टोल प्लाजा पर डीएसपी का फर्जी आईकार्ड दिखाया, पोल खुलने पर कार लेकर भागे
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टोल प्लाजा पर डीएसपी का फर्जी आईकार्ड दिखाया, पोल खुलने पर कार लेकर भागे
कार सवार युवकों से मिला डीएसपी का फर्जी आईडी कार्ड

दिल्ली रोहतक नेशनल हाईवे संख्या 9 पर रोहद टोल प्लाजा बनाया गया है. यहां कर्मचारियों ने हरियाणा पुलिस के डीएसपी रैंक के अधिकारी का फर्जी आई कार्ड पकड़ा.

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रोहतक नेशनल हाईवे स्थित रोहद टोल प्लाजा पर मुफ्त में टोल पार क्रेटा गाड़ी में सवार होकर पांच युवक आए. उन्होंने रोकने पर हरियाणा पुलिस के डीएसपी रैंक के अधिकारी का फर्जी आई कार्ड दिखाया. जब टोल कर्मचारियों ने फर्जी आई कार्ड पहचान लिया तो खुद को घिरा देख क्रेटा गाड़ी सवार युवक मौके से फरार हो गए. यह पहली बार नहीं है कि जब पुलिस के किसी बड़े अधिकारी का फर्जी आई कार्ड मुफ्त में टोल पार करने के लिए दिखाया गया हो.

इससे पहले रोहतक रेंज के आईजी संदीप खिरवार की फोटो लगा हुआ फर्जी पहचान पत्र भी एसी टोल प्लाजा पर पकड़ा गया था. टोल मैनेजर नागेंद्र कुमार का कहना है कि रोजाना रोहद टोल प्लाजा पर करीब 50 व्यक्ति फर्जी आईडी कार्ड के सहारे टोल पार करते पकड़े जाते हैं. पुलिस में भी शिकायत दी जाती है लेकिन अब तक किसी के भी खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है.


झज्जर में दिल्ली रोहतक नेशनल हाईवे संख्या 9 पर रोहद टोल प्लाजा बनाया गया है. यहां कर्मचारियों ने हरियाणा पुलिस के डीएसपी रैंक के अधिकारी का फर्जी आई कार्ड पकड़ा. इस कार्ड पर फोटो फर्जी तरीके से कार चालक ने स्वयं का लगाया था जबकि इस कार्ड पर हरियाणा पुलिस लिखा होने के साथ-साथ नाम राजेंद्र सिंह और रंक डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस लिखा हुआ है.



इस कार्ड की दूसरी तरफ कार्ड धारक का पता कुरुक्षेत्र के पीपली की सरस्वती कॉलोनी का लिखा गया है. कार्ड के पीछे एक इमरजेंसी मोबाइल नंबर भी लिखा हुआ है. इतना ही नहीं कार्ड जारी करने वाले की स्टेम्प और सिग्नेचर भी फर्जी तरीके से लगाए गए हैं. जब कर्मचारियों ने फर्जी आई कार्ड को पहचाना तो क्रेटा गाड़ी युवक जल्दबाजी में अपनी गाड़ी लेकर फरार हो गए.
विदित हो कि वेस्ट हरियाणा हाईवे प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के पास दिल्ली के टिकरी बॉर्डर से रोहतक बाईपास तक टोल वसूलने का अधिकार है. 63 किलोमीटर की सड़क पर निर्माण कंपनी ने करीब 1200 करोड़ रुपए खर्च किए हैं. इनकी वसूली के लिए 2033 तक टोल वसूलने की मंजूरी मिली हुई है. कंपनी अधिकारियों का कहना है कि हर रोज करीब 20 लाख की वसूली का अनुमान पहले लगाया गया था लेकिन फर्जी आईडी और आसपास के कमर्शियल वाहनों की दादागिरी के कारण टारगेट से 50% की रिकवरी हो रहा है.

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