हरियाणा के इस गांव के योद्धाओं ने प्रथम विश्वयुद्ध में दुश्मनों के छुड़ा दिए थे छक्के

द्वितीय विश्वयुद्ध में इस गांव से 247 लोगों ने भाग लिया. इनमें 6 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे.

News18 Haryana
Updated: July 13, 2019, 6:01 AM IST
हरियाणा के इस गांव के योद्धाओं ने प्रथम विश्वयुद्ध में दुश्मनों के छुड़ा दिए थे छक्के
कोसली गांव
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Updated: July 13, 2019, 6:01 AM IST
हरियाणा में एक ऐसा गांव है, जिसका अपना ऐतिहासिक महत्व है. इस गांव के लोगों ने देश की आजादी से लेकर प्रथम विश्वयुद्ध तक में अपनी शक्ति का लोहा मनवाया है. इस गांव के लोगों में देशभक्ति का जज्बा ऐसा कूट-कूट कर भरा हुआ है कि हर कोई सेना में ही जाना चाहता है. प्रथम विश्वयुद्ध में इस गांव के 9 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे.

इस गांव के कण-कण में वीरता है मौजूद


हम बता कर रहे हैं हरियाणा के कोसली गांव की. इस गांव के कण-कण में शौर्य और पराक्रम है. द्वितीय विश्वयुद्ध में इस गांव से 247 लोगों ने भाग लिया. इनमें 6 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे. कहा जाता है कि देश की सुरक्षा को लेकर कोई भी लड़ाई ऐसी नहीं है, जिसमें कोसली के लोगों ने हिस्सा नहीं लिया हो.

इस गांव में पांच ब्रिगेडियर और 25 कर्नल हैं

इस गांव से पांच ब्रिगेडियर, 25 कर्नल और तीनों सेनाओं में करीब 106 अफसर हैं. इसके अलावा गांव के ही सुधीर यादव पुलिस में आईजी हैं. मेजर जरनल यशवंत यादव जो मेजर उमराव सिंह के पोते हैं, उन्हें राष्ट्रपति ने सम्मानित किया था. आरपीएफ और बीएसएफ को भी 50 से अधिक अफसर इस गांव ने दिए हैं.

 1977 में गांव के रावरामनारायण देवीलाल एमएलए बने
बात राजनीति की करें तो 1977 में गांव के रावरामनारायण देवीलाल सरकार में एमएलए में बने थे. इसके बाद 1987 में दोबारा एमएलए बनने के बाद मंत्री बने. कोसली को लंबे इंतजार के बाद 1978 में सब तहसील और 1 नवंबर 1989 को सब डिविजन का दर्जा मिला.
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800 साल पहले गांव में आए थे राजा
द्वितीय विश्वयुद्ध में इस गांव के एक दर्जन से अधिक लोगों को अपनी बहादुरी दिखाने पर सेना में अंग्रेजों ने अफसर बनाया. इसी गांव के मेजर उमराव सिंह को मिलिट्री कार्स से सम्मानित किया गया. सेवानिवृत्त डॉ. सुचेत ने बताया कि करीब 800 साल पहले गांव के एक हिस्से में बाबा मुक्तेश्वरपुरी तपस्या में लीन थे. शेखावटी के राजा कोसल सिंह यहां से गुजर रहे थे. तभी रास्ते में रात हो गई. ऐसे में वह यहीं रुक गए. तब बाबा ने उन्हें यहीं बसने को कहा. उन्होंने कहा कि आपसे इस गांव को ना तो कोई जीत सकेगा और ना ही हरा सकेगा.

आपके नाम से ही कोसल गोत्र होगा
बाबा ने राजा से कहा कि आपके नाम से ही कोसल गोत्र होगा. इसके बाद राजा कोसल ने गांव बसाया. तब इस गांव पर तीन बार हमले हुए, लेकिन हर बार आक्रमणकारी हार गए. इसके बाद राजा ने गांव के चारों ओर चोवल खाई बनाकर गांव को किले का रूप दे दिया, जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. गांव में एक मठ भी है, जिसे कोसली मठ के नाम से जाना जाता है. यह मठ विदेश में भी फेमस है.

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