हरियाणा का एक ऐसा गांव जो बस देश के लिए समर्पित, यहां हर घर में है एक फौजी
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हरियाणा का एक ऐसा गांव जो बस देश के लिए समर्पित, यहां हर घर में है एक फौजी
हरियाणा का बिशाहन गांव, जहां हर घर में एक फौजी

देश (Country) सेवा का जज्बा इस गांव की मिट्टी में कुछ ऐसा है कि दादा-पिता, बेटे और पोते हर कोई देश की सीमा पर जाकर देश की रक्षा (Protection) कर रहा है और करना भी चाहते हैं.

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  • Last Updated: July 27, 2020, 12:26 PM IST
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झज्जर. आज हम देश के एक ऐसे गांव से रूबरू कराएंगे जिस गांव के जवान केवल और केवल देश (Country) के लिए समर्पित है. जी हां हम बात कर रहे हैं हरियाणा के झज्जर (Jhajjar) जिले के गांव बिशाहन की. कहने में और दिखने में यह गांव बेहद छोटा है, लेकिन इस गांव का जिगरा बहुत बड़ा है. यहां हर घर से एक फौजी है, एक सैनिक है. ये गांव केवल देश सेवा के लिए ही बना है. 2500 से 3000 तक आबादी वाला यह गांव पूरी तरह से देश के लिए समर्पित है. यहां एक पीढ़ी नहीं बल्कि चार-चार पीढ़ियों से यहां के जवान देश की रक्षा कर रहे हैं.

देश सेवा का जज्बा इस गांव की मिट्टी में कुछ ऐसा है कि दादा-पिता, बेटे और पोते हर कोई देश की सीमा पर जाकर देश की रक्षा कर रहा है और करना भी चाहते है.  इस गांव की मिट्टी से  कॉन्स्टेबल से लेकर सेना अध्यक्ष तक निकले है. पूर्व सेना अध्यक्ष दलबीर सुहाग इसी गांव की देन है. जल थल वायु देश की तीनों सेनाओं में इस गांव के जवान शामिल है.

गांव के हालात देखकर आप रह जाएंगे हैरान



आप गांव में लगे ग्राम गौरव पट पर लिखे गए वीरों के नाम इसकी बानगी स्वयं दर्शाते हैं. लेकिन अफसोस जिस गांव की चार-चार पीढ़ियां देश सेवा के लिए समर्पित हो उस गांव के हालात देखकर आप हैरान रह जाएंगे. जिस गांव के के वीरों ने विश्व यद्ध से लेकर, प्रथम यद्ध, द्वतीय यद्ध, से लेकर कारगिल की लड़ाई तक लड़ी हो, उसी गांव के जवान अब सुविधाओं के अभाव में जी रहे है.  देश को समर्पित यह गांव अपनी ही बदहाली पर आंसू बहा रहा है. जो जवान कभी देश की विभिन्न लड़ाई में शामिल थे आज वही एक्स सर्विसमैन अपने हालात बयां कर रहे है.
गांव के हालात बदहाल

वर्षों तक देश की सेवा करने वाले गांव के एक्स सर्विसमैन आज खुद सुविधाओं के अभाव में अपना जीवन व्यापन कर रहे हैं. जिस गांव को सरकार या प्रशासन द्वारा आदर्श गांव या नगर बना देना चाहिए था उस गांव के हालात एक आम गांव से बदहाल हैं. जो गांव पूरी तरह से हाईटेक होना चाहिए था वह गांव उसके लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं. पीने के पानी की समस्या से लेकर पानी निकासी की समस्या जिससे पूरा गांव हमेशा तालाब में तब्दील रहता है. इतना ही नहीं गांव के लोग खेती पर भी आधारित है लेकिन गांव में हर साल बारिश के सीजन में फसल बर्बाद हो जाती है.

गलियां तालाब में तब्दील

गांव की गलियां तालाब में तब्दील है, साथ में गांव के खेतों में भी पानी भरा हुआ है. कुल मुलाकर ये कहे जिस गांव में हर घर से फौजी है, यहां तक कि पूर्व सेना अध्यक्ष दलबीर सुहाग जैसे जाबाज़ ऑफिसर भी इसी मिट्टी से निकले है, आज वही मिट्टी वही गांव  आंसू बहाने पर मजबूर है.

ग्रामीणों ने पलायन किया शुरू

गांव में सुविधाओं का अभाव ऐसा है कि  ग्रामीणों ने यहां से पलायन करना शुरू कर दिया है. यहां हर दूसरे घर पर ताला लटका है. एक तिहाई लोग गांव से पलायन कर चुके हैं. करें भी क्यों ना क्योंकि जिस गांव में बस परिवहन जैसी भी सुविधा न हो तो ऐसे गांव के बच्चे बाहर जाकर कैसे अपनी शिक्षा ग्रहण करेंगे. गांव में बस की कोई खास सुविधा नहीं है, हर कोई अपने साधनों से ही अपने बच्चों को स्कूल या कॉलेज पढ़ने के लिए छोड़ने जाता है, तो ऐसे में आप खुद समझ जाइए कि यह कैसी सरकारें हैं कैसा सिस्टम है. जो ऐसे गांव को भी विकास के मामले में नजरअंदाज कर देता है.
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