सरकार के इस नियम से हरियाणा के हजारों ट्रक ड्राइवर हो गए बेरोजगार
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सरकार के इस नियम से हरियाणा के हजारों ट्रक ड्राइवर हो गए बेरोजगार
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण न होने के कारण इजरायल पिछले साल से बेरोजगार हैं. उनके पास घर चलाने के लिए और बच्‍चों की फीस चुकाने के भी पैसे नहीं हैं.

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  • Last Updated: May 11, 2019, 7:41 PM IST
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(रौनक कुमार गुंजन)

हरियाणा के नूंह जिले में कक्षा आठ के एक बच्‍चे ने अपने प्रिंसिपल को पत्र लिखकर फीस माफ करने की गुहार लगाई है. उसने कहा, 'मेरे पिता (मोहम्मद इजराइल) बहुत ही गरीब हैं और वो मेरी फीस देने में असमर्थ हैं, इसलिए मेरी फीस माफ करने की कृपा करें.' ऐसे प्रार्थना पत्र आपने बहुत से देखे और सुने होंगे, लेकिन यह खास इसलिए हैं क्‍योंकि हरियाणा सरकार के एक नियम की वजह से उसके पिता जोकि 27 साल से ट्रक ड्राइवर थे, पिछले साल बेरोजगार हो गए.

ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण न होने के कारण मोहम्मद इजरायल पिछले साल से बेरोजगार हैं. उनके पास घर चलाने के लिए और अपने बच्‍चों की फीस चुकाने के भी पैसे नहीं हैं.



दरअसल, हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने वर्ष 2016 में घोषणा की थी कि अन्‍य राज्‍यों के ट्रक ड्राइवरों को गाड़ी चलाने के लिए नए लाइसेंस बनवाने पड़ेंगे. नए लाइसेंस के लिए पात्र होने के लिए आवेदकों को कम से कम 10वीं पास होना अनिवार्य है.
खट्टर सरकार ने लाइसेंस के नियम बदले

हरियाणा की बीजेपी सरकार ने भारी मोटर वाहनों के लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण के लिए डिजिटल सिस्‍टम अपनाया है. इसमें आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र और 10वीं पास सर्टिफिकेट अनिवार्य है. 47 वर्षीय मोहम्‍मद इजरायल सरकार की इसी नीति का शिकार हो गए हैं. इजराइल ने कक्षा 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी.

मोहम्मद इजराइल (फाइल फोटो)


मोहम्‍मद इजरायल ने कहा, 'देखिए, मुझे अंग्रेजी में वे लाइनें आज भी याद हैं जो मैंने कई साल पहले लिखी थीं. क्‍या आपको लगता है कि मैं लाइसेंस के लायक नहीं हूं? मेरे पास गांव में कोई घर नहीं है और न ही कोई जमीन है. मेरा परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहा है.' उन्‍होंने कहा, 'पिछले 27 सालों से मेरा लाइसेंस लगातार रिन्‍यू होता रहा है, लेकिन एक साल पहले नहीं हो सका. जब मेरा लाइसेंस काम करता था, उस वक्‍त मैं हर महीने 30,000 रुपये कमाता था. मेरे 9 बच्‍चे हैं.'

नूंह देश के सबसे पिछड़े इलाकों में से एक

हरियाणा का नूंह क्षेत्र देश के सबसे पिछड़े इलाकों में से एक हैं. यहां न तो उद्योग हैं और न ही उपजाऊ जमीन. नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, यहां पर शिक्षा का स्‍तर बहुत की निम्‍न स्‍तर पर है. यहां के ज्‍यादात्‍तर लोग ट्रक ड्राइवर का काम करके अपनी आजीविका चलाते हैं. लाइसेंस के लिए 10वीं का प्रमाण पत्र अनिवार्य होने से यहां के हजारों लोग बेरोजगार हो गए.

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नीति आयोग ने वर्ष 2018 में हरियाणा के नूंह को भारत के सबसे पिछड़े जिलों की लिस्‍ट में शामिल किया था. यह आकलन शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, अर्थव्‍यवस्‍था, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे जैसे कई मापदंडों पर किया गया. सर्वेक्षण में मेवात क्षेत्र ने 26 प्रतिशत अं‍क हासिल किए थे, जो देश भर में सबसे कम है.

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2011 की जनगणना के अनुसार, इस क्षेत्र की आबादी 10.89 लाख आंकी गई थी. जिनमें से अधिकांश मेओ-मुस्लिम हैं. इलाके के एक स्थानीय कार्यकर्ता हैदर अली द्वारा दायर एक आरटीआई से पता चला है कि हरियाणा परिवहन विभाग में नूंह के करीब एक लाख ट्रक ड्राइवर पंजीकृत हैं. अली कहते हैं, 'पंजीकरण की सूची में केवल उन्‍हीं लोगों का नाम है जिनके पास हरियाणा का लाइसेंस है. अभी कई अन्‍य भी हैं, जिनके पास दूसरे राज्‍यों का लाइसेंस है. राज्‍य सरकार के लाइसेंस संबंधी नियम चेंज होने के बाद ऐसा अनुमान है कि यहां के ट्रक ड्राइवरों में से लगभग 60 फीसदी लोग बेरोजार हो गए हैं.

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