हरियाणा में मौसम: अगले 4-5 दिन कमजोर रहेगा मानसून, तेज धूप से बढ़ेगी गर्मी और उमस
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हरियाणा में मौसम: अगले 4-5 दिन कमजोर रहेगा मानसून, तेज धूप से बढ़ेगी गर्मी और उमस
हरियााणा में मानसून की सक्रियता हुई कम. सांकेतिक फोटो.

Haryana Weather Report: मानसून (Monsoon) की सक्रियता राज्य में अगले चार-पांच दिनों में थोड़ी कम हो जाने की संभावना है. इससे बारिश की संभावना भी बेहद कम है.

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हिसार. 6 सितंबर तक हरियाणा (Haryana) में जहां रुक-रुक कर बारिश (Rain) होती रही, वहीं सोमवार और मंगलवार धूप और बादलों की आंख मिचोली चलती रही. मगर बारिश नहीं हुई. धूप ने भी लोगों को खूब झुलसाया. बारिश को लेकर अभी भी राहत भरी खबर नहीं है. मानसून अपने अंतिम चरण में है और अगले चार से पांच दिनों तक हरियाणा में कमजोर रहेगा. ऐसे में बारिश के आसार कम रहेंगे. इससे उमस भी बढ़ेगी तो गर्मी भी ज्‍यादा होगी.

हरियाणा राज्य में मानसून पीरियड (1 जून से 8 सितंबर) तक भारत मौसम विज्ञान विभाग में दर्ज आंकड़ों के अनुसार राज्य में अब तक सामान्य से 6% कम बारिश दर्ज हुई है. इस दौरान राज्य में सामान्य बारिश 395.7 मिलीमीटर की जगह 373.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है. मानसून में असमान्य बारिश होने के कारण राज्य के बारह जिलों में सामान्य से भी कम बारिश दर्ज हुई.

इनमें मुख्य रूप से पंचकूला (-62%), रोहतक (-52%), भिवानी (-40%), महेंद्रगढ़ (-31%), रेवाड़ी (-20%), अम्बाला (-28%), जींद (-19%), हिसार (-13%), पानीपत (-13%), पलवल (-14%), यमुनानगर (-11%), सोनीपत (-1%) तथा राज्य के बाकी जिलों में सामान्य या अधिक वर्षा आंकी गई है.



मौसम का पूर्वानुमान
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉक्टर मदनलाल खींचड़ के अनुसार मानसून की टर्फ रेखा हिमालय की तलहटियों की तरफ बढ़ने की संभावना को देखते हुए इसकी सक्रियता राज्य में अगले चार-पांच दिनों में थोड़ी कम हो जाने की संभावना है. जिससे 13 सितंबर तक मौसम आमतौर पर परिवर्तनशील रहने और बीच-बीच में आंशिक बादल छाए रहने तथा दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी होने की संभावना है. इस दौरान राज्य में कुछ-एक स्थानों पर गरज चमक के साथ छिटपुट बूंदाबांदी या हल्की बारीश भी संभावित है.

मौसम आधारित कृषि सलाह
1.पिछले पांच दिनों से राज्य में बारिश होने, बादलवाई व वातावरण में नमी अधिक होने से फसलों में कीट व रोगों का प्रकोप बढ़ने की संभावना को देखते हुए फसलों की लगातार निगरानी रखे. यदि फसलों में कीट व रोग का प्रकोप दिखाई दे तो विश्विद्यालय द्वारा सिफारिश दवाइयों की स्प्रे मौसम साफ रहने पर ही करें.
2. नरमा कपास व अन्य खरीफ फसलों तथा सब्जियों में यदि बारिश का पानी खड़ा हो तो उसे निकाल दें.
3.तापमान में हल्की बढ़ोतरी होने की संभावना को देखते हुए धान की फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई करे.
4. फलदार पौधे लगाने का उचित समय है. प्रमाणित नर्सरी से उत्तम किस्मों के फलदार पौधे खेतों में अवश्य लगाएं.
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