कभी जूनियर इंजीनियर था रामपाल, खुद को बताता था संत कबीर का अवतार

सोनीपत की गोहाना तहसील के धनाणा गांव में 8 सितंबर 1951 को जन्मा रामपाल दास हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर की नौकरी किया करता था.

Rahul Mahajan | News18Hindi
Updated: October 11, 2018, 2:13 PM IST
कभी जूनियर इंजीनियर था रामपाल, खुद को बताता था संत कबीर का अवतार
संत रामपाल (फाइल फोटो)
Rahul Mahajan | News18Hindi
Updated: October 11, 2018, 2:13 PM IST
ख़ुद को संत कबीर का अवतार और भगवान घोषित करने वाले रामपाल की कहानी हिंदी फिल्मों के किसी किरदार से कम नहीं. वो अपने समर्थकों के लिए आज भी नायक है और विरोधियों के लिए खलनायक. लेकिन कानून की नज़र में वो सिर्फ और सिर्फ एक दोषी है और इसी के चलते कोर्ट ने रामपाल को हत्या के दोनों मामलों में दोषी करार दिया है. रामपाल की कहानी सरकारी नौकरी से शुरू हुई और वो संत बन गया और खुद को भगवान समझने लगा.

सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनाथ था रामपाल
सोनीपत की गोहाना तहसील के धनाणा गांव में 8 सितंबर 1951 को जन्मा रामपाल दास हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर की नौकरी किया करता था. इसी दौरान उसकी मुलाकात कबीरपंथी स्वामी रामदेवानंद महाराज से हुई. रामपाल उनका शिष्य बना और नौकरी के दौरान ही सत्संग करने लगा. देखते-देखते उसके अनुयायियों की संख्या बढ़ने लगी.



1999 में रामपाल ने करवाया सतलोक आश्रम का निर्माण
1999 में हिसार के पास बरवाला के करौंथा गांव में उसने सतलोक आश्रम का निर्माण किया. आश्रम बनाने के लिए उसे जमीन कमला देवी नाम की महिला ने दे दी. सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन कुछ सालों बाद आसपास के गांव के लोगों ने रामपाल के प्रवचनों का विरोध करना शुरू कर दिया. विरोध करने वालों में ज्यादातर लोग आर्यसमाज के थे.

रामपाल की एक टिप्पणी से आर्यसमाज समर्थक हो गए थे नाराज
2006 में रामपाल ने आर्यसमाज के संस्थापक स्वामी दयानंद की किताब को लेकर टिप्पणी की जिससे आर्यसमाज के समर्थक बेहद नाराज हो गए. इसके बाद आर्यसमाज और रामपाल के समर्थकों के बीच हिंसक झड़प हुई और हालात काबू से बाहर हो गए. इस हिंसा में एक महिला की मौत हो गई.

पुलिस ने रामपाल को हिरासत में लिया
पुलिस ने रामपाल को हत्या के मामले में हिरासत में लिया जिसके बाद रामपाल को करीब 22 महीने जेल में काटने पड़े. लेकिन 30 अप्रैल 2008 को वह जमानत पर रिहा हो गया. 2009 में रामपाल को आश्रम वापस मिल गया जिसके खिलाफ आर्यसमाज के समर्थकों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया मगर कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी.

हिसार अदालत में रामपाल के समर्थकों ने मचाया हुड़दंग
अगस्त 2014 में हिसार ज़िला अदालत में उसके समर्थकों ने हुड़दंग मचाया था जिसके बाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए उसे अदालत में पेश होने को कहा. रामपाल मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट में पेश नहीं हुआ जिसके बाद हाई कोर्ट ने उसकी गिरफ्तारी के आदेश दे दिए.

12 दिनों की मशक्कत के बाद रामपाल को किया गया गिरफ्तार
पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों ने 12 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद उसे गिरफ्तार किया. पुलिस और रामपाल के समर्थकों के बीच हुई इस हिंसक झड़प में करीब 120 लोग घायल हो गए थे, जिनमें कई पुलिसकर्मी भी थे. सतलोक आश्रम से पांच महिलाओं और एक बच्चे की लाश भी मिली थी. आखिरकार 18 नवंबर 2014 में रामपाल को गिरफ्तार कर लिया गया. रामपाल तब से जेल की सलाखों के पीछे कैद है.

हत्या के दो मामलों में रामपाल दोषी करार, हिसार में सुरक्षा कड़ी
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