बहादुरगढ़ में पूर्व राजदूत आजाद सिंह तूर ने छोड़ी बीजेपी

आजाद सिंह तूर ने बताया कि वे बीजेपी प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में भी कई बार गरीबों और महिलाओं के लिए काम करने का मुद्दा उठा चुके थे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई.

Pradeep Dhankhar | News18 Haryana
Updated: September 16, 2018, 7:36 PM IST
बहादुरगढ़ में पूर्व राजदूत आजाद सिंह तूर ने छोड़ी बीजेपी
आजाद सिंह तूर ने पत्रकार वार्ता में अपने इस्‍तीफे की घोषणा की.
Pradeep Dhankhar
Pradeep Dhankhar | News18 Haryana
Updated: September 16, 2018, 7:36 PM IST
हरियाणा में झज्‍जर जिले के बहादुरगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)को एक बड़ा झटका लगा है. प्रदेश कार्यकारिणी के विशेष आमंत्रित सदस्य और पूर्व राजदूत आजाद सिंह तूर ने पार्टी को अलविदा कह दिया है. आजाद सिंह तूर ने अपना इस्तीफा लिखकर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष को भेज दिया है. बहादुरगढ़ में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में उन्‍होंने बीजेपी से अपने इस्‍तीफे की घोषणा की.

पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने गरीबों के लिए कुछ भी नहीं किया और प्रदेश में 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान भी विफल रहा. यही कारण है कि आज प्रदेशभर में महिलाएं असुरक्षित हैं और लगातार बढ़ रही रेप की घटनाएं इसका उदाहरण हैं. आजाद सिंह तूर का कहना था कि आज प्रदेश में गरीब लोगों और महिलाओं का उत्पीड़न चरम सीमा पर पहुंच गया है.

इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई नोटबंदी पर भी सवाल खड़े किए. उन्‍होंने कहा कि नोटबंदी की वजह से लाखों युवाओं की नौकरी चली गई और अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है, इसीलिए उन्होंने बीजेपी को छोड़ने का फैसला लिया है. आजाद सिंह तूर ने बताया कि वे बीजेपी प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में भी कई बार गरीबों और महिलाओं के लिए काम करने का मुद्दा उठा चुके थे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई.

आपको बता दें कि आजाद सिंह तूर भारतीय विदेश सेवा में राजदूत के पद पर सेवाएं दे चुके हैं और सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने पहले इनेलो का दामन थामा था और 2014 के चुनाव से पहले ही इनेलो छोड़कर बीजेपी में चले गए थे. अब आजाद सिंह तूर किस पार्टी में जाएंगे, इसका खुलासा तो उन्होंने नहीं किया. हालांकि उनका यह जरूर कहना है की कई सारी पार्टियों के साथ उनकी बातचीत चल रही है और वे ऐसी पार्टी में शामिल होंगे, जहां गरीब, मजदूर और महिलाओं के उत्थान के लिए कड़े कदम उठाए जाते हैं.
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