिरकार सोमवार को ग्रामीणों ने टैंकर ढूंढकर लघु सचिवालय पहुंचा दिया और इसे गांव में रखने से इंकार कर दिया. ग्रामीणों का कहना है कि वो सरकार की तरफ से दी गई भेंट स्वीकार नहीं करेंगे. साथ ही उन्होंने दूसरे गांवों से भी अपील की है कि वो वाटर टैंकर लौटाकर किसान आंदोलन का समर्थन करें.

डिप्टी सीएम की भेंट ठुकराई

इससे पहले रविवार को पंचायत में सर्वसम्मति से जिला उपायुक्त हिसार के नाम एक पत्र लिखा गया. जिसमें डिप्टी सीएम द्वारा दी गई वाटर टैंकर की भेंट को अस्वीकार कर दिया गया. समस्त ग्रामीणों की ओर से लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि “पंचायत ने यह सामूहिक फैसला लिया है कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के विरोध में वह डिप्टी सीएम द्वारा दी गई भेंट को अस्वीकार करते हैं और जिला उपायुक्त के माध्यम से ही वह इसे वापस लौटाते हैं.” ग्रामीणों ने सरकार से यह भी अपील की कि खेती को उजाड़ने वाले तीनों कानूनों को वापस लिया जाए तथा एमएसपी गारंटी का कानून बनाया जाए.

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