झज्‍जर जिले में लिंगानुपात का आंकड़ा बढ़कर 920 तक पहुंचा

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लिंगानुपात के लिए कभी देश भर में चर्चित झज्जर जिला से वर्ष 2018 की शुरुआत में अच्छी खबर है. बीते वर्ष 2017 में झज्जर जिला के भीतर जन्म लेने वाले बच्चों में प्रति हजार लड़कों पर 920 लड़कियों ने जन्म लिया है,

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लिंगानुपात के लिए कभी देश भर में चर्चित झज्जर जिला से वर्ष 2018 की शुरुआत में अच्छी खबर है. बीते वर्ष 2017 में झज्जर जिला के भीतर जन्म लेने वाले बच्चों में प्रति हजार लड़कों पर 920 लड़कियों ने जन्म लिया है.

लिंगानुपात की यह दर 2010 से लेकर अब तक एक वर्ष के दौरान सर्वाधिक रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के उपरांत झज्जर जिला में लिंगानुपात में 95 अंकों का उछाल आया है.

बता दें कि तीन साल पहले झज्जर हरियाणा में सबसे निचले पायदेान पर था, लेकिन अब तीन साल में हरियाणा के झज्जर जिल में इस आंकड़े में काफी उछाल आया है. 750 से ये आंकड़ा अब 920 पर जा पहुंचा है. देश के इस छोटे से जिले ने सदियों से समाज पर कलंक बनकर कन्या भ्रूण हत्या जैसे अभिशाप को धवस्त कर दिया है. झज्जर जिले की इस उपल्बिध पर पीएमओ कार्यालय से लेकर, सूबे के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और महिला बाल विकास मंत्री ने भी बधाई दी है.



उपायुक्त सोनल ने इस उपलब्धि के लिए झज्जर जिला के लोगों को बधाई दी है. बता दे कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के तहत झज्जर जिला में उपायुक्त के नेतृत्व में जिला प्रशासन विशेषकर महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, विकास एवं पंचायत विभाग आदि संयुक्त प्रयास में वर्ष 2017 के दौरान तेजी रही.
उपायुक्त सोनल गोयल ने बताया कि झज्जर जिला में लिंगानुपात में सुधार के लिए हुए प्रयासों की नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने भी प्रशंसा की थी. उन्होंने बताया कि लिंगानुपात को लेकर सामुदायिक एकजुटता, गर्भवती महिलाओं का नगरीय और ग्रामीण इलाकों में घर-घर जाकर पंजीकरण करना तथा कम लिंगानुपात वाले गांवों में जाकर लोगों को जागरुक करने से बदलाव नजर आया है. इसके साथ-साथ एएनएम, आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने बड़ी भूमिका निभाई.
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