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हरियाणा: Lockdown में फूल उत्पादक किसानों को करोड़ों का नुकसान, सरकार से लगाई राहत की गुहार

खेतों पर खड़े फूल मुरझाए

खेतों पर खड़े फूल मुरझाए

लिलियम, कारनेशन और जिप्सोफिला जैसे फूल, जिनकी एक कली 50 से 100 रूपये में बिकती थी आज उन्हें कोई खरीदार नहीं मिल रहा है.

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झज्जर. लॉकडाउन के चलते जहां उद्योग धंधों को नुकसान हुआ है, वहीं आधुनिक और उन्नत खेती करने वाले किसानों (Farmers) को भी करोड़ों का नुकसान हुआ है. बहादुरगढ़ में फूलों की खेती करने वाले किसानों को करोड़ों का नुकसान हुआ है. 14 एकड़ में लगे करोड़ों फूल (Flowers) खिलकर सूख गये हैं. लिलियम, कारनेशन और जिप्सोफिला जैसे फूल, जिनकी एक कली 50 से 100 रूपये में बिकती थी आज उन्हें कोई खरीदार नहीं मिल रहा है. मार्च से जून तक शादी ब्याह, राम नवमी और ईद के मौके पर फूलों से बम्पर कमाई होती थी. लेकिन इस बार कोरोना ने जहां इंसानों को बिमार तो फूलों को मुरझाने पर मजबूर कर दिया है.

विपरित परिस्थितियों में बहादुरगढ़ के टांडाहेड़ी गांव में 14 एकड़ में फूलों की खेती की जा रही है. इस बार 3 एकड़ में रजनीगंधा और 11 एकड़ के पॉलीफार्म और नेट हाउस में लिलियम, ग्लेडिला, कारनेशन और जिप्सोफिला जैसे कीमती, सुन्दर और महकते फूलों की खेती की गई थी. मार्च से जून तक इन फूलों की जबरदस्त डिमांड होती है. इन दिनों में रामनवमी और ईद जैसे बड़े त्यौहारों पर भी फूलों की खपत काफी होती है. लेकिन इस बार लॉकडाउन ने फूलों के साथ साथ फूल उत्पादक किसान की कमर भी तोड़ दी है. खेतों में खड़े खड़े फूल मुरझा गये हैं.

खेतों में मुरझाए फूल

हरियाणा कृषि कमृण अवार्ड, एग्रो लीडरशिप अवार्ड विजेता सीलकराम धनखड़ की अगुवाई में ये फूलों की खेती हो रही है. सीलकराम ने बताया कि लिलियम की एक कली खिलने पर 25 रूपये, कारनेशन पर 40 और जिप्सोफिला पर 50 रूपये की लागत आती है. 11 एकड़ के नेट हाउस और पॉलीफार्म में लाखों पौधे लगे हुए हैं. लेकिन बाजार बंद है. फूलों की मंडियां बंद है. फूलों के शौकीन घरों में बंद हैं और अपनी सुंदरता और सुगंध से मन मोहने वाले फूल खेतों में नाउम्मीद खड़े खड़े मुरझा गये हैं.

फूलों की खेती का नहीं होता इंश्योरेंस

फूलों की खेती का ना तो इंश्योरेंस होता है और ना ही अब तक सरकार ने फूल उत्पादक किसानों को राहत देती है. बावजूद इसके किसान ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है. बहादुरगढ़ जैसे क्षेत्र में लिलियम, कारनेशन और जिप्सोफिला जैसे फूल खिलाने में भी काफी मेहनत और पैसा लगता ह.  लेकिन अब किसान ने खेत में सूख चुके इन फूलों को उखाड़ना शुरू कर दिया है.

किसानों को सरकार से उम्मीद

सरकार कई मौके पर फूल उत्पादक किसान को सम्मानित भी कर चुके हैं. केन्द्र सरकार ने लॉकडाउन में हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए राहत पैकेज भी दिया है लेकिन किसान और वो भी फूल उत्पादक किसान अब भी पैकेज से अपने लिए राहत की तालाश कर रहा है, जो शायद उसे अभी तक नहीं मिली है.

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