75 साल बाद इटली से झज्जर पहुंची शहीद की अस्थियां, भावुक हुए लोग

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान झज्जर के गांव नौगांवा के हरि सिंह और हिसार के नंगथला गांव निवासी पालुराम ब्रिटिश इंडियन आर्मी की फ्रंटियर फोर्स राइफल में सिपाही के तौर पर कार्यरत थे.

Pradeep Dhankhar | News18 Haryana
Updated: June 3, 2019, 4:47 PM IST
75 साल बाद इटली से झज्जर पहुंची शहीद की अस्थियां, भावुक हुए लोग
शहीद की अस्थियां
Pradeep Dhankhar
Pradeep Dhankhar | News18 Haryana
Updated: June 3, 2019, 4:47 PM IST
द्वितीय विश्वयुद्ध में इटली के अन्दर शहीद हुए झज्जर जिले के गांव नौगांवा के हरिसिंह की अस्थियां सोमवार को झज्जर पहुंची. यहां लोकनिर्माण विश्राम गृह में जिला सैनिक बोर्ड सचिव एएस यादव ने सेना की टीम से अस्थियों को ग्रहण किया. यहीं पर जिला सैनिक बोर्ड की तरफ से कर्नल एएस यादव और हरियाणा सरकार की तरफ प्रदेश के कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने शहीद की अस्थियों को श्रद्धाजंलि दी और उनकी शहादत को प्रदेश के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक गौरव की बात बताया.

बाद में जिला सैनिक बोर्ड की एक टीम सेना द्वारा सौंपी गई शहीद हरि सिंह की अस्थियों को लेकर उनके गांव नौगावां पहुंची. यहां शहीद हरि सिंह को श्रद्धाजंलि देने के लिए पहले से ही पूरे गांव ने एक समारोह का आयोजन रखा था. यहां मंच प गाजे-बाजे के साथ अस्थियों को लाया गया. इस दौरान शहीद हरि सिंह अमर रहे के गगनभेदी नारों से पूरा माहौल गुंजायमान हो उठा. बाद में शहीद हरि सिंह की अस्थियां उनके परिजनों ने गांव की ही पंचायती जमीन पर विसर्जित की. यहां ग्रामीणों व परिजनों की मांग पर पंचायती जमीन पर ही शहीद हरि सिंह की एक प्रतिमा लगाए जाने का फैसला भी लिया गया.

यह था मामला

मामले के अनुसार द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान झज्जर के गांव नौगांवा के हरि सिंह और हिसार के नंगथला गांव निवासी पालुराम ब्रिटिश इंडियन आर्मी की फ्रंटियर फोर्स राइफल में सिपाही के तौर पर कार्यरत थे. वर्ष 1947 के बंटवारे के दौरान यह राइफल पाकिस्तान को सौंप दी गई थी. इस राइफल ने द्वितीय विश्व युद्ध (वर्ष 1939 से 1945) के दौरान इटली में जाकर युद्ध लड़ा था.

दोनों सिपाही वर्ष 1944 में इटली में शहीद हो गए थे लेकिन इनके शव नहीं मिले थे. दोनों को 13 सितंबर, 1944 को गुमशुदा घोषित कर दिया गया था. इसके बाद वर्ष 1996 को इटली में मानव कंकाल के कुछ अवशेष मिले और डीएनए जांच के दौरान वर्ष 2012 में खुलासा हुआ कि ये कंकाल करीब 20 से 22 वर्ष के युवकों के है और यूरोपीय नस्ल से मेल नहीं खाते.

बाद में कॉमनवेल्थ ग्रेव कमिशन से मिले डाटा की जांच से खुलासा हुआ कि ये कंकाल ब्रिटिश इंडियन आर्मी की फ्रंटियर फोर्स राइफल के दो सिपाही के हैं और जांच के बाद इसकी पुष्टि हो गई. अब इन दोनों शहीदों का अंतिम संस्कार इटली में किए जाने के बाद सेना की एक टीम इनकी अस्थियों को लेने के लिए इटली गई थी. टीम के अस्थियां लिए जाने के बाद सेना की ही एक टीम सोमवार को शहीद हरि सिंह की अस्थियां लेकर झज्जर पहुंची. यहीं पर जिला सैनिक बोर्ड को यह अस्थियां सौंप दी गई.

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First published: June 3, 2019, 4:43 PM IST
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