11 लाख की लूट: 1.60 करोड़ बीमा राशि के लिए राममेहर ने क्राइम सीरियल देखकर लिखी पूरी Script!

हिसार में फर्जी लूट केस का आरोपी राममेहर.
हिसार में फर्जी लूट केस का आरोपी राममेहर.

Hisar 11 lakhs rupees Fake Loot Case: वारदात वाले दिन फोन कर राममेहर ने परिवार को बताया था कि वह पैसे लेने के लिए हिसार जाएगा, जबकि वास्तव में वो 6 अक्टूबर यानी घटना वाले दिन वास्तव में हिसार गया ही नहीं और इस स्वयं के मरने की फर्जी कहनी की प्लानिंग करने में पूरा दिन व्यस्त था.

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  • Last Updated: October 10, 2020, 10:03 AM IST
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हांसी. हरियाणा के हिसार (Hisar) जिले में हांसी में 11 लाख की फर्जी लूट और कार में शख्स को जिंदा जलाने (Immolation) की कहानी में अब चौंकाने वाली बाते सामनें आ रही हैं. दरअसल, इस पूरी कहानी को गढ़ने वाले राममेहर (Rammehar) ने जिंदगी में जिस काम में हाथ डाला, उसे नुकसान ही हुआ. फैक्ट्री लगाई लेकिन उसमें भी घाटा खाना पड़ा. फाइनेंस का काम किया तो उसमें भी मुनाफा होने के बजाए घाटा हो गया. दोस्तों के साथ पार्टरनशिप में काम शुरु किया तो वहां भी तकदीर ने साथ नहीं दिया. जिंदगी कर्ज में दबती चली गई और मात्र 36 साल की उम्र में ही राममेहर के सिर लाखों का कर्ज हो गया. इस कर्ज (Loan) में दबी जिंदगी को पूरी तरह से खत्म करके एक नई जिंदगी का आगाज करने के लिए राममेहर ने फिल्मी स्टाइल में दुनिया के सामन खुद के मरने की पटकथा रची थी.

कैसे गढ़ी पूरी कहानी की स्क्रिप्ट
वारदात वाले दिन फोन कर राममेहर ने परिवार को बताया था कि वह पैसे लेने के लिए हिसार जाएगा, जबकि वास्तव में वो 6 अक्टूबर यानी घटना वाले दिन वास्तव में हिसार गया ही नहीं और इस स्वयं के मरने की फर्जी कहनी की प्लानिंग करने में पूरा दिन व्यस्त था. शाम 7 बजे के आसपास ही वह भाटला-महजत गांवों के इलाके में चला गया था. यहीं तीन घंटे तक आसपास के गांवों की सड़कों पर घूमता रहा व सुनसान जगह की तलाश करता रहा. आखिर रात 11 बजे वह महजत-भाटला रोड़ पर पहुंचा और वहां जाकर भांजे, चचेरे भाई व बेटे को कॉल करके लुटरों के पीछे लगे होने की बात कही. इसके बाद उसने एक अज्ञात शव को कार में रखकर कार को पेट्रोल छिड़ककर आग के हवाले कर दिया और अपना मोबाइल फोन भी जलती कार में ही फैंक दिया. इसके बाद उसने पहले से ही एक कार का इंतजाम कर रखा था.

 वारदात में डाटा गांव निवासी व्यापारी राममेहर की मौत हो गई है. सदर थाना प्रभारी कश्मीरी लाल ने बताया कि पुलिस को रात को 12 बजे सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति को बरवाला रोड पर महजत गांव के पास कार के अंदर ही जला दिया गया है. पुलिस मौके पर पहुंची तो कार जल चुकी थी. (Photo: News18)
नई जिंदगी की शुरुआत


ये कार अन्य शहर से खरीदी गई है लेकिन नंबर हांसी में रजिस्ट्रेशन हुआ है. इस कार को राममेहर ने हांसी के आसपास खड़ा किया हुआ था. अपनी पुरानी जिंदगी की हत्या कर राममेहर इस कार से नए शहर की तरफ नई जिंदगी शुरु करने के लिए रवाना हो गया. इसके बाद वह दिल्ली यूपी होते हुए हांसी से 1300 कि.मी दूर स्थित छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर पहुंचा. उसे पूरा विश्वास था कि यहां तक कोई नहीं पहुंच पाएगा. पुलिस अभी जांच कर रही कि ये गाड़ी राममेहर ने खरीदी थी या किसी दोस्त से ली थी.

