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Jind By-Election Result: जींद की जनता ने राजकुमार सैनी की पार्टी को नकारा, दिया चौथा स्थान!

जींद उपचुनाव हरियाणा की दो नई पार्टियों की किस्मत भी लिखेगा!
जींद उपचुनाव हरियाणा की दो नई पार्टियों की किस्मत भी लिखेगा!

कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी ने बीजेपी में रहते हुए नई पार्टी बनाई है. जबकि बीजेपी नेतृत्व ने अब तक उन्हें पार्टी से बाहर नहीं निकाला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 31, 2019, 5:52 PM IST
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जींद उप चुनाव में जनता ने भाजपा के बागी सांसद राजकुमार सैनी की लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी (एलएसपी) को नकार दिया है. उनकी पार्टी 13582 वोट लेकर चौथे नंबर पर रही. भाजपा उम्मीदवार कृष्ण मिड्ढा ने 12,935 वोटों से जीत दर्ज की है. मिड्ढा को 50,566 वोट मिले, जबकि सिर्फ 53 दिन पुरानी पार्टी जेजेपी (जन नायक जनता पार्टी) के उम्मीदवार दिग्विजय चौटाला दूसरे नंबर पर रहे. दिग्विजय चौटाला को 37,631 वोट मिले. वहीं कांग्रेस प्रत्याशी रणदीप सुरजेवाला 22,740 वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहे. इनेलो सिर्फ 3454 वोट लेकर पांचवें नंबर पर पहुंच गई है.

बीजेपी ने यहां इनेलो के विधायक रहे डॉ. हरीचंद मिड्ढा के बेटे कृष्ण मिड्ढा को टिकट दिया था. हरी मिड्ढा की मौत के बाद यह सीट खाली हुई थी. इसके बाद उनके बेटे बीजेपी में शामिल हो गए थे. वह यहां पर दो बार से विधायक थे. वह पंजाबी समुदाय से आते हैं. इनेलो ने कभी अपनी ही पार्टी के सिपाही रहे डॉ. हरीचंद मिड्ढा के बेटे को हरवाने के लिए उम्मेद सिंह रेढू को मैदान में उतारा था. (Jind By Election Result: बीजेपी खोलेगी खाता या कोई जाट बनाएगा रिकॉर्ड?)

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लेकिन इनेलो के लिए दिक्कत ये थी कि इस चुनाव से ठीक पहले चौटाला परिवार में फूट पड़ गई. पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला और अभय चौटाला के बीच अनबन के बाद एक नई पार्टी का जन्म हुआ. अजय चौटाला के बेटे और हिसार से सांसद दुष्यंत चौटाला ने जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) बनाकर इनेलो के लिए मुश्किल खड़ी कर दी. इस पार्टी का यह पहला चुनाव है और दुष्यंत ने अपने छोटे भाई और दिग्विजय चौटाला को मैदान में उतार दिया था. (इसे भी पढ़ें: इस प्रदेश में 2014 से कांग्रेस की जिला कमेटियां हैं भंग, पार्टी कैसे जीतेगी 2019 की जंग?)
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जींद में कुरुक्षेत्र से बीजेपी के बागी सांसद राजकुमार सैनी की लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी की भी बड़ी परीक्षा थी. सैनी ने बीजेपी में रहते हुए नई पार्टी बनाई है. जबकि बीजेपी नेतृत्व ने अब तक उन्हें पार्टी से बाहर नहीं निकाला है. सैनी ने अपनी पार्टी से ब्राह्रमण प्रत्याशी पर दांव लगाया हुआ था. पंडित विनोद आशरी ने उनकी पार्टी से चुनाव लड़ा. गणित ये था कि सैनी और ब्राह्मण वोट एकत्र होने से उनका रास्ता आसान हो जाएगा. लेकिन उन्हें मात्र 13582 वोट ही मिले. हालांकि वो राजकुमार सैनी ये जरूर कह सकते हैं कि उनकी पार्टी को इनेलो से अधिक वोट मिला है.

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