फिल्मी स्टाइल में मिटाए सबूत, देखे होंगे क्राइम के सीरियल
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जिस प्रकार से राममेहर ने खुद के मारे जाने की स्टोरी प्लान की थी. इससे लगता है कि उसने क्राइम से जुड़े टीवी पर आने वाले काफी सीरियल देखे हुए हैं. क्योंकि जिस प्रकार से सबूतों को मिटाने की कोशिश की गई है, वह पूरी तरह से फिल्मी है. राममेहर ने सोचा था कि उसके परिवार को बीमा की करीब 1.60 करोड़ रुपये की रकम मिल जाएगा और वह नई जिंदगी शुरु कर लेगा. करीब 60 लाख रुपये की एक बीमा पॉलिसी तो राममेहर ने महज कुछ महीने पूर्व में ही करवाई थी. इससे लगता है कि वह लंबे समय से ऐसी प्लानिंग कर रहा था.

परिवार ने गंगा में विसर्जित दी अस्थियां
राममेहर के परिवार ने शुक्रवार को गंगा में अस्थियों को विसर्जित कर दिया. अब स्वजनों का कहना है कि वह पता नहीं किसकी अस्थियां थी, जिन्हें गंगा में अपने संवेदना व्यक्त करते हुए परिवार ने विसर्जित किया है. चचेरे भाई अमित ने कहा कि परिवार ने सपने में भी नहीं सोचा था कि राममेहर ऐसी हरकत कभी कर सकता है. उसके ऊपर कर्ज जरूर था, लेकिन इतना भी नहीं था कि ऐसा कुछ किया जाए. जिंदगी चल रही थी जैसे भी, ठीक चल रही थी. उन्होंने कहा कि ये सब सामने आने के बाद से परिवार और ज्यादा परेशानी में है. उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आखिर राममेहर ने ये सब
खेल क्यों रचा?

 एसएचओ कश्मीरी लाल ने कहा कि अज्ञात युवकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. इस रूट पर सीसीटीवी कैमरे खंगाले जा रहे हैं. (Photo: News18)

अपने गले का लॉकेट भी शव के पास जलाया, ताकि परिवार उसका शव समझे
चालबाज राममेहर ने गाड़ी में शव के पास ही अपने गले का लॉकेट भी रख दिया था, ताकि बाद में जले हुए अवशेषों के जरिए परिवार पहचान उसे मारे जाने की बात पर विश्वास कर ले. इसके अलावा फोन भी वहीं जला दिया व पुलिस को फोन की प्लेट जल हुई मिली थी.

डेड बॉडी बनी रहस्य
पुलिस सूत्रों के मुताबिक डेडबॉडी रोहतक पीजीआई से खरीदकर लाई गई थी. इसके लिए बड़ी राशि का भुगतान राममेहर ने किया था, जबकि, दूसरी तरफ राममेहर 6 सितंबर के दिन हांसी में रहा था. उसका लोकेशन हांसी के बाहर की नहीं मिली है. ऐसे में पुलिस को अंदेशा है कि डेडबॉडी किसी व्यक्ति के द्वारा हांसी में ही डिलीवर की गई थी. बताया जा रहा है कि ये डेडबॉडी करीब पांच लाख में राममेहर ने खरीदी थी. ऐसी भी चर्चा है कि ये डेडबॉडी किसी कोरोना मरीज की थी.

 पुलिस अधिकारी ने बताया कि मृतक के स्वजनों ने बताया है कि राममेहर हिसार से अपने गांव डाटा आ रहे थे. उनकी बरवाला में डिस्‍पोजल कप और प्लेट की फैक्ट्री है. बीती रोज बैंक से 11 लाख रुपये निकलवाए थे. रात करीब 12 बजे के आसपास महजत गांव के पास दो बाइक सवारों ने कार को घेर लिया और घटना को अंजाम दिया. (Photo: News18)

पुलिस ने कैश कर लिया बरामद
पुलिस सूत्रों ने बताया कि राममेहर ने बैंक से जो रकम निकाली थी वह उसके पास से ही बरामद हो चुकी है. उसने बैंक से इतनी बड़ी रकम इसीलिए निकाली थी कि लंबे समय तक पैसों की जरूरत ना पड़े. अपने सभी खातों को उसने जमा पूंजी निकालकर लगभग खाली कर दिया था. छत्तीसगढ़ में ही वह अब लंबे समय तक गुमनामी की जिंदगी जीने का प्लान कर रहा था.

इंटरनेट से पढ़ रहा था अपने मरने की खबरें
जहां राममेहर के वारदात में जिंदा जल जाने की घटना से परिवार स्तब्ध था और दुनिया हैरान. वहीं, राममेहर इंटरनेट के जरिए अपने मरने की खबरों पर नजर रखे हुए था. इसके जरिए ही वह अपनी प्लानिंग तैयार कर रहा था. राममेहर ने खुद के मरने की झूठी कहानी रचने की प्लानिंग लंबे समय से कर रहा था. उसने नया मोबाइल व किसी अन्य व्यक्ति के नाम से सिम पहले ही खरीद रखा था. पुलिस को पहले दिन ही सच्चाई पता लग गई थी, लेकिन मीडिया के समक्ष खुलासा नहीं किया. न्यूज पढ़कर राममेहर को भरोसा हो चुका था कि उसका प्लान कामयाब हो चुका है, लेकिन पुलिस खुफिया तरीके से अपने मिशन में जुटी हुई थी.

ये गलतियों ने राममेहर के प्लान को कर दिया फेल
वैसे तो राममेहर ने दुनिया को गुमराह करने के लिए अपनी तरफ से पुख्ता प्लानिंग कर रखी थी, लेकिन कहते हैं कि वारदात करने के बाद अपराध कुछ ना कुछ सुराग छोड़ ही जाता है. पुलिस की सीन ऑफ क्राइम की टीम ने क्लियर कर दिया था कि ये वारदात में लूट का एंगल नजर नहीं आ रहा है. कुछ बातों ने शक की सूई राममेहर पर ही घुमा दी. राममेहर ने गाड़ी के हैंडब्रेक लगा रखे थे. इसके अलावा शव को गाड़ी के लेफ्ट साइड रखा हुआ था.

कॉल डिटेल ने सुलझाया मामला, साइबर टीम ने किया कमाल
राममेहर ने सोचा था कि फोन जला देने के बाद वह दुनिया व पुलिस की नजरों से बच जाएगा. इसी नासमझी का खामियाजा उसे भुगतना पड़ा. पुलिस ने वारदात से पूर्व राममेहर ने जिन लोगों से बातचीत की थी उनके नंबरों को सर्च किया और वहां से काफी अहम सुराग जांच टीमों के हाथ लगे. पुलिस सूत्रों के मुताबिक साइबर टीम का रोल इस मामले को सुलझाने में अहम रहा है. पहले दिन ही साइबर टीम ने क्लीयर कर दिया था कि ये लूट का मामला नहीं है. राममेहर के फोन नंबर के कॉल रिकार्ड की कड़ियों को जोड़ते हुए साइबर टीम ने मामले का पटापेक्ष क दिया.

शव पर छिड़का सबसे ज्यादा पेट्रोल
राममेहर ने शव पर सबसे ज्यादा पेट्रोल व अन्य ज्वलनशील पदार्थ छिड़का गया था. ताकि वह अच्छे से जल जाएगा और फॉरेंसिक टीम को सबूत ना मिल पाएं. वह अपने साथ ही ज्वलनशील तेल की बोतल साथ लेकर आया था. पुलिस को मौके पर एक प्लास्टिक की जली हुए कैन के कुछ अंश मिले थे. मौके पर मिले फॉरेंसिक सबूतों से पुलिस को अहम सुराग मिलता गया. कार को इतना ज्यादा तेल छिड़कर जलाने व मौके पर फायरिंग का कोई सबूत ना मिलने के कारण भी पुलिस के शक की सूई दूसरी तरफ घूम रही थी.
